Tag Archives: जुर्म शायरी

शायरी – जुर्म यहां छुपना है मुश्किल

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जो उस खुदा का बंदा होगा
दुख में भी भला चंगा होगा

जुर्म यहां छुपना है मुश्किल
मुजरिम कभी तो नंगा होगा

दिल का जब भी राज चलेगा
फिर कैसे कहीं पे दंगा होगा

सच्ची राह जो शख्स है चुनता
उसका दुनिया से पंगा होगा

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – जुदा होकर ये दिल तुमसे और जुड़ गया है

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दुनिया में भले न हो मेरा कहीं ठिकाना
तेरे दिल के करीब हो मेरा ये आशियाना

मेरी तरफ जानेजां गुनाहों की नजर फेरो
हर बार जुर्म करो तुम और भरूं मैं जुर्माना

जब सदियां बीत गईं तेरा इतंजार करते
फिर वक्त का ही आशिक बना तेरा दीवाना

जुदा होकर ये दिल तुमसे और जुड़ गया है
अब जख्म ही दे रहा है मुसकाने का बहाना

©RajeevSingh

शायरी – मैं पराया सही पर आज भी तू मेरी है

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कोई इंसाफ न होना था, न होगा कभी
जुर्म ये माफ न होना था, न होगा कभी

मेरे इजहार से पहले तू जुदा हो गई
तुमपे इल्जाम जो लगना था, न होगा कभी

देख ले आज भी तेरे ही भरम बाकी हैं
मेरे जैसा तेरा दीवाना, न होगा कभी

मैं पराया सही पर आज भी तू मेरी है
आखिरी रिश्ता टूट जाए, न होगा कभी

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – झूठ भी बोलता हूं तुमको हंसाने के लिए

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आईने में अपनी तस्वीर बनाने के लिए
हम तरसते हैं तुमसे नजर मिलाने के लिए

हमारे प्यार को जमाने में जगह न मिली
चलो कहीं और नशेमन बनाने के लिए

दुनिया के रिश्ते फकत दौलत के तकाजे हैं
कौन जीता है किसी पे खूं बहाने के लिए

तेरे रू ब रू मैं रोज ये जुर्म करता हूं
झूठ भी बोलता हूं तुमको हंसाने के लिए

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari