Tag Archives: झील शायरी

शायरी – अब किसी दगाबाजी से दिल नहीं दुखता

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जाने किसके लिए जमाने के बाद तरसा है
आसमा आज रो रो कर बेपनाह बरसा है

मैं अभी झील हूं, बरसाती नदी न बन जाऊं
मेरे शहर के बाशिंदों को हो गया डर सा है

वह बार बार एक दरवाजे से लौट जाता है
भले बुलाती है वो कि आ ये तेरे घर सा है

अब किसी दगाबाजी से दिल नहीं दुखता
कई बार खाए धोखों का हुआ असर सा है

©rajeev singh shayari

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शायरी – इन दीवारों से बनी कैद में जी लेती हूं

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अपनी तन्हाई की तस्वीर बनाकर रखूं
आईने को अपने रूबरू बिठाकर रखूं

इन दीवारों से बनी कैद में जी लेती हूं
इस तरह खुद को मैं दुनिया से बचाकर रखूं

चांद सितारों से भरे उस आस्मा की तरह
अपने सीने में कई आग मैं जलाकर रखूं

रोक लेती हूं दरिया को जब भी चाहूं
अपनी आंखों में इसे झील मैं बनाकर रखूं

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – दे रहा हूं मैं ये इश्क की इम्तहां अपनी

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गमजदा रूह से लिखता हूं दास्तां अपनी
दे रहा हूं मैं ये इश्क की इम्तहां अपनी

मेरे सीने से छलकते हैं धड़कनों की सदा
आहटों की इस जुंबिश की है फुगां अपनी

अश्कों की झील में खिले फूल कई उम्मीदों के
वो समझ न सकी दर्द की ये जुबां अपनी

बंद आंखों में अटके रहे शबनम कितने
आईने से ये छुपाती हैं हर बयां अपनी

फुगां- रोना
जुंबिश- कंपन

©RajeevSingh #love shayari