Tag Archives: तनहाई शायरी

शायरी – तेरी मोहब्बत में ग़र परेशान नहीं होता

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तेरी मोहब्बत में ग़र परेशान नहीं होता
तो मैं पहले से बेहतर इंसान नहीं होता

बहुत दिनों तक तेरे गम में पागल रहा
उस हालात में कोई मेहरबान नहीं होता

तनहाई में खूब रोया तो अहसास हुआ
तेरा दिल रोनवालों पे कुरबान नहीं होता

टूटकर गिरा जब तो जाना है हमने कि
मोहब्बत के तारे का आसमान नहीं होता

भटकता हुआ एक जमीं तलाश रहा हूं
मगर मंजिल को पाना आसान नहीं होता

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – सोचकर तुमको ऐ हमदम, रो दिया, रो दिया

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अपना हर एक दर्द हमने, लिख दिया, लिख दिया
तुमने दिल जो-जो कहा, कर दिया, कर दिया

सुबह से शाम तलक और रात भर ये हुआ
सोचकर तुमको ऐ हमदम, रो दिया, रो दिया

मैं भला क्यूं जाउंगा, भीड़ भरी राहों पे
लाशों के जुलूस से मैं, डर गया, डर गया

बस्तियों से अब उजड़के आ गया तन्हाई में
इश्क के इस आशियां में, रह गया, रह गया

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – तुमसे हर एक मुलाकात मुझे याद आई

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तुमसे हर एक मुलाकात मुझे याद आई
जब भी तन्हाई में जी लेने की बात आई

दर्द को देखना चाहा था अपने जीवन में
सांवली सी कोई लड़की बड़ी उदास आई

मैं बहुत रोया था उस रात जब तेरे दर पे
तुझे लेने को किसी गैर की बारात आई

तेरे जीने की खबर, न अपने मरने की खबर
बेखुदी भी तो जुदाई के ही साथ आई

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – एक दिन दिल तोड़ता है वो शख्स मुस्कुराकर

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आजमा कर देखिए हर शख्स को दुनिया में
वो पहले वफा दिखाते हैं, फिर दगा करते हैं

वफा करते हैं ताकि ऐतबार वो पा ले आपका
फिर बेवफाई का फर्ज वो अदा करते हैं

वो अपना काम निकालते हैं कुछ इस हुनर से
कि आप धोखे खाकर भी उनसे मिला करते हैं

आपकी जान कब वो लेगा, ये खबर नहीं आपको
और आप उनकी सलामती की दुआ करते हैं

एक दिन दिल तोड़ता है वो शख्स मुस्कुराकर
रो-रो के तब खुद ही से आप गिला करते हैं

होता है तज़रबा ऐसा कि दुनिया की राह पे
आदमी से बच-बच कर आप चला करते हैं

परायों को तो खैर आप दुश्मन समझते ही हैं
अपनों से भी डर-डर कर रहा करते हैं

कोसते रहते हैं अपनी जिंदगी को उम्रभर
भीड़ में हंसते हैं मगर तन्हाई में रोया करते हैं

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – मैं चल पड़ा था घर से तेरी तलाश में

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सब कुछ है नसीब में, तेरा नाम नहीं है
दिन-रात की तन्हाई में आराम नहीं है

मैं चल पड़ा था घर से तेरी तलाश में
आगाज तो किया मगर अंजाम नहीं है

मेरी खताओं की सजा अब मौत ही सही
इसके सिवा तो कोई भी अरमान नहीं है

कहते हैं वो मेरी तरफ यूं ऊंगली उठाकर
इस शहर में इससे बड़ा बदनाम नहीं है

©RajeevSingh / love shayari

शायरी – जब कभी मुझको याद आती हो

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जब कभी मुझको याद आती हो
तुम मेरे दिल में आग लाती हो

मेरी तन्हाई के दर्दभरे अंधेरों में
खामोशी से मुझको रुलाती हो

दिल अश्कों को पीता रहे हमेशा
इसलिए प्यासे को भूल जाती हो

तुम अपनी उलझनों में फंसकर
कभी मिलने को कहां बुलाती हो

©राजीव सिंह शायरी