Tag Archives: तमाशा शायरी

शायरी – तू नहीं आई एक बार जो गई

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जागते-जागते सहर हो गई
इस सफर में ही बसर हो गई

रातभर रोज ही तमाशा किए
देखनेवाले की नजर सो गई

खोजता कौन है मुसाफिर को
तू नहीं आई एक बार जो गई

तेरे सिवा आखिर कौन है मेरा
ये सोचते हुए जिंदगी खो गई

सहर – सुबह

©राजीव सिंह शायरी

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शायरी – तुमने दर्द ही दिया, हमने दर्द ही लिया

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हमको दर्द से इस कदर इश्क हुआ
तुमने दर्द ही दिया, हमने दर्द ही लिया

बेवफा नाम तुझपर मुझे जंचता नहीं
तेरा नाम भी दिल ने दर्द रख दिया

इक नजर देखकर तूने मुझमें सनम
रोते रहें उम्रभर, इतना दर्द भर दिया

ये मुकद्दर दर्द का तमाशा ही तो है
कुछ मांगा नहीं मगर दर्द दे दिया

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – हो इश्क का तमाशा और हुस्न की कयामत

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हो इश्क का तमाशा और हुस्न की कयामत
ऐसे में दिल-ए-आशिक कैसे रहे सलामत

एक बूंद दर्द में डूबा, तब बन गया समंदर
किसी बेवफा ने की थी उसपे कभी इनायत

सब सूख चुकी हैं वो गुलाब की पंखुरियां
संभाल के रखा था आखिरी तेरी अमानत

आंखों में जमा होके गिले-शिकवे हुए पानी
चेहरे पे बहता दरिया, आईने की है शिकायत

©RajeevSingh # love shayari

 

शायरी – कैसे तुम्हें दिखाएंगे तन्हाई का तमाशा

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सदमे को कलेजे से लगाकर बहुत रोया
जख्मों में कई कांटे चुभोकर बहुत रोया

जाने कहां ले जाएंगे दुनिया के रास्ते
ठहरे हुए कदम को बढ़ाकर बहुत रोया

इस दर्द के पत्थर को ले कहां-कहां फिरूं
राहों पे इस जिस्म को ढोकर बहुत रोया

कैसे तुम्हें दिखाएंगे तन्हाई का तमाशा
खुद को ही आईने में दिखाकर बहुत रोया

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – क्या-क्या हो रहा सीने में ऐ दिल देखो

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दर्द पीना है मुझे, यूं ही जीना है मुझे
हरेक पल को आंसू सा गिराना है मुझे

क्या-क्या हो रहा सीने में ऐ दिल देखो
तुझे तेरा ही तमाशा दिखाना है मुझे

ना दोस्ती हो, ना कोई दुश्मनी हो कभी
इस जमाने से ये रिश्ता निभाना है मुझे

मैं भी मजबूर हूं कितना इस आदत से
रातभर चांद संग खुद को जगाना है मुझे

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – बेवफा होना था उसे, वो हुआ, बुरा क्या है

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बीती बातों को दुहराने से फायदा क्या है
जो हुआ अब उसमें अच्छा-बुरा क्या है

किस तरह बांटता है ऐ खुदा बंदों को सिफ़त
तेरी दुनिया में ये कम और ज्यादा क्या है

लोग जब दिन-रात प्यार के गीत सुनते हैं
फिर इस जहान का ये खून-खराबा क्या है

बहुत कोशिश करता हूं पर समझ नहीं पाता
ये मेरे सामने हर ओर हो रहा तमाशा क्या है

सिफ़त- गुण

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – क्या करूँ ये ही दिल की भाषा है

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मेरे हर लफ्ज़ में निराशा है
क्या करूँ ये ही दिल की भाषा है

बेवफा होते हैं बोलने वाले
हमें खामोशी का ही दिलासा है

बिना दौलत के कोई रिश्ता नहीं
सरे-बाज़ार में ये खुलासा है

सारे दुश्मन से हैं एक-दूजे के
दोस्ती तो बस एक तमाशा है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – इश्क के दर्द से दामन न बचा पाएंगे

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इश्क के दर्द से दामन न बचा पाएंगे
अपनी तन्हाई में जब तुमको जुदा पाएंगे

इन खयालों से ही दिन-रात हम रोते हैं
कि तेरे दिल से आंसू को ना मिटा पाएंगे

हमने पाया है किस्मत को तवायफ की तरह
हर तमाशे में किसी से ना वफा पाएंगे

दूर मंजिल है तेरी आंख में काजल सा बना
जाने कब तुमसे नज़र हम मिला पाएंगे

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – बेरहम याद भी मेरी रातों का सहारा ही बना

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बेरहम याद भी मेरी रातों का सहारा ही बना
ये तेरा दर्द भी मेरी आंखों का सितारा ही बना

इश्क की बात पे हम अड़ गए जान देने पर
फिर भी दिलबर किसी गैर का खिलौना ही बना

चल रहे थे वहां पे आंधियां फिजाओं में
ये तबाही भी बहारों का तमाशा ही बना

क्या कहूं मैं कि कहने का ये तजरबा है
मेरी हर बात पे दुनिया में फसाना ही बना

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – जिंदगी भर मैं उनके लिए तमाशा ही रहा

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कुछ बेकदरों का जमघट था शहर में
उम्रभर मैं उनके लिए तमाशा ही रहा

मेरे गमों पर करता रहा वो छींटाकशी
हर कोई मेरे दर्द को ठुकराता ही रहा

मैं बहुत परेशां हुआ खुद को बनाने में
जब देखो जमाना मुझे मिटाता ही रहा

अपने वजूद की सच्चाई पाने के लिए
मैं जिंदगी को भीड़ से हटाता ही रहा

 

©rajeev singh shayari