Tag Archives: दरिया शायरी

शायरी – किसकी सिसकी ये कहती है

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कट कट के ही रात कटेगी
जाने कितने करवट बदेलगी

किसकी सिसकी ये कहती है
ऐ दरिया, तू चुपके से बहेगी

इश्क की राख अपने बदन पे
जिंदगी कब तक मलती रहेगी

जुगनू जैसी उम्मीद है बाकी
मुझमें तू जल जल के बुझेगी

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – तूने आशिकी में मेरे दिल के टुकड़े किए

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जख्मे-दिल सीने में दरिया सा बहता है
मेरे खूने-जिगर में तेरा खंजर रहता है

तूने आशिकी में मेरे दिल के टुकड़े किए
तेरा जाना मुझे शीशे की तरह चुभता है

कोई अंजाम बाकी नहीं मेरे जीवन में
दर्द ही दर्द आठों पहर आंखों से रिसता है

जहां भी रहो, तुम खुश रहना मेरी जान
ये दिल तेरी खातिर यही दुआ करता है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – तुझे करते हैं याद, दिन हो या रात

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ये जिस्मो-जां और मेरे सारे जज़्बात
तुझे करते हैं याद, दिन हो या रात

चांद अब तक नहीं आई मेरे दामन में
उदास है मन सोचकर बस यही बात

मैं समंदर हूं, दरिया हूं या कुछ भी नहीं
जब पानी नहीं तो सबके एक से हालात

मन में आती है, पहलू में तो नहीं आती
क्यों कराते हो ऐ ख्वाब उनसे मुलाकात

अब तो इंतहा हो चुकी है मेरे सब्र की
शायद खुदा को मंजूर नहीं हमारा साथ

शायरी – हो इश्क का तमाशा और हुस्न की कयामत

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हो इश्क का तमाशा और हुस्न की कयामत
ऐसे में दिल-ए-आशिक कैसे रहे सलामत

एक बूंद दर्द में डूबा, तब बन गया समंदर
किसी बेवफा ने की थी उसपे कभी इनायत

सब सूख चुकी हैं वो गुलाब की पंखुरियां
संभाल के रखा था आखिरी तेरी अमानत

आंखों में जमा होके गिले-शिकवे हुए पानी
चेहरे पे बहता दरिया, आईने की है शिकायत

©RajeevSingh # love shayari

 

शायरी – कब तू मुझे समझेगी, बस यही सोचता हूं मैं

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एक नजर की जुस्तजू में तुझे देखता हूं मैं
कब तू मुझे समझेगी, बस यही सोचता हूं मैं

करीब से गुजरती हो तो मचल उठता है दिल
न जाने किस तरह रोज खुद को रोकता हूं मैं

तेरे हुस्न की चांदनी में मेरा इश्क हुआ रोशन
चांद के साये को दरिया में बहुत ताकता हूं मैं

इन मदभरी जुल्फों में खो जाऊंगा एक दिन
तेरे ख्वाबों की इन रातों में, यही चाहता हूं मैं

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – जिस रहगुजर पे चले दूर तक तेरी तलाश में

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दर्द ए मुहब्बत के अफसानों में खोये जा रहा हूं
जानेजां तुझे अपनी गजलों में पिरोये जा रहा हूं

मुफलिसी के आसमान में चांद तो नहीं निकलता
दिल के अंधेरों में सितारों को जलाए जा रहा हूं

दर्द की नमी को हमने आंखों में बसा लिया है
गमों की दरिया को चेहरे पे बहाए जा रहा हूं

जिस रहगुजर पे चले दूर तक तेरी तलाश में
उसी को अब अपना हमसफर बनाए जा रहा हूं

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – मेरे आंचल में दर्द है और कुछ भी नहीं

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दिल लगाने के लिए तुम चले आए हो
इश्क में जान गंवाने तुम चले आए हो

मेरे कांटे तेरे दामन को चुभ जाएंगे
क्यूं अपना खून बहाने तुम चले आए हो

कोई दरिया मेरे दागों को न धो पाएगा
इसे आंसू से छुड़ाने तुम चले आए हो

मेरे आंचल में दर्द है और कुछ भी नहीं
इस दामन से क्या लेने तुम चले आए हो

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – तेरी जुल्फों तले सोया रहूं आंखें बंदकर

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बस यही ख्वाब है कि जीवन तेरे संग गुजरे
जो पल आए, वो पल बस तेरे संग गुजरे

तेरी जुल्फों तले सोया रहूं आंखें बंदकर
तुम बांहों में रहो और रात ये संग गुजरे

चांद देखता रहे हमें एकटक बेखुद होकर
प्यार चांदनी में करें, ये दरिया संग गुजरे

बिखर जाए खुशबू, फिजा नाचे झूमकर
हर राह में यूं मुहब्बत हमारे संग गुजरे

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – ऐ हुस्न तेरी अगन लगी है मेरे दिल में

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हम कोई गैर हैं दर्द की दरिया के लिए
कितने बेताब हैं आंसू छोड़ जाने के लिए

चांद फलक पे अकेला ही है सितारों में
ऐसा कोई चाहिए तन्हाई सजाने के लिए

ऐ हुस्न तेरी अगन लगी है मेरे दिल में
रात आती है मुझे खाक बनाने के लिए

क्या खबर थी एक फूल भी चुभ जाएगी
आए थे यहां कांटों से खुद को बचाने के लिए

(फलक- आकाश)

©RajeevSingh

शायरी – वहीं मिल जाएगी एक दरिया उसे रोती हुई

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अभी बरसात है, कभी रुकती कभी गिरती हुई
और एक शाम है भीगी हुई सी ढलती हुई

कौन जाने कि ये घटाएं कहां तक जाएंगी
जाने किस मोड़ पे बेवफा होगी हवा चलती हुई

जिस जगह कोई तलाशेगा वजूद अपना
वहीं मिल जाएगी एक दरिया उसे रोती हुई

ये फलक कितने मुसाफिरों का आशियाना है
फिर भी चिंगारियां हैं उसके दामन में जलती हुई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – बेखुद मेरी तन्हाइयां किस राह पर हाय चल पड़ी

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आवाज न कोई दूर तक, आहट न कोई दूर तक
इंसां न कोई हमसफर, चाहत न कोई दूर तक

बेखुद मेरी तन्हाइयां किस राह पर हाय चल पड़ी
मकां न कोई दूर तक, मंजिल न कोई दूर तक

मुसाफिरों की भीड़ में कुछ लोग जो मितवा हुए
वो रह गए रुककर कहीं, मैं चल पड़ा कहीं दूर तक

दरिया ही एक महबूब है, वो चांद ही एक यार है
मेरी आंख भी बहती रही, जलता गया दिल दूर तक

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – तुम भी आंसू की तरह हमको छोड़ जाओगे

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देखते-देखते ही तुम कहीं खो जाओगे
तुम भी आंसू की तरह हमको छोड़ जाओगे

जब तलक चिराग है दिल में, हम समझेंगे
इस रोशनी में तुम कहीं पे दिख जाओगे

हम भटकते हुए खोजेंगे रेगिस्तानों में
और तुम भी किसी दरिया में छुप जाओगे

ये मेरा चेहरा, मेरे आंसू याद आएंगे
जानता हूं कि मेरा इश्क ना भूल पाओगे

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – मेरा दिल तेरी यादों में डूब गया दरिया किनारे

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कितने दिनों के बाद मैं आया हूं दरिया किनारे
घाट पे मैं बैठा रहा देर तक दरिया किनारे

एक पत्थर पानी के दामन को छूकर खो गया
मेरा दिल तेरी यादों में डूब गया दरिया किनारे

शाम का ये चांद निकल आया है मेरे सामने
फिर अंधेरा छा रहा है आंखों में दरिया किनारे

अठखेलियां करते परिंदे खुद अपने में मस्त हैं
झुंड में तो कभी अकेले उड़ते हैं दरिया किनारे

(मेरी शायरी में जो दरिया, चांद या शाम है वह दरअसल वाराणसी में गंगा किनारे से प्रेरित है जहां मेरी शामें गुजरती थीं।)

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari