Tag Archives: दाग शायरी

shayari – बेवफाई का ये जख्म जो तेरे बाद नहीं रहता

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सुनने का वक्त शायरी इमेज

बेवफाई का ये जख्म जो तेरे बाद नहीं रहता
प्यार को कैसे जी पाती जो ये दाग नहीं रहता

यूं तो हर शख्स कहता है कि वादा निभाएगा
मतलब निकल जाए तो कुछ याद नहीं रहता

अपना साया भी नहीं तो उम्मीद क्या गैरों से
बदनसीबी आती है तो कोई साथ नहीं रहता

दर्द ए दिल दुनिया में किसी को बता न सकी
सुनने का वक्त यहां किसी के पास नहीं रहता

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शायरी – दर्द कम न हो कभी इस दिल में

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दो चिरागों को आग मिल जाए
दो दीवानों की आंख मिल जाए

हुस्न और इश्क पास बैठे हों
कोई तो ऐसी शाम मिल जाए

दोनों रूहों का कुदरती रिश्ता
काश दोनों को खबर मिल जाए

दर्द कम न हो कभी इस दिल में
चांद को भी तो दाग मिल जाए


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शायरी – मुसकाएं आखिर कैसे, दिल तो टुकड़ा-टुकड़ा है

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दिल पे जख्म का पहरा है
दर्द बड़ा ही गहरा है

खामोशी या उदासी में
जीवन का ही दुखड़ा है

मुसकाएं आखिर हम कैसे
दिल तो टुकड़ा-टुकड़ा है

देख लो मेरे दामन में
दाग ही हरसू बिखरा है

हरसू- हर ओर


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शायरी – राह पे जब तू साथ न आया

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तेरा दामन मेरे हाथ न आया
तुझपे भी कोई दाग न आया

पीछे मुड़के अब क्या देखूं
राह पे जब तू साथ न आया

रख ली हथेली पे माथे को
दर्द को जब दिल झेल न पाया

मेरी आंखें तुमसे जुदा हैं
रात हुई पर चांद न आया


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शायरी – जिस दिल पे इश्क का दाग है

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जिस दिल पे इश्क का दाग है
उस चांद पे न नकाब है

घर-घर में वो ही उदास है
जिस हुस्न पर ये शबाब है

ऐ खुदा, मुझे गिन के बता
मेरे जख्म का क्या हिसाब है

जो बेवफाई से ही जला
ये जहान ऐसा चिराग है


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शायरी – इस दिल को ये मंजूर है, तू खुश रहे हर हाल में

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कहता हूं मैं ये बात भी तेरी भलाई के लिए
न चुन तू टूटी चूड़ियां अपनी कलाई के लिए

इस दिल को ये मंजूर है, तू खुश रहे हर हाल में
मुझसे न तू ये इश्क कर दर्दे-जुदाई के लिए

दुनिया पे मैं एक दाग हूं, तन्हा सा नाशाद हूं
जज़्बात में जीता हूं बस दिल जलाई के लिए

मुफलिस के दामन से तुझे मिलेगा क्या भला
तू मान जा धनवान से अपनी सगाई के लिए

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शायरी – अगर पत्थर के सीने में भी कोई दर्दे-दिल होता

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अगर पत्थर के सीने में भी कोई दर्दे-दिल होता
किसी शीशे को ये तोड़े, कभी मुमकिन नहीं होता

मसीहा ने जमाने को सिखाया राह पे चलना
मगर दुनिया में कोई सच्चा मुसाफिर नहीं होता

जिस्म में दर्द ही रूह का अहसास करता है
हर किसी के सीने में ये जख्म का खंजर नहीं होता

दाग ये धुल न जाए, आग ये बुझ ना जाए
इश्क में इनके सिवा और कुछ हासिल नहीं होता

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शायरी – मेरा इश्क तो सरेआम है और दिल बड़ा बदनाम है

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जहान से अब जाने दो, इस मुकाम से अब जाने दो
कितने बरस तेरे बिन जीऊं, तेरा नाम लेकर जाने दो

तू मिली थी तो नसीब था कि मिला नहीं तुमसे कभी
मेरे दिल में जो दबी रही वो अरमान अब दफनाने दो

मेरा इश्क तो सरेआम है और दिल बड़ा बदनाम है
बेदाग से इस चांद पे कुछ दाग तो लग जाने दो

तू जो सामने आए कभी, तेरे सितम की मैं दाद दूं
और फिर कहूं तुझे अलविदा, कोई ऐसा पल आने दो

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – जख्म जब-जब दिल में मेरे इश्क में जल उठा

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आईना देखा तो मेरा एक अलग ही रूप था
कल तलक जो अक्स था, आज वो इक दाग था

बस मेरी तू आरजू थी, चूड़ होकर रह गई
मैं भी शायद जिंदगी का एक टूटा ख्वाब था

मिट्टी का हर दर्द तो फूल बनकर खिल गया
मेरे सीने में भी गम का एक हसीन गुलाब था

जख्म जब-जब दिल में मेरे इश्क में जल उठा
आंख से पानी बहे, उस पानी में भी आग था

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शायरी – खामोशियां, तन्हाइयां और दर्द की अंगराइयां

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खामोशियां, तन्हाइयां और दर्द की अंगराइयां
इस रूह से उठती है ये इश्क की पूरवाइयां

अपनी ही जिंदगी मेरी कांटों पे ही सो गई
अब ख्वाब में उड़ती है मेरे खून की चिंगारियां

इस शाम सलोने ने मुझे चांद दिया है
इतनी हसीन चीज पे है दाग की परछाइयां

जज़्बातों की नदियां सभी सागर से बिछड़ गई
मेरा वजूद बह गया, है बच गई जुदाइयां

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – दर्द से काम लिया तो हम बदनाम हुए

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दिल गुनाहों से हुआ पाक, बड़ा ताज्जुब है
दो निगाहों से हुआ चाक, बड़ा ताज्जुब है

दर्द से काम लिया तो हम बदनाम हुए
और तुमने भी दिए दाग, बड़ा ताज्जुब है

हम तो मिलने ही गए थे महबूब के शहर
उसके दर पे मिला खाक, बड़ा ताज्जुब है

यूं तो खाते रहे जिंदगीभर धोखे पर धोखा
लेकिन संभला नहीं दिल, बड़ा ताज्जुब है

चाक – टुकड़े

©RajeevSingh