Tag Archives: दीया शायरी

शायरी – जिस शहर में सच्चा हमसफर न मिलेगा

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जिस शहर में सच्चा हमसफर न मिलेगा
मुसाफिर वहां सफर में कहां तक चलेगा

हर जगह जहां बेवफाओं की महफिलें हैं
एक तन्हा उस मंजर में कहां तक टिकेगा

मकानों के कारवां में फंसके फड़फड़ाया
गलियों की कैद में परिंदा कहां तक रहेगा

चांद सूरज भी जहां अपना वजूद खो चुका
उस शहर में दीया फिर कहां तक जलेगा

©राजीव सिंह शायरी

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शायरी – दिल के घर में चुपके से वो

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हमने ही तो आग लगाई
बेशक उसने थी सुलगाई

दिल के घर में चुपके से वो
एक दीया थी लेकर आई

जलकर खाक हुआ फिर भी
हमने उसकी जान बचाई

मरकर चला गया दीवाना
तुम देने नहीं आई विदाई

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – जब तेरे दिल में झांक लेंगे हम

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जब तेरे दिल में झांक लेंगे हम
अपनी मुहब्बत को आंक लेंगे हम

दर्द की भूख को मिटाने के लिए
तेरे खयालों को फांक लेंगे हम

इन अंधेरों में तुझे देखने की खातिर
कोई दीया आंखों में टांक लेंगे हम

हर तरफ तेरी ही राह मिलते जाएंगे
चाहे जिधर खुद को हांक लेंगे हम

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – तुम तो कहते हो मैं सब कुछ हूँ तेरे लिए

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आईना और पत्थर के दरम्यां हूँ मैं
दिले-नादां और जिंदगी के दरम्यां हूँ मैं

आज हमने भी लगा ली है जां की कीमत
अब हथेली पर रखा हुआ दीया हूँ मैं

तुम तो कहते हो मैं सब कुछ हूँ तेरे लिए
लोग कहते हैं कि बर्बाद सा सामां हूँ मैं

कोई तन्हा कहां जी सका है दुनिया में
ये तो तुम हो कि थोड़ा सा जी रहा हूं मैं

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – बुने हैं दर्द के धागों से इश्क की चादर

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जला रहा हूं ये दिल, कोई दीया तो मिले
हुए हैं खाक मगर हाय कहीं धुआं तो मिले

बुने हैं दर्द के धागों से इश्क की चादर
इसे बिछाऊंगा पर तेरा आशियां तो मिले

सजा रहा हूं कांटों को अपने गुलशन में
मेरे चमन को दीदार-ए-बहारां तो मिले

सजा-ए-मौत न मिल पाई इस मुजरिम को
मगर गुनाह की कोई दास्तां तो मिले

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari