Tag Archives: दो बरस की शायरी

शायरी – दो बरस की बात थी, गुमनाम सी मुलाकात थी

new prev new next

इक अजनबी मोड़ पे,  इश्क के जोर पे
कुछ देखा न सुना, मैंने तुमको था चुना

दो बरस की बात थी, गुमनाम सी मुलाकात थी
वो मोड़ है आज भी, इश्क का जोर आज भी

मैं उस मोड़ पे रुका, जाने क्या दिल में उठा
कुछ देखा न सुना, एक नज्म मैंने बुना

कोरे कागज पे लिखा, हमने तेरी हर अदा
बस यही काम है, शायरी मेरी पहचान है

तू शायरी की जान है, बस तेरा ही नाम है
और क्या कहूं, यही मेरा आखिरी अंजाम है

©RajeevSingh

Advertisements