Tag Archives: दौलत शायरी

शायरी – झूठ भी बोलता हूं तुमको हंसाने के लिए

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आईने में अपनी तस्वीर बनाने के लिए
हम तरसते हैं तुमसे नजर मिलाने के लिए

हमारे प्यार को जमाने में जगह न मिली
चलो कहीं और नशेमन बनाने के लिए

दुनिया के रिश्ते फकत दौलत के तकाजे हैं
कौन जीता है किसी पे खूं बहाने के लिए

तेरे रू ब रू मैं रोज ये जुर्म करता हूं
झूठ भी बोलता हूं तुमको हंसाने के लिए

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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शायरी – दोनों जुदा-जुदा हैं, जमाने को खबर है

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एक टुकड़ा इधर है, एक टुकड़ा उधर है
दोनों जुदा-जुदा हैं, जमाने को खबर है

आशिक है आफताब सा दीपक बना हुआ
माहताब सा माशूक ही उसका दिलबर है

छूती है घटाओं को ये सर्द हवा जब
सावन के दर्द में भीग जाता शहर है

हर राह जमाने की जाती है बाजार में
हर शख्स की इसलिए दौलत पे नजर है

आफताब – सूरज
माहताब – चांद

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शायरी – वो ही डरते रहे बहुत इस मुहब्बत से

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जो अपने घर से जुड़े हैं एक मुद्दत से
वो ही डरते रहे बहुत इस मुहब्बत से

पत्थरों के मुहल्ले में सभी पैदा हो गए
उबर न पाए कभी वो बुतों की हसरत से

हर एक रिश्ते का नाम बस तिजारत है
जमाना खाली है यहां दिलों की कुरबत से

कहीं से आके कोई छीन न ले दौलत को
मरे हैं शहर में कई लोग इस दहशत से

(तिजारत- व्यापार, कुरबत- करीबी)

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शायरी – क्या करूँ ये ही दिल की भाषा है

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मेरे हर लफ्ज़ में निराशा है
क्या करूँ ये ही दिल की भाषा है

बेवफा होते हैं बोलने वाले
हमें खामोशी का ही दिलासा है

बिना दौलत के कोई रिश्ता नहीं
सरे-बाज़ार में ये खुलासा है

सारे दुश्मन से हैं एक-दूजे के
दोस्ती तो बस एक तमाशा है

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शायरी – मुंह मोड़ गए थे तुम मेरी मायूस सूरत देखकर

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ढूंढकर पाएंगे क्या हम दुनिया के घर-बार में
क्या मिलेगा दिल को इस दौलत के बाजार में

बस पूछते हैं सब यही काम क्या करता हूं मैं
कहता हूं दिल पे हाथ रख, मैं हूं इसके बेगार में

मुंह मोड़ गए थे तुम मेरी मायूस सूरत देखकर
तूने भी ये देखा नहीं कि क्या है दिले-बीमार में

तन्हाइयों की रात में हम सो नहीं पाए कभी
बस छत पे टहलते रहे सोए हुए संसार में

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शायरी – ये नजर-नजर की बात है कि किसे क्या तलाश है

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ये नजर-नजर की बात है कि किसे क्या तलाश है
तू हंसने को बेताब है, मुझे रोने की ही प्यास है

तुम फूल देखते हो जब, रख लेते हो उसे तोड़कर
मेरे लिए हर फूल इस कुदरत का हसीं ख्वाब है

तुम चाहते हो लोग तुम्हें देखें और तारीफ करें
हम सोचते हैं दुनिया में वो करता झूठी बात है

इन चांद-तारों में है क्या, इन हसीं नजारों में है क्या
उसे क्या पता जिसकी नजर पर दौलत का नकाब है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – ऐसी बस्ती में रो रहे हैं पत्थर कई

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धन-दौलत के लिए लड़ रहे हैं शहर कई
इस आग में जल रहे हैं शहर कई

और पाने की चाहत में दुखी रहते हैं
ऐसी बस्ती में रो रहे हैं पत्थर कई

दूसरों की तरक्की से परेशान होकर
ठीक से सो नहीं पा रहे हैं नजर कई

होड़ ऐसी है खजाने को पा लेने की
अपने रिश्तों में उठ रहे हैं खंजर कई

©RajeevSingh