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शायरी – चांद बदन को चूम रहा है, दरिया गुमसुम लेटी है

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चांद बदन को चूम रहा है, दरिया गुमसुम लेटी है
पंखा झलती है हवाएं, हलचल थोड़ी होती है

बादलों की छत से सितारे, देख रहे हैं आंखें फाड़े
बैठ गगन भी सोच रहा है, धरती सुंदर लगती है

आज भी परदेस गया है, सूरज शाम की गाड़ी से
दिन के रथ पे बैठके फिर से रात की रानी आई है

वक्त का पहरा हुआ ढीला,उसने पी इश्क की बोतल
मौसम भी आजाद हुआ, मिलन की खुशबू उड़ती है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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शायरी – तेरा दामन ना भींगा मेरे आंसू से अब तक

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भटकते जा रहे हो, बरसते जा रहे हो
तपी धरती से रिश्ता निभाते जा रहे हो

मुझे कितनी कसक है, तुझे मालूम है सब
मगर मुझसे दुख अपना छुपाते जा रहे हो

अरे मैं तो इधर हूं, उधर बस तू ही तू है
कदम किसकी तरफ तुम बढ़ाते जा रहे हो

तेरा दामन ना भींगा मेरे आंसू से अब तक
मगर आंचल को मेरे भिंगोते जा रहे हो

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari