Tag Archives: नदी शायरी

शायरी – अब किसी दगाबाजी से दिल नहीं दुखता

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जाने किसके लिए जमाने के बाद तरसा है
आसमा आज रो रो कर बेपनाह बरसा है

मैं अभी झील हूं, बरसाती नदी न बन जाऊं
मेरे शहर के बाशिंदों को हो गया डर सा है

वह बार बार एक दरवाजे से लौट जाता है
भले बुलाती है वो कि आ ये तेरे घर सा है

अब किसी दगाबाजी से दिल नहीं दुखता
कई बार खाए धोखों का हुआ असर सा है

©rajeev singh shayari

शायरी – एक नदी की चाहत तो उस रेगिस्तां को भी है

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समंदर से प्यार करना कोई नदी छोड़ पाती नहीं
रेगिस्तां की तरफ भूलकर भी कभी वो जाती नहीं

एक नदी की चाहत तो उस रेगिस्तां को भी है
मगर प्यासे की प्यास कोई भी बुझाती नहीं

जहां कांटें ही हैं, फूलों का खिलना मयस्सर नहीं
वहां रेतों को सींच, कोई गुलशन बसाती नहीं

जिधर पानी अथाह, उसी के दामन को थामेगी नदी
इधर पानी नहीं, ये कमी तो कभी भर पाती नहीं

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – तेरा दर्द आंसू में गिर पड़ा, पर मैं कभी रो न सका

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ले चला तूफान ए इश्क, जाने कहां, किस देस में
भटका तेरी तलाश में आवारा दिल किस देस में

तेरा दर्द आंसू में गिर पड़ा पर मैं कभी रो न सका
तू नदी में जाके बुझ गई, मैं जलता ही रहा रेत में

जो मिला करे जुदा न हो, जो जुदा हो याद न आए
मुमकिन नहीं ये जहान में, समझा था बड़ी देर में

मैं फूल से जुड़ने को उसकी डाल का कांटा बना
वो फूल मुझे चुभती रही, रोया बहुत इस फेर में

©राजीव सिंह शायरी