Tag Archives: नसीब शायरी

शायरी – अजनबी तू क्यों दिल के करीब लगता है

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जबसे देखा है तुमको, तू ही हबीब लगता है
अजनबी तू क्यों दिल के करीब लगता है

तेरे उदास चेहरे पे ये लबों की मुस्कुराहट
देखती हूं तो ये अहसास अजीब लगता है

मेरे पास आकर तुम दामन जो थाम लो
अब जिंदगी में यही अच्छा नसीब लगता है

तूने मेरी दुआ न सुनी तो मर जाऊंगी
तेरे बिन जीवन अब तो सलीब लगता है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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शायरी – तेरे दर्द पे जिसे रोते देखा

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तब तेरा गम नसीब होता है
जब तू दिल के करीब होता है

तेरे दर्द पे जिसे रोते देखा
उसका मरना अजीब होता है

तेरी चारागिरी की राह तकता
वो इश्क का मरीज होता है

जिसके अंदर जुनूं है दुनिया में
उसके खातिर सलीब होता है

चारागिरी- इलाज

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – मुहब्बत की दुआ तुम तक पहुंच जाती तो अच्छा था

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मोहब्बत की दुआ तुम तक पहुंच जाती तो अच्छा था
तू कभी चल कर हमारे पास आ जाती तो अच्छा था

सारी दुनिया का दर्द तेरी दो आंखों में सिमट आया था
समंदर की लहरें मेरे दामन भिगो जाती तो अच्छा था

कभी करीब से चांद को छूना अब तक तो नसीब न हुआ
मेरे आईने को एक बार चेहरा दिखा जाती तो अच्छा था

तुझे भूल सकता हूं मगर ये करने को मेरा जी नहीं करता
इस आशिक को तू अपने जैसा बना जाती तो अच्छा था

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – कसम देकर मेरी राह भूल जाओगी तुम

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तुझे हम बेवफाई का ये सिला दे जाएंगे
उम्रभर तेरे गम में खामोश रह जाएंगे

कसम देकर मेरी राह भूल जाओगी तुम
हम किसी मोड़ पे मुंतजिर दिख जाएंगे

जिन चिरागों को जलना नसीब न हुआ
जुदा होके तेरी यादों से वो जल जाएंगे

कितना बेबस हुआ जिंदगी में तेरे बिना
अब चाहकर भी तुमसे न मिल पाएंगे

मुंतजिर- इंतजार में

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – मेरा इश्क तो सरेआम है और दिल बड़ा बदनाम है

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जहान से अब जाने दो, इस मुकाम से अब जाने दो
कितने बरस तेरे बिन जीऊं, तेरा नाम लेकर जाने दो

तू मिली थी तो नसीब था कि मिला नहीं तुमसे कभी
मेरे दिल में जो दबी रही वो अरमान अब दफनाने दो

मेरा इश्क तो सरेआम है और दिल बड़ा बदनाम है
बेदाग से इस चांद पे कुछ दाग तो लग जाने दो

तू जो सामने आए कभी, तेरे सितम की मैं दाद दूं
और फिर कहूं तुझे अलविदा, कोई ऐसा पल आने दो

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – इस बदनसीब के इश्क में तुझे डूबकर भी क्या मिला

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मुझे टूटकर क्या मिला, तुझे रूठकर भी क्या मिला
जब बेवफा ही नसीब हो तब रोकर भी क्या मिला

अब आग से हम दूर हैं पर खाक के तो पास हैं
ठंढ़ी हुई है चिता मेरी, मुझे जलकर भी क्या मिला

मेरे साथ गर्दिश में रहे, मेरे संग-संग रोते रहे
इस बदनसीब के इश्क में तुझे डूबकर भी क्या मिला

ये जिगर लहू से भर गया जब जख्म भी रिसने लगे
मेरे आंसुओं को रोककर इस नजर को भी क्या मिला

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – मैं चल पड़ा था घर से तेरी तलाश में

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सब कुछ है नसीब में, तेरा नाम नहीं है
दिन-रात की तन्हाई में आराम नहीं है

मैं चल पड़ा था घर से तेरी तलाश में
आगाज तो किया मगर अंजाम नहीं है

मेरी खताओं की सजा अब मौत ही सही
इसके सिवा तो कोई भी अरमान नहीं है

कहते हैं वो मेरी तरफ यूं ऊंगली उठाकर
इस शहर में इससे बड़ा बदनाम नहीं है

©RajeevSingh / love shayari