Tag Archives: निगाह शायरी

शायरी – वो गजल है जो मिली है कोरे कागज को

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समर्पित है ये मेरा प्यार एक मूरत को
भूल न पाऐंगे उस दर्द भरी सूरत को

उसकी तस्वीर है मेरी निगाहों में बसी
अश्क ही है जलाने के लिए दीपक को

ये मेरा दर्द मेरे सीने में दफन ही रहा
यही चाहिए मरने के लिए आशिक को

चाहतें ना मिली मगर बेरुखी ही सही
वो गजल है जो मिली कोरे कागज को

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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शायरी – मुझे देखते ही हर निगाह पत्थर सी क्यूँ हो गई

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अब जानेमन तू तो नहीं, शिकवा-ए-गम किससे कहें
या चुप रहें या रो पड़ें, किस्सा-ए-गम किससे कहें

मुझे देखते ही हर निगाह पत्थर सी क्यूं हो गई
जिसे देख दिल हुआ उदास,हैं आंखें नम,किससे कहें

इस शहर की वीरां गुलशनें, हैं फूल कम, कांटे कई
दामन मेरा छलनी हुआ, हम दर्दो-गम किससे कहें

कोई रहगुज़र तो देर तक टिकता नहीं कदमों तले
तेरा निशां है कहीं नहीं, मंज़िल न सनम, किससे कहें

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शायरी – जी तो करता है मेरे सामने तुम बैठी रहो

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जी तो करता है मेरे सामने तुम बैठी रहो
अपनी इन दर्द भरी आँखों से मुझे देखती रहो

मैं खुद डूब जाऊँ तेरी इन निगाहों में
और तुम खामोशी से मुझमे खोयी रहो

ये उदासी तेरी सूरत पे बहुत सजती है
चाहता हूँ कि तुम यूँ ही जरा प्यासी रहो

तेरे नूर से मेरे दिल में शमा जलती रहे
और तुम सामने बैठी रहो, बस बैठी रहो

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शायरी – कौन सा फूल चुनूँ तेरी बंदगी के लिए

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दर्द इतना है जरूरी जिंदगी के लिए
नूर जितना है जरूरी निगाहों के लिए

एक नन्हा सा दीया बारहा जलता रहा
वही जुगनू था मुझे राह दिखाने के लिए

तेरे इस हुस्न को देखके ये उलझन थी
कौन सा फूल चुनूँ तेरी बंदगी के लिए

जब भी दीवाना हुआ पानी इस दरिया में
चाँदनी आई थी कफन ओढ़ाने के लिए

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शायरी – दीवानों का ये पागलपन, ये फितरत आप क्या जाने

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मुहब्बत आप क्या जाने, शराफत आप क्या जानें
अरे दुनिया के सौदाई, ये उल्फत आप क्या जानें

दिलों में जल रहे शोले, निगाहों से गिरे झरने
कभी महसूस न हो तो ये कुदरत आप क्या जानें

जिन्हें महबूब की सूरत से बेहतर कुछ नहीं दिखता
दीवानों का ये पागलपन, ये फितरत आप क्या जानें

न दौलत है न जागीरें, न रहने का ठिकाना है
फकीरों की तरह जीने की कीमत आप क्या जानें

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शायरी – सुन लो मैंने क्या सीखा है तेरे ही आईने से

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देखता हूं आईना, देखता हूं कुछ नहीं
अपनी सूरत के बारे में सोचता हूं, कुछ नहीं

सुन लो मैंने क्या सीखा है तेरे ही आईने से
देखता हूं मैं बस तुमको, बोलता हूं कुछ नहीं

देखना गर देखना हो, देख लेना खुद ही को
आखिर में तुम पाओगी, आईना है कुछ नहीं

देखना भी एक हुनर है, आईना है निगाहों में
अपने अंदर जब-जब देखा, बाहर देखा कुछ नहीं

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – तड़प-तड़प कर मांग रही हो किसको तुम दुआओं में

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जाने क्यूं बेचैनियां हैं तेरी इन निगाहों में
तेरे जुबां खामोश खत हैं, क्या लिखा है आहों में

गमजदा तेरी सूरत पे खौफ का जो मंजर है
चांद डूब रहा हो जैसे गर्दिश की पनाहों में

कोई तमन्ना दिल में तेरे अपना जोर लगाती है
तड़प-तड़प कर मांग रही हो किसको तुम दुआओं में

ये घनेरी काकुलें जो चूमती हैं गालों को
एक हसीं तस्वीर हो तुम मेरी इन निगाहों में

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शायरी – मेरा आगोश तेरे साये से लिपट जाता है

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मेरा आगोश तेरे साये से लिपट जाता है
कई रातों से ये ख्वाब टूट जाता है

जब तलक हैं जुदा, पूनम भी अमावस है
चांद कतरों में निगाहों से बह जाता है

मुझे गुलशन की गुलाबें तो नसीब नहीं
यूं भी पतझड़ में कांटा ही रह जाता है

बस्तियां गम की बसाता हूं हर रोज मगर
इश्क की आग में हर आशियां जल जाता है

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शायरी – दर्द से काम लिया तो हम बदनाम हुए

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दिल गुनाहों से हुआ पाक, बड़ा ताज्जुब है
दो निगाहों से हुआ चाक, बड़ा ताज्जुब है

दर्द से काम लिया तो हम बदनाम हुए
और तुमने भी दिए दाग, बड़ा ताज्जुब है

हम तो मिलने ही गए थे महबूब के शहर
उसके दर पे मिला खाक, बड़ा ताज्जुब है

यूं तो खाते रहे जिंदगीभर धोखे पर धोखा
लेकिन संभला नहीं दिल, बड़ा ताज्जुब है

चाक – टुकड़े

©RajeevSingh