Tag Archives: निशां शायरी

शायरी – जो पल गुजारे हमने तेरी याद में

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बेदर्द ये रातें और हिज्र के मौसम
खुद पर खामोशी से मनाते हैं मातम

दिल में उठा अभी आंसू के तूफां
नजरों के रहगुजर में आया है सावन

बस्ती में कहीं पर निशां नहीं तेरा
हम ढूंढ़ रहे हैं कबसे तेरा आंगन

जो पल गुजारे हमने तेरी याद में
हर पल मिला है तेरे दर्द का दामन

हिज्र- जुदाई

©RajeevSingh # love shayari

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शायरी – सीने में जो आग जली है, जलके कोई राख न छूटे

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दर्दे दिल से आह न रूठे
साज का एक तार न टूटे

सीने में जो आग जली है
जलके कोई राख न छूटे

जख्मों पे बस तेरे निशाँ हैं
दाग ये पड़ जाए न फीके

अश्कों ने आवाज तो दी थी
बेकस के गम तूने न देखे

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – मुझे देखते ही हर निगाह पत्थर सी क्यूँ हो गई

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अब जानेमन तू तो नहीं, शिकवा-ए-गम किससे कहें
या चुप रहें या रो पड़ें, किस्सा-ए-गम किससे कहें

मुझे देखते ही हर निगाह पत्थर सी क्यूं हो गई
जिसे देख दिल हुआ उदास,हैं आंखें नम,किससे कहें

इस शहर की वीरां गुलशनें, हैं फूल कम, कांटे कई
दामन मेरा छलनी हुआ, हम दर्दो-गम किससे कहें

कोई रहगुज़र तो देर तक टिकता नहीं कदमों तले
तेरा निशां है कहीं नहीं, मंज़िल न सनम, किससे कहें

©RajeevSingh #love shayari