Tag Archives: पतझड़ शायरी

शायरी – कांटों ने ही अब तक हमको जीना है सिखाया

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खामोशियों की बस्ती में जिसने घर हो बनाया
उसने दर्द के गुलों से तन्हा कमरे को सजाया

सफर के रहगुजर से यही कहते चले अक्सर
कांटों ने ही अब तक हमको जीना है सिखाया

जिसकी हस्ती में वफा का नामोनिशां नहीं था
उसके लिए ही जाने क्यों दिल औ जां लुटाया

पेड़ों के पत्तों को है शायद गर्दिश से मुहब्बत
जो टूटकर पतझड़ के लिए खुद को मिटाया

©RajeevSingh # love shayari

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शायरी – होठों पे तराने हैं और आंखों में आंसू

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दिल ही दिल में रोते हैं दर्द तेरा लेकर
सबको ये पता है, तुमको नहीं खबर

होठों पे तराने हैं और आंखों में आंसू
बहारों के मौसम में नजरों में पतझड़

वो हो गयी गैरों के आंगन की इज़्जत
दीवाने जरा देख ले गौर से ये मंजर

भले ही जुदाई का तुमपे न हो असर
हम रोए तुझे देखकर, रोएंगे बिछड़कर

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – मेरी उदासियाँ भी सुनाएगी दास्ताँ

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महसूस करेगा वो मेरे दर्द की जुबाँ
मेरी उदासियाँ भी सुनाएगी दास्ताँ

पतझड़ की बारिशों में वो भीग गया है
अब धूप के लिए जलाएगा आशियाँ

लाएगा रंग इश्क ये उसमें इस तरह
अपनी चिता के वास्ते खोजेगा लकड़ियाँ

अपने ही लहू से लिखेगा मेरा नाम
अपने ही खंजर से तराशेगा ऊंगलियाँ

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – सावन भी गुजर जाएगा, आंसू भी बिखर जाएगा

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सावन भी गुजर जाएगा, आंसू भी बिखर जाएगा
एक बार जो तू आ जाए, पतझड़ भी संवर जाएगा

मेरे इश्क का चकोर तो चंदा से जुदा हो गया
अब तो वो इस खिजां में रोकर ही मर जाएगा

दिल के इन नश्तरों में दुख भी हैं, सुख भी हैं
कभी खिलेंगे गुलाब तो कभी पेड़ उजड़ जाएगा

मुझको मेरी तन्हाई देती है ये दिलासा
ये दिल न लगा उनसे जो लौटकर फिर जाएगा

©R©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – मेरा आगोश तेरे साये से लिपट जाता है

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मेरा आगोश तेरे साये से लिपट जाता है
कई रातों से ये ख्वाब टूट जाता है

जब तलक हैं जुदा, पूनम भी अमावस है
चांद कतरों में निगाहों से बह जाता है

मुझे गुलशन की गुलाबें तो नसीब नहीं
यूं भी पतझड़ में कांटा ही रह जाता है

बस्तियां गम की बसाता हूं हर रोज मगर
इश्क की आग में हर आशियां जल जाता है

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – सच्ची मुहब्बत दिल से मिटा दे, किसके बस की बात है

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टूटे दिल को अक्ल सिखा दे, किसके बस की बात है
सच्ची मुहब्बत दिल से मिटा दे, किसके बस की बात है

उम्र गुजर जाती है पल-पल उनके यादों के मंजर में
फिर किसी से दिल लगा ले, किसके बस की बात है

रोज मैखाने में जाकर रोते हैं वो जुदाई में
पीकर कोई दिल बहला ले, किसके बस की बात है

लेकर आती हैं बहारें जीवन में फूलों का मौसम
पतझड़ का भी मन महका दे, किसके बस की बात है

©RajeevSingh