Tag Archives: पत्थर शायरी

शायरी – शायद दोनों जुदा हो जाएं

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एक शहर में कितने घर हैं
तेरे घर हैं, मेरे घर हैं

तेरे अपने और मेरे अपने
सारे पत्थर, हम दो सर हैं

चार दीवारें, छत की दुनिया
बंदिश रस्मों के बिस्तर हैं

शायद दोनों जुदा हो जाएं
तुझमें-मुझमें बस ये डर है


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – एक खामोश मुसाफिर सा कोई

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एक खामोश मुसाफिर सा कोई
छू गया है मुझे साहिर सा कोई

घूमकर देखा जब शहर की तरफ
दूर तक था खड़ा पत्थर सा कोई

आईना नींद से जागा था तभी
जब उसे तोड़कर गया था कोई

ठहर गई है आंख में दरिया
इसके आगे है झरना सा कोई

साहिर- जादूगर, magician


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शायरी- खामोशियों को जो पढ़ता नहीं है

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कहने से कोई समझता नहीं है
जब तक तजरबा होता नहीं है

बातें ही करता रहता है अक्सर
खामोशियों को जो पढ़ता नहीं है

ठोकर वो खा ले मगर राहों से
पत्थर कभी भी हटाता नहीं है

दुनिया में मरने से बचने के खातिर
दिल को वो जिंदा रखता नहीं है


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शायरी – जो फूल उसकी जुल्फों तक नहीं पहुंच सका

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मुहब्बत के मुकद्दर में वो हसीं शाम कभी होती
सोचता हूं ये जिंदगी तो उसके नाम कभी होती

जो फूल उसकी जुल्फों तक नहीं पहुंच सका
उसे तोड़ने को वो दिल से परेशान कभी होती

मुझे पत्थर समझकर जो हमेशा तराशती रही
उस खुदा से हमारी दुआ सलाम कभी होती

जिसको देखा किए हर शब उल्फत के आइने में
वह अक्स हमारे आशियां की मेहमान कभी होती

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – फूल बनकर तू खिलेगी जिस गुलशन में

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जीते जी मेरे आशियाने में कमी क्या होगी
बस तू नहीं आएगी, और कमी क्या होगी

फूल बनकर तू खिलेगी जिस गुलशन में
उस चमन में कांटों की कमी क्या होगी

ऐ सनम तू भी तो पत्थर दिल निकली
मेरे आंसुओं से भी तुझमें नमी क्या होगी

किसी को कभी एक बार इश्क जो होगा
फिर जिंदगीभर जख्मों की कमी क्या होगी

©RajeevSingh # love shayari

 

शायरी – कौन समझाएगा इश्क में रोनेवालों को

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वो आंखों में समंदर की तरह आता है
आईने में भी पत्थर की तरह आता है

कौन समझाएगा इश्क में रोनेवालों को
टूटा सपना भी दिलबर की तरह आता है

वक्त-बेवक्त बेसबब बेतकल्लुफ सा
मेरे सीने में वो खंजर की तरह रहता है

ना गमगीन हो मेरे दोस्त मेरी मैयत पे
कोई दुनिया में मुसाफिर की तरह आता है

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – अब दिल के लिए कोई पत्थर भी तो आए

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तुम किस अंधेरे में हो ऐ नूर खुदा के
शब ने तुझे पुकारा है खामोश सदा से

दामन की उलझनों में डूबे हुए हैं हम
लो दफ्न हो गए हैं खुद अपनी खता से

अब दिल के लिए कोई पत्थर भी तो आए
ऐ बेरहम तन्हाई मुझे इतनी दुआ दे

एक दर्द का वजूद है आगोश में मेरे
वो दूर रह रहा है अपनी दिलरुबा से

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – बगैर तेरे मैं जी लूंगी, मुझे शक है अभी

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बगैर तेरे मैं जी लूंगी, मुझे शक है अभी
मगर तू जी नहीं पाएगा, मुझे यकीं है अभी

तेरे कदमों की आहट आ रही है गलियों से
अपने दिल की आहट पे, मुझे यकीं है अभी

रात जाएगी, संग चांद चला जाएगा
तू रुकेगा मेरे दर पे, मुझे यकीं है अभी

जिसकी दुनिया में पत्थर भी हैं तराशे हुए
वहां आईने सलामत हैं, मुझे यकीं है अभी

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शायरी – तुम तो कहते हो मैं सब कुछ हूँ तेरे लिए

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आईना और पत्थर के दरम्यां हूँ मैं
दिले-नादां और जिंदगी के दरम्यां हूँ मैं

आज हमने भी लगा ली है जां की कीमत
अब हथेली पर रखा हुआ दीया हूँ मैं

तुम तो कहते हो मैं सब कुछ हूँ तेरे लिए
लोग कहते हैं कि बर्बाद सा सामां हूँ मैं

कोई तन्हा कहां जी सका है दुनिया में
ये तो तुम हो कि थोड़ा सा जी रहा हूं मैं

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शायरी – मेरा दिल तेरी यादों में डूब गया दरिया किनारे

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कितने दिनों के बाद मैं आया हूं दरिया किनारे
घाट पे मैं बैठा रहा देर तक दरिया किनारे

एक पत्थर पानी के दामन को छूकर खो गया
मेरा दिल तेरी यादों में डूब गया दरिया किनारे

शाम का ये चांद निकल आया है मेरे सामने
फिर अंधेरा छा रहा है आंखों में दरिया किनारे

अठखेलियां करते परिंदे खुद अपने में मस्त हैं
झुंड में तो कभी अकेले उड़ते हैं दरिया किनारे

(मेरी शायरी में जो दरिया, चांद या शाम है वह दरअसल वाराणसी में गंगा किनारे से प्रेरित है जहां मेरी शामें गुजरती थीं।)

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शायरी – नजर की लाज बच गई तुझे देखके ऐ जानेजां

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ईमान से वो गिर गए पर उठ गए बेईमान से
शैतान जो पर्दे में थे, वो पूजे गए इंसान से

पत्थर से पूछ बैठे हम आईनों के हाले-दिल
उनका जवाब आया कि लगते हो तुम नादान से

करवट बदलता रह गया ये रोशनी आठों पहर
सब देखो परेशान हैं जीवन की सुबहो शाम से

नजर की लाज बच गई तुझे देखकर ऐ जानेजां
वरना मैं तो नाराज था बेवफाओं के जहान से

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शायरी – वो ही डरते रहे बहुत इस मुहब्बत से

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जो अपने घर से जुड़े हैं एक मुद्दत से
वो ही डरते रहे बहुत इस मुहब्बत से

पत्थरों के मुहल्ले में सभी पैदा हो गए
उबर न पाए कभी वो बुतों की हसरत से

हर एक रिश्ते का नाम बस तिजारत है
जमाना खाली है यहां दिलों की कुरबत से

कहीं से आके कोई छीन न ले दौलत को
मरे हैं शहर में कई लोग इस दहशत से

(तिजारत- व्यापार, कुरबत- करीबी)

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – वो इश्क क्या करे जो रस्मों को निभाते हैं

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दुनिया के पत्थरों का ऐतबार न करो
आईने के टूटने का इंतजार न करो

वो इश्क क्या करे जो रस्मों को निभाते हैं
उस बेवफा का तूम भी दरकार न करो

जो फूल मुरझा गए दुनिया के गुलशन में
बेदर्द निगाह से उसका दीदार न करो

हौसला रख जीने का ऐ मेरे गमे-दिल
तुम यूं मौत की तमन्ना सौ बार न करो

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari