Tag Archives: फलक शायरी

शायरी – तेरी जुल्फ में लगा सकूं, वो कली न मैं खिला सकूं

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तेरी जुल्फ में लगा सकूं, वो कली न मैं खिला सकूं
बेबस खिजां में बैठा हूं, वो बहार भी न मैं ला सकूं

सावन की एक फुहार से मैंने मांग ली कुछ बूंद भी
जिसे आंख में तो भर लिया, उसे अब न मैं गिरा सकूं

कहा भी क्या समझा नहीं, देखा भी क्या सोचा नहीं
यूं खो गया मैं खुद में ही कि कहीं भी न मैं जा सकूं

सर पे जब सदियां गिरी, मैं फलक में जाके धंस गया
अब चांद के मानिंद मैं जमीं पे भी न आ सकूं

फलक- आसमान

खिजां- पतझड़

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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शायरी – वहीं मिल जाएगी एक दरिया उसे रोती हुई

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अभी बरसात है, कभी रुकती कभी गिरती हुई
और एक शाम है भीगी हुई सी ढलती हुई

कौन जाने कि ये घटाएं कहां तक जाएंगी
जाने किस मोड़ पे बेवफा होगी हवा चलती हुई

जिस जगह कोई तलाशेगा वजूद अपना
वहीं मिल जाएगी एक दरिया उसे रोती हुई

ये फलक कितने मुसाफिरों का आशियाना है
फिर भी चिंगारियां हैं उसके दामन में जलती हुई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – महसूस हुआ ये जब दुनिया में वो मिला

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महसूस हुआ ये जब दुनिया में वो मिला
कांटों की भीड़ में वो एक फूल सा खिला

कैसे बुझेगा जाने शबे-गम का इंतजार
बेसब्र सा एक चिराग फलक पे है जला

क्या खूब है जवानी और आलमे-तन्हाई
है दूर तलक उसकी ही यादों का सिलसिला

मिलता तो है करीब से पर बाकी है कसर
दूरी तो घट गई मगर अब भी है फासला

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – आह और दर्द बस तेरा तलबगार हुआ

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आह और दर्द बस तेरा तलबगार हुआ
आंख पत्थर हुई, अश्क आबशार हुआ

अमावस में बस जुदाई के सितारे हैं
चांद के बिन फलक भी दागदार हुआ

मेरी पलकों का झपकना बड़ा मुश्किल है
ऐसा तबसे है जबसे तेरा दीदार हुआ

सो रहे हैं इन मकानों के बाशिन्दे सभी
मैं जगा रहके बस्ती का गुनहगार हुआ

आबशार – झरना
फलक – आकाश


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – मैं जी रहा हूं तुमको देखकर ऐ चांद

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आए हो तुम फलक पर, जलते हो रातभर
जब सो रही है दुनिया, जगते हो रातभर

उजली सी दास्तां को बिखरा दिया फिजा में
तुम रोज ये कहानी, सुनाते हो रातभर

मुसकाते हो हमेशा पर्दा उठा-उठा के
बादल के चिलमनों से , झांकते हो रातभर

मैं जी रहा हूं तुमको देखकर ऐ चांद
मुझको भी अपने रंग में रंगते हो रातभर

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – ना जाने आज चाँद भी कहाँ खो गया

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वो अंजुमन की आग में लिपटे हुए तारे
आँसू के चिरागों से सुलगते नज़ारे
आसमान की नज़र में अटके हुए सारे

ना जाने आज चाँद भी कहाँ खो गया
फलक का अँधेरा भी दरिया पे सो गया
रोता है हर शै कि आज क्या हो गया

शज़र के शाखों पे नशेमन की ख़ामोशी
फैली है पंछियों में ये कैसी उदासी
क्यूँ लग रही हर चीज़ आज जुदा सी

बजती है सन्नाटे में झिंगुरों की झनक
या टूट रही है तेरी चूड़ियों की खनक
आती है आहटों से जख्मों की झलक

ये रात कब बीतेगी मेरी जवानी की
कब ख़त्म होगी कड़ियाँ मेरी कहानी की
कब लाएगी तू खुशियाँ जिंदगानी की

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari