Tag Archives: फसाना शायरी

शायरी – फिर उस जख्म को जीने का बहाना याद आया

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भूल गया था जो मंजर, वो जमाना याद आया
मुद्दतों बाद दिखी तुम, वो फसाना याद आया

नए शहर की गलियों में खुशी खोज ली तुमने
पुराने शहर की गलियों का वो रोना याद आया

आबाद हो गई किसी की जिंदगी तेरे आ जाने से
किसी को अपनी बर्बादी का तराना याद आया

एक नया दर्द फिर आगोश में ले रहा है मुझे
फिर उस जख्म को जीने का बहाना याद आया

©राजीव सिंह शायरी

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शायरी – हमें तो तन्हा ही जीते जाना है, तेरे साथ तो सारा जमाना है

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हमें तो तन्हा ही जीते जाना है
तेरे साथ तो सारा जमाना है

मेरी कोई फिक्र क्यों करोगी तुम
जब ये कायनात तेरा दीवाना है

किसकी तलाश में भटके हो दिल
बेवफाओं का कहां ठिकाना है

तुझे याद करते दम टूट जाना है
हर आशिक का यही फसाना है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – इस दुनिया से तेरी यादों के सिवा और अपने साथ क्या लेकर जाना है

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एक तू है और इश्क का फसाना है
मेरे जीने का बस यही तो बहाना है

इस दुनिया से तेरी यादों के सिवा
और अपने साथ क्या लेकर जाना है

देखो कब आता है वो हसीन लम्हा
मेरे सामने तुमको कभी तो आना है

तुमसे मिलकर क्या ये पूछ पाऊंगा
कि दिल को और कितना तड़पाना है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – दर्द की लहरों से जब भीगती है ये आंखे

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नजरे-मुहब्बत का बस इतना है फसाना
हम तुझे देखते हैं, हमें देखे है जमाना

दलदल भरे रिश्तों से बचके निकल चले
कसम खाए हैं, अब खुद को नहीं रुलाना

चांद की तन्हाई में अब यूं खो चुका हूं मैं
ऐ सितारों अपनी भीड़ में हमको न बुलाना

दर्द की लहरों से जब भीगती है ये आंखे
बहुत मुश्किल होता है समंदर को दबाना

नजरे मोहब्बत- मोहब्बत की नजर

शायरी – बस यही सोचके तुम्हें याद किया करता था

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वो भी क्या रातें थी जब खूब जगा करता था
क्या खबर थी कि मैं खुद से दगा करता था

जो हकीकत भी नहीं था, फसाना भी नहीं
मैं कहीं बीच की मंजिल पर रहा करता था

फासलों में भी कई तार थे जुड़ने के लिए
बस यही सोचके तुम्हें याद किया करता था

कुछ शिकायत थी तुमसे भी, खुद से भी
जाने कुछ दर्द था, गजल में लिखा करता था

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – बेरहम याद भी मेरी रातों का सहारा ही बना

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बेरहम याद भी मेरी रातों का सहारा ही बना
ये तेरा दर्द भी मेरी आंखों का सितारा ही बना

इश्क की बात पे हम अड़ गए जान देने पर
फिर भी दिलबर किसी गैर का खिलौना ही बना

चल रहे थे वहां पे आंधियां फिजाओं में
ये तबाही भी बहारों का तमाशा ही बना

क्या कहूं मैं कि कहने का ये तजरबा है
मेरी हर बात पे दुनिया में फसाना ही बना

©RajeevSingh #love shayari

वो शायरी है, गजल है या फसाना है

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दर्द की आग न हो तो मैं जी न पाऊंगा
अश्क की आब न हो तो मैं जल जाऊंगा

वो शायरी है, गजल है या फसाना है
जाने कब तक मैं उसको समझ पाऊंगा

धुंध सी शाम है बरसों से मेरे जीवन में
रात कब होगी, कब चांद को छू पाऊंगा

ऐसा लगता है कि न आएगी पास कभी
यूं ही तन्हाई में घुटते हुए मर जाऊंगा

©RajeevSingh