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शायरी – सांसों की कशमकश में कितने शहर बदल चुके

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ऐ जिंदगी तेरे इश्क में पागल भी हम हो चुके
कांटों से नहीं, हम यहां फूलों से घायल हो चुके

अपने हमें समझाते रहे दुनिया की वो रवायतें
हम समझ न पाए तो अपने घर से निकल चुके

मोम सा जलते रहे हम चांद की खातिर रातभर
बुझ गए हैं आज हम जो पूरी तरह पिघल चुके

एक जगह रुकने से अब घुटता है क्यों दम मेरा
सांसों की कशमकश में कितने शहर बदल चुके

©राजीव सिंह शायरी

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शायरी – मेरे जज़्बात के हर कतरे में तुम बहने की अदाएँ सीख गए

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हम रोने का हुनर सीख गए
तुम आकर आँसू में भींज गए
मेरे जज़्बात के हर कतरे में
तुम बहने की अदाएँ सीख गए

फिजा की बिखरी यादों में
फूलों में सँवरे काँटों में
कायनात के दर्द की सोहबत में
हम जीना-मरना सीख गए

शाम की धुंधली राहों पर
गम की अँधेरी रातों पर
ख्वाब के टूटे शीशों पर
मुस्कुरा के चलना सीख गए

जख़्म के पहलू में सोकर
नग़मों को कागज पे लिखकर
अपनों के प्यार से दूर होकर
हम जीवन जीना सीख गए

©RajeevSingh #love shayari