Tag Archives: बाजार शायरी

शायरी – खरीदते हैं वो जो मिल न सका प्यार में

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खरीदते हैं वो जो मिल न सका प्यार में
खड़े हैं आज सब हसरतों के बाजार में

रिश्तों के कलह में हुआ ऐसा बुरा हाल
जीना दूभर किया घर के दरो दीवार ने

हर बार जाने क्यों आखिर में दुख मिला
चाहा तो था खुशी दिल के कारोबार में

उम्र गुजरी तो एक दिन ये मालूम हुआ
कि हर चीज बुलबुला है इस संसार में

©राजीव सिंह शायरी

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शायरी – एक महबूबा की दुआएं रोती हैं

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आसमान टूटता है, घटाएं रोती हैं
जब दिल टूटता है, निगाहें रोती हैं

रिश्तों के बाजार में भीख मांगती
प्यार की कितनी सदाएं रोती हैं

तनहाई के आलम में तकिए पर
एक महबूबा की दुआएं रोती हैं

दूर शहनाई की आवाज सुनकर
किसी की मातमी फिजाएं रोती हैं

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – और आज भी वो मेरे बुरे हालात से अंजान है

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सर्दी की ठिठुरती रात में फुटपाथ पर अरमान है
दिलबर मुझसे दूर किसी और पे मेहरबान है

हर कदम पे जिंदगी में दर्द के निशां छोड़ते रहे
जिस रास्ते से मैं गया वो आज भी सुनसान है

वो रोज देखते हैं हमें मुफलिसों के लिबास में
और आज भी वो मेरे बुरे हालात से अंजान है

दुनिया की भीड़ में जिसे तलबगार न मिला
इस अक्ल के बाजार में ये दिल बड़ा नाकाम है

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – दोनों जुदा-जुदा हैं, जमाने को खबर है

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एक टुकड़ा इधर है, एक टुकड़ा उधर है
दोनों जुदा-जुदा हैं, जमाने को खबर है

आशिक है आफताब सा दीपक बना हुआ
माहताब सा माशूक ही उसका दिलबर है

छूती है घटाओं को ये सर्द हवा जब
सावन के दर्द में भीग जाता शहर है

हर राह जमाने की जाती है बाजार में
हर शख्स की इसलिए दौलत पे नजर है

आफताब – सूरज
माहताब – चांद

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – अपना दिले-नादान लेकर हम जबसे शहर गए

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अपना दिले-नादान लेकर हम जबसे शहर गए
मीठी बातों की आड़ में सब धोखा कर गए

हर घर में एक दुकान है, रिश्ते बिकते हैं जहां
दिल की जगह में सब यहां रुपया पैसा भर गए

बाजार की भीड़ में हैं जगमगाते जिस्म बहुत
ये हसीं नजारे सबकी नजर को अंधा कर गए

अपना वतन मिला नहीं ऐसे शहर में कहीं
जिसकी तलाश में जीते जीते हम तन्हा मर गए

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari