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शायरी – मुझे बेकरार देखकर हंसती हो बेरहम

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इस दर्द को सीने में उठाया नहीं जाता
तेरे अंजुमन से उठके जाया नहीं जाता

मुझे बेकरार देखकर हंसती हो बेरहम
मरते को जहर तो पिलाया नहीं जाता

तेरी ही बेरूखी से बढ़ती है तिश्नगी
तुमको कभी मुझपे तरस खाया नहीं जाता

मैं बेकदर नहीं हूं तेरी तरह सनम
तुझपे नजर पड़ी है तो हटाया नहीं जाता


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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शायरी – मेरी मुंतज़िर निग़ाहों को हुस्न का रूप मिला

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जख़्म दर जख़्म हम पाते गए कुछ न कुछ
हर दर्द हर गम पे गाते गए कुछ न कुछ
जो मुझे एक पल की खुशी दे न सके
वो हर पल सितम ढ़ाते गए कुछ न कुछ

हर मंजिल पे एक किनारा दिखता था मगर
उसके बाद एक रोता समंदर भी रहता था
हम नहीं गए उस किनारे पे दिल के लिए
जहाँ आँसू न थे पहले से कुछ न कुछ

मेरी मुंतज़िर निग़ाहों को हुस्न का रूप मिला
मेरे बेकरार रूह को दर्द का धूप मिला
चाँद तो बस दूर से ही नूर को बिखराती रही
मगर देती रही बुझते चिराग को कुछ न कुछ

हमें अफसोस नहीं कि तुझे देखा नहीं जी भर के
तेरी तस्वीर तो तेरे आने से पहले सीने में थी
तू आके बस दरस दिखा के गुजर गई
अब उम्रभर तेरे बारे सोचना है कुछ न कुछ

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – आई थी शाम बेकरार, आकर चली गई

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आई थी शाम बेकरार, आकर चली गई
होना था बस इंतजार, होकर चली गई

साहिल से दूर एक लहर आती मुझे दिखी
आंखों से वो सागर पार, बहकर चली गई

आस्मा के सारे तारे टूटकर गिरते रहे
चांद जिनसे करके प्यार, बुझकर चली गई

दिल में दो रूहों का दर्द लेकर जी रहा
मुझपे अपना जां निसार दिलबर चली गई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari