Tag Archives: बेजुबां शायरी

शायरी – इश्क तन्हा ही रहता है बेजुबां बनकर

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जल रहा है मेरी नजरों में मेरा वो खुदा
चांद बुझता ही नहीं होकर सूरज से जुदा

इश्क तन्हा ही रहता है बेजुबां बनकर
और आशिक भी होता है हर बयां से जुदा

आज टुकड़ों में बंटे हैं हम बादल की तरह
आज दरिया भी हो जाएंगे आंखों से जुदा

मेरी सदियां मेरे माजी से खफा रहती हैं
काट ली हमने भी एक उम्र रहके तुमसे जुदा

©RajeevSingh #love shayari

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शायरी – दर्द बेजुबां हो तो दिल क्या कहे

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दर्द बेजुबां हो तो ये दिल क्या कहे
आह खामोश हो तो ये लब क्या कहे

आरजू का हर एक अश्क आंखों में था
उसने देखा नहीं तो पलक क्या कहे

चाहतें मंद हैं बुझती लौ की तरह
रोशनी ही नहीं तो दीपक क्या कहे

कोई नहीं यहां अपना मेहरबां सा कोई
तन्हाई में अब मुझसे शब क्या कहे

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – जी रहे हो आशियां में आईने की तरह

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जी रहे हो आशियां में आईने की तरह
इतने जुबां वालों के बीच बेजुबां की तरह

टूट जाओगे जमाने से दगा मत खाना
यहां मिलते हैं बेवफा भी मेहरबां की तरह

चुप रहते हो और खुद पे सितम ढाते हो
फिर भी दिखते नहीं हो परेशां की तरह

तेरे दिल में बसा है उल्फत का सागर
मगर आंखें हैं तुम्हारी रेगिस्तां की तरह

©RajeevSingh