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शायरी – मैं क्यूँ भटक रहा हूँ, ये किसकी तलाश है

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मैं क्यूँ भटक रहा हूँ, ये किसकी तलाश है
तेरी तलाश है मुझे या खुद की तलाश है

शहर के जंगल में बचे हैं महलों के बरगद
बेघर हुए पंछी को एक शाख की तलाश है

हर इंसान के अंदर एक मुकम्मल जहां है
मुझको उस मुकाम के राह की तलाश है

तेरी गली में घूमता आशिक हूँ बेसहारा
सदियों से इश्क को हुस्न की तलाश है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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शायरी – यही ख्वाहिश है जिस्मो-जां से लब तलक

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टूटेंगे नहीं उम्मीद के तारे तब तलक
दुनिया में रहेंगे बेसहारे जब तलक

शाम बेचेहरा अक्स है इंतजारों का
रहेगा आईने-मुद्दत ये जाने कब तलक

तू फसाने को कागज पे लिखती तो है
मेरा किरदार नहीं लिखा तूने अब तलक

मेरी देहरी की सीढ़ी तेरे कदम चूमे
यही ख्वाहिश है जिस्मो-जां से लब तलक

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari