Tag Archives: मरासिम शायरी

शायरी – कोई इल्जाम न लेगी वो अपने सर पे

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कोई इल्जाम न लेगी वो अपने सर पे
सांस टूटी है मुसाफिर की जिसके दर पे

जो मरासिम पे मरने की वफा रखते थे
जल गए वो ही शम्मा में आहें भर के

महफिलों में जो दिखाती है अपने जलवे
एक तन्हा को ढूंढती है हुस्न के दम पे

उंगलियां आज भी बोझिल हैं गुनाहों से
तूने थामा था किसी दिन इसे आगे बढ़ के

मरासिम – संबंध


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – प्यासा है तू बरसों बरस से

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उसी मोड़ पे क्यूं आया मुसाफिर
जहां पर मैं पहले से ही खड़ी थी
पल भर में तुमसे इश्क हुआ था
पल भर ही तो निगाहें लड़ी थी

तुझे देखकर मुझे ऐसा लगा था
कि प्यासा है तू बरसों बरस से
आंखों में शबनम, जुबां पे खामोशी
सूरत में तेरे उदासी जड़ी थी

तूने भी मुझको नजर भर के देखा
मैंने भी तुमको जरा डर के देखा
कुछ तेरी आंखों में हमने पढ़ी थी
कुछ मेरी आंखों ने तुमसे कही थी

अगर मेरा तुमसे है कोई मरासिम
तो आओ चलें हम हसीं सफर पे
नहीं थी खबर ऐ नादां मुसाफिर
हमारे भी किस्मत में ऐसी घड़ी थी

मरासिम – संबंध

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शायरी – तुम्हें देखना मेरी आदत है लेकिन

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है गम से मरासिम हमारे जिगर का
ये सारा असर है तुम्हारी नजर का

तुम्हें देखना मेरी आदत है लेकिन
रस्ता नहीं मिलता तुम्हारे ही घर का

आशियां ये हमारा जमीं पे गिराया
वो तूफां जो आया था तेरे शहर का

अगर आंख से न बहेगी दरिया
कहां जाएगा फिर सागर लहर का

मरासिम – संबंध

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शायरी – चलेंगे साथ वफा के, तूम चलो ना चलो

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जला चराग कि कब तक न जाने रात रहे
रौशनी में कम से कम ये साया साथ रहे

वजूद रह गया मुझमें जगा हुआ हरदम
नींद न आई तो बस मौत की फरियाद रहे

चलेंगे साथ वफा के, तूम चलो ना चलो
इसी तरह से सलामत मेरे जज़्बात रहे

किसी के साथ मरासिम, कोई मेरा दुश्मन
हम किसी भी रिश्ते में न कामयाब रहे

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शायरी – इस दर्द के सागर में दिल कैसे सलामत हो

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कब जाने मरासिम हो, कब जाने मुहब्बत हो
इस आस में जीते हैं, एक दिन तो कयामत हो

किसका कदम बढ़ेगा, किसके रहगुजर पर
मंजिल तो दो तरफ हैं, दोनों में कशमकश हो

एक रंज सा होता है, सीने के सफीने में
इस दर्द के सागर में दिल कैसे सलामत हो

परवाज़ आसमां में उस चांद को छू लेता
गर उसके ही वश में मिलने की किस्मत हो

(मरासिम- रिश्ता, संबंध)
(सफीना- नाव)

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शायरी – शराबे-इश्क को पीकर बहक रहा था कोई

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हवा तो सर्द थी लेकिन सुलग रहा था कोई
चांदनी रात में तन्हा झलक रहा था कोई

हुआ है क्या शहर में उसे खबर ही नहीं
शराबे-इश्क को पीकर बहक रहा था कोई

मोड़ कितने ही मिले पर कहीं मुड़ा था नहीं
बस एक राह पे चलता सिसक रहा था कोई

किसी से उसका मरासिम रहा होगा शायद
यादों में डूबके आंखों से छलक रहा था कोई

(मरासिम-संबंध)

©RajeevSingh #love shayari