Tag Archives: महफिल शायरी

रिश्तों को निभाने की मजबूरी पुरानी है

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रिश्तों को निभाने की मजबूरी पुरानी है
जिंदगी तो जैसे समझौतों की कहानी है

दुनिया के अंदर तो धोखे का समंदर है
यहां करते हैं वफा, मिलती बदनामी है

यार बनाकर जिसने मेरा खून किया
उसके चेहरे पर शिकन न परेशानी है

जहां अक्ल वालों की महफिल है वहां
जिधर देखिए दिलवालों की नाकामी है

©rajeevsingh             शायरी

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शायरी – जबसे तुम मेरी जिंदगी में चली आई हो

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न जाने कबसे तेरी तलाश में भटक रहा हूं मैं
अब जो मिली हो तो दिल में मटक रहा हूं मैं

मेरी हर बात पर तुम इस तरह हंसती हो
देखो दुनियावालों की नजर में खटक रहा हूं मैं

मुझे उतारकर मेरी जान तुम कब पहनोगी
तेरी खूंटी पर जाने कबसे लटक रहा हूं मैं

जबसे तुम मेरी जिंदगी में चली आई हो
तबसे महफिल भूल कमरे में अटक रहा हूं मैं

©RajeevSingh

शायरी – मिला अब तक किसी के पास इस दर्द का इलाज नहीं

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सांस और धड़कनों में रही अब तेरी भी याद नहीं
नसों में दौड़ती जिंदगी किसी की मोहताज नहीं

वो कौन सा मौसम था कि तेरा शोर था जीवन में
ये कौन सा मौसम है कि दूर तक कोई आवाज नहीं

बड़ी मशक्कत से मैंने ये तनहा दुनिया बसाई है
महफिल में बुलावे पर कहता हूं फिर कभी, आज नहीं

अपने जख्मों के लिए तलाशते रहे हसीं चारागर
मिला अब तक किसी के पास इस दर्द का इलाज नहीं

चारागर- डॉक्टर, इलाज करने वाला

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – कोई इल्जाम न लेगी वो अपने सर पे

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कोई इल्जाम न लेगी वो अपने सर पे
सांस टूटी है मुसाफिर की जिसके दर पे

जो मरासिम पे मरने की वफा रखते थे
जल गए वो ही शम्मा में आहें भर के

महफिलों में जो दिखाती है अपने जलवे
एक तन्हा को ढूंढती है हुस्न के दम पे

उंगलियां आज भी बोझिल हैं गुनाहों से
तूने थामा था किसी दिन इसे आगे बढ़ के

मरासिम – संबंध


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – रू ब रू हुस्न के चांदनी कुछ नहीं

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अपने रूख से ये पर्दा हटा दीजिए
मेरे महफिल की शम्मा जला दीजिए

आपकी राह पे मेरा दिल है बिछा
रहगुजर पे कभी तो चला कीजिए

रू ब रू हुस्न के चांदनी कुछ नहीं
शाम से ही ना घर में छुपा कीजिए

आप शायर से क्यूं खफा हो गए
बेरूखी की वजह तो बता दीजिए


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – पलकों में रखे अश्क न गिर पाते आंख से

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छूते रहे वो दिल मेरा गजल की आग से
जलते रहे हम रातभर शायर की बात से

कहने लगे कि उनकी नज़र यूं उदास है
पलकों में रखे अश्क न गिर पाते आंख से

जाने की जिद पकड़ लिए वो आधी रात को
फिर रुक गए अचानक वो अपने आप से

यूं रोज ही जवां रहे महफिल इसी तरह
और आप गजल गाएं लबों के साज से

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – इश्क सच्चा हो तो वो तमाशा क्यूँ बने

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मेरे खातिर दुनिया की महफिल नहीं
वहां पे मैं नहीं, जहां पे दिल नहीं

इश्क सच्चा हो तो वो तमाशा क्यूं बने
दर्द ऐसा नुमाइश के काबिल नहीं

आज की रात तू मेरे पहलू में नहीं
चांद से आज कुछ भी हासिल नहीं

डूबकर जी गया हूं मैं अपने अंदर
मैं जमाने की लाशों में शामिल नहीं

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – जब-जब सितम तूने किया, हम सह गए दिल खोल कर

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मुझे देखकर मुंह फेर लो, ऐसी भी क्या तेरी बेरुखी
महफिल में दूर-दूर हो, ऐसी भी क्या तेरी बेबसी

मुड़के जो देखती हो तुम, मजबूर हो क्यूं दिल से तुम
मुझे इस तरह न तलाश कर कि बदनाम हो दीवानगी

जब-जब सितम तूने किया, हम सह गए दिल खोल कर
जालिम है तेरी हर अदा, कातिल है तेरी आशिकी

खत की तरह खामोश तुम, तेरा हुस्न ही मजमून है
तेरे नैनों पे गजल लिखी, तेरे नक्श में है शायरी

मजमून- खत के अंदर लिखी बातें

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari