Tag Archives: माहताब शायरी

शायरी – मेरी जिंदगी के सवालों का एक तू ही बस जवाब है

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मेरी जिंदगी के सवालों का एक तू ही बस जवाब है
ये रातें है यही पूछतीं कि कहां तेरा माहताब है

जरा दिल में मेरे झांक लो, उठती कई लहरें यहां
इन धड़कनों में बह रहा तेरे दर्द का सैलाब है

अहसान है तेरा खुदा, जो मिल सकी न कोई दवा
जहां इश्क का ये रोग है, वहीं हुस्न का शबाब है

तन्हाई में वो बहक गया, दुनिया से दूर भटक गया
ये प्याला तेरे प्यार का कोई पी रहा बेहिसाब है

माहताब- चांद

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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शायरी- है अमावस सी जिंदगी तन्हा

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पास जब तक वो नहीं आते
हम इलाजे-जिगर नहीं पाते

तेरी तस्वीर चूमता हूं मगर
वो नाजुक सी लहर नहीं पाते

है अमावस सी जिंदगी तन्हा
कोई माहताब उभर नहीं पाते

कितनी मायूस है मेरी नजर
अश्क भी रहगुजर नहीं पाते


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – फिर तेरी बेवफाई से दिल में दर्द उठे

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टूटा ख्वाब तलाशता हूं शहर दर शहर
तेरा शबाब तलाशता हूं शहर दर शहर

फिर तेरी बेवफाई से दिल में दर्द उठे
वही अज़ाब तलाशता हूं शहर दर शहर

कहां चले गए तुम हमें तन्हा छोड़कर
कोई जवाब तलाशता हूं शहर दर शहर

जिसकी रोशनी से दिल का अंधेरा हटे
एक माहताब तलाशता हूं शहर दर शहर

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – ऐ हुस्न तेरे दर्द में क्या-क्या न किए

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न बस्ती के रहे, न ही तेरे आशियां के रहे
हुस्न तेरे इश्क में हम अब कहीं के न रहे

कुछ रूह में जलता है, दिल में सुलगता है
बन सके न माहताब तो हम चिराग ही रहे

कितनी तमन्नाएं थीं मेरे ख्वाबों के दामन में
फुरकत के सिवा और कुछ न आखिर में रहे

ऐ रात न छीन मुझसे उनके दर्द के तोहफे
सब कुछ तो खो चुके हैं, चंद आंसू तो रहे

माहताब- चांद
फुरकत- जुदाई

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – दोनों जुदा-जुदा हैं, जमाने को खबर है

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एक टुकड़ा इधर है, एक टुकड़ा उधर है
दोनों जुदा-जुदा हैं, जमाने को खबर है

आशिक है आफताब सा दीपक बना हुआ
माहताब सा माशूक ही उसका दिलबर है

छूती है घटाओं को ये सर्द हवा जब
सावन के दर्द में भीग जाता शहर है

हर राह जमाने की जाती है बाजार में
हर शख्स की इसलिए दौलत पे नजर है

आफताब – सूरज
माहताब – चांद

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – तुम मेरे दर्द को मिटा दोगी एक दिन

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अपने दिल के सनमखाने के हर जर्रे पे
आँसुओं से तेरे नाम लिखे हैं हमने
ये ख़ामोशी और दर्द के अफ़साने
कोरे कागज़ पे सजाए हैं हमने

ये जो पत्थर के बेदिल मकान हैं
इस दुनिया की गलियों के श्मशान हैं
तन्हाई के जिंदादिली के साये में
तुमको ख़यालों में बसाए हैं हमने

राहों के मुकद्दर में कई मुसाफिर हैं
पर मेरी पगडंडियों पे तू अकेली है
इस भीड़ भरी अंधेर नगरी में
तेरे नूर के माहताब जलाए हैं हमने

मेरी दीवानगी छलक न जाए आंखों से
हम हर फुगां को दिल में दबा लेते हैं
तुम मेरे दर्द को मिटा दोगी एक दिन
इसी उम्मीद में जख्म संभाले हैं हमने

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – सोलह दरिया पार की तब तेरा शहर मिला

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तू नजीरे-हुस्न है, मैं मिसाले-इश्क हूं
तू खुदा की नूर है, मैं बुझा चराग़ हूं

है अभी मुझे यकीं, इस जनम में वस्ल हो
ये यकीं अस्ल हो, मैं अभी दुआ में हूं

सोलह दरिया पार की तब तेरा शहर मिला
तूने सुनी थी जो सदा, मैं वही आवाज़ हूं

आग में सुरुर है और दर्द भी मजबूर है
जल रहा हूं शौक से, मैं हिज्र का माहताब हूं

नजीरे हुस्न- sample of beauty

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari