Tag Archives: मुंतजिर शायरी

शायरी – जिस गम ने जीना सिखाया, बस उसका तकाजा है

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जिस गम ने जीना सिखाया, बस उसका तकाजा है
कि दिल अब तक ढो रहा मुहब्बत का जनाजा है

उम्मीदों के फूल गुलशन में कबके मुरझा चुके
जो बचा है खिजां में वो कांटों का तमाशा है

सावन से कह दो कि मेरे आंगन में ना बरसे
यहां पहले से आंखों को बरसने में मजा सा है

मुंतजिर है तेरी राह देखता कबसे एक मुसाफिर
उसको तेरे हुस्न में सुकूं पाने का दिलासा है

©RajeevSingh #love shayari

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शायरी – चिड़िया है मुंतजिर कि आप जाल डालिए

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खंजर न शमशीर पर आप धार डालिए
अपनी ही दो नजर से हमें मार डालिए

मेरे मरमरी से दिल को कोई पूछता नहीं
नाजुक से इस गुलाब को जरा तोड़ डालिए

इस रंगमहल में है मेरी बेरंग जिंदगी
अपनी अदा से इसमें कुछ रंग डालिए

हम जी नहीं सकते हैं अब आपके बिना
चिड़िया है मुंतजिर कि आप जाल डालिए

(मुंतजिर- इंतजार में)

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शायरी – मेरी मुंतज़िर निग़ाहों को हुस्न का रूप मिला

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जख़्म दर जख़्म हम पाते गए कुछ न कुछ
हर दर्द हर गम पे गाते गए कुछ न कुछ
जो मुझे एक पल की खुशी दे न सके
वो हर पल सितम ढ़ाते गए कुछ न कुछ

हर मंजिल पे एक किनारा दिखता था मगर
उसके बाद एक रोता समंदर भी रहता था
हम नहीं गए उस किनारे पे दिल के लिए
जहाँ आँसू न थे पहले से कुछ न कुछ

मेरी मुंतज़िर निग़ाहों को हुस्न का रूप मिला
मेरे बेकरार रूह को दर्द का धूप मिला
चाँद तो बस दूर से ही नूर को बिखराती रही
मगर देती रही बुझते चिराग को कुछ न कुछ

हमें अफसोस नहीं कि तुझे देखा नहीं जी भर के
तेरी तस्वीर तो तेरे आने से पहले सीने में थी
तू आके बस दरस दिखा के गुजर गई
अब उम्रभर तेरे बारे सोचना है कुछ न कुछ

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – गम बेरहम जो तुमने दिया है, उनसे मैं कैसे दामन बचाऊं

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गम बेरहम जो तुमने दिया है
उनसे मैं कैसे दामन बचाऊं
नज़र फेरकर जो तुम चल दिए थे
तस्वीर तेरी वो कैसे भुलाऊं

शामो-सहर की गर्दिशे-फजां में
हम तेरे बिन जीए जाते रहे
सांसों का दम तो निकलता रहा
सबा का जहर पीए जाते रहे

तुम मुझे छोड़के चली जाओ कहीं
मेरा इश्क दिल से मिटेगा नहीं
मुंतजिर रहूंगा मैं मौत तलक
ये इंतजार मुझसे छूटेगा नहीं

सबा – सुबह

©RajeevSingh

शायरी – कभी रोए तेरे खातिर, कभी चुप हुए तेरे खातिर

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कभी रोए तेरे खातिर, चुप हुए तेरे खातिर
कभी जलते तो कभी बुझते रहे तेरे खातिर

खर्च होने न दिया हंसी को अपने होठों से
अपनी खामोशी में सहेजते रहे तेरे खातिर

मेरी मंजिल वहीं है जहां पर तुम ठहरी हो
हर कदम पे हम मुंतजिर रहे तेरे खातिर

हो गया हूं मैं अजनबी सा खुद अपने लिए
खो गया हूं न जाने कहां पर तेरे खातिर

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari