Tag Archives: मुकम्मल शायरी

शायरी – मैं क्यूँ भटक रहा हूँ, ये किसकी तलाश है

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मैं क्यूँ भटक रहा हूँ, ये किसकी तलाश है
तेरी तलाश है मुझे या खुद की तलाश है

शहर के जंगल में बचे हैं महलों के बरगद
बेघर हुए पंछी को एक शाख की तलाश है

हर इंसान के अंदर एक मुकम्मल जहां है
मुझको उस मुकाम के राह की तलाश है

तेरी गली में घूमता आशिक हूँ बेसहारा
सदियों से इश्क को हुस्न की तलाश है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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शायरी – दिल जो तोड़ा तो किया कोई बुरा काम नहीं

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दिल जो तोड़ा तो किया कोई बुरा काम नहीं
जानेमन तेरी मुकम्मल कोई दास्तान नहीं

जो अधूरा हो मगर फिर भी पूरा लगता हो
सिवाय इश्क के है ऐसा कोई मुकाम नहीं

मंजिलों के लिए मरते हैं वो मुसाफिर ही
जिनके सर पे आवारगी का इल्ज़ाम नहीं

कभी छोटी सी एक बात बुरी लगती थी
आज कितनी भी बड़ी बात से परेशान नहीं

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – हर उदासी इश्क की एक फरियाद है

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कहां से अश्क के तारे निकलके आए हैं
कहां से बर्फ के आतिश पिघलके आए हैं
तेरे गाल गर्म हो रहे हैं जिस पानी से
वो किस आग का भेष बदलके आए हैं

ना मरहम लगा मेरे कलेजे पे
ये आग तेरे बदन को छू जाएगी
तब जलने लगेगी तू भी इश्क में
और मेरी तरह खाक हो जाएगी

हर खामोशी एक मुकम्मल आवाज है
हर उदासी इश्क की एक फरियाद है
इस रेत की दुनिया में प्यास का हर कतरा
तेरी आंखों में बस जाने को बेताब है

मुस्कुराते हुए जीने की तमन्ना किसे नहीं होती
रुलाने के लिए तो हर लम्हां ये जमाना बैठा है
अपने-पराए, दोस्त-दुश्मन, मेरा साया भी
सबने सबके दिल पे दर्द का फसाना लिखा है

©RajeevSingh