Tag Archives: मुजरिम शायरी

शायरी – जुर्म यहां छुपना है मुश्किल

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जो उस खुदा का बंदा होगा
दुख में भी भला चंगा होगा

जुर्म यहां छुपना है मुश्किल
मुजरिम कभी तो नंगा होगा

दिल का जब भी राज चलेगा
फिर कैसे कहीं पे दंगा होगा

सच्ची राह जो शख्स है चुनता
उसका दुनिया से पंगा होगा

©राजीव सिंह शायरी

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शायरी – किसी एक को तो अपनी वफा की मिसाल दो

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सारा गुनाह इश्क का, उसपे ही डाल दो
मुजरिम उसे बनाकर मुसीबत को टाल दो

ये चमन जहां खिला एक फूल मुस्कुराता
उसे तोड़कर रकीबों की तरफ उछाल दो

तेरे दर पे रो रहा है लो आके तेरा आशिक
और कुछ नहीं तो उसको अपना रुमाल दो

इस शहर में घूमते हैं सैकड़ों तेरे दीवाने
किसी एक को तो अपनी वफा की मिसाल दो

 

रकीब: एक प्रेमिका के दो प्रेमी एक-दूसरे के रकीब होते हैं।

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – यूं ही मरता है आशिक इस दुनिया में

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दो कदम साथ चले तुम इस दुनिया में
मुद्दतों दर्द सहे हम इस दुनिया में

हमने आंचल जिसे समझा, कफन निकला
कितने धोखे हैं या रब इस दुनिया में

जुर्म ये तेरा नहीं है ओ जानेजां मेरी
मेरी किस्मत ही है मुजरिम इस दुनिया में

मौत ख्वाबों में भी आकर नहीं आती है
यूं ही मरता है आशिक इस दुनिया में

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – इस दर्द से मैं मर गया तो मुजरिम होंगी आप ही

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सबको नजर से देखिए, हमको जिगर से देखिए
यानि कि मुझे प्यार की पहली नजर से देखिए

इस दर्द से मैं मर गया तो मुजरिम होंगी आप ही
बंदे को आप भी जरा खुदा के डर से देखिए

खुशबू कोई मिला नहीं, मन फूल सा खिला नहीं
गुजरे नहीं हैं आप भी मेरे रहगुजर से देखिए

सबसे मुझे गिला है पर आपसे तो गिला नहीं
सबके गिले भुला दें हम, मुझे इस नजर से देखिए

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – पल दो पल ये साथ हमारा, एक मुसाफिर एक हसीना

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पागल-पागल सब कहते हैं, दीवाने तुम कहते हो
मुझपे सबने पत्थर फेंका, फूलें तुम बरसाते हो

पल दो पल ये साथ हमारा, एक मुसाफिर एक हसीना
आवारों की गर्दिश में तुम हुस्न की शमा जलाते हो

ये दुनिया मेरी कातिल है, तूने जान बचायी मेरी
मुज़रिम तेरे पीछे पड़े हैं, उनसे तुम टकराते हो

तुमने सागर को देखा है, हमने बस तुमको देखा
ठहरे अश्क में डूबी निगाहें, गहरे दर्द में जीते हो

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – बुने हैं दर्द के धागों से इश्क की चादर

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जला रहा हूं ये दिल, कोई दीया तो मिले
हुए हैं खाक मगर हाय कहीं धुआं तो मिले

बुने हैं दर्द के धागों से इश्क की चादर
इसे बिछाऊंगा पर तेरा आशियां तो मिले

सजा रहा हूं कांटों को अपने गुलशन में
मेरे चमन को दीदार-ए-बहारां तो मिले

सजा-ए-मौत न मिल पाई इस मुजरिम को
मगर गुनाह की कोई दास्तां तो मिले

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – कोई मुजरिम भी फरिश्ता इश्क में हो जाएगा

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सो गया हर शै दुनिया में, इश्कवाले जागे हैं
आशिकों के दिन बदकिस्मत, रातें भी अभागे हैं

हम जुदाई के सदमे से इस तरह से टूट गए
ठहरे पानी में अब हरसू, दर्द की सैलाबें हैं

कोई मुजरिम भी फरिश्ता इश्क में हो जाएगा
पाक जिनसे होंगी रूहें, ऐसी भी गुनाहें हैं

ये तलबगारों की बस्ती जालिमों की बस्ती है
रंजिशों की इस महफिल में हम तन्हा रह जाते हैं

©RajeevSingh