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पानीपत से सिली की लव स्टोरी – love story of sily from panipat

2012 में मैं पानीपत में रहती थी। वहां मैं जॉब करती थी। मेरे साथ वाले फ्लैट में रेंट पर प्रदीप रहता था। प्रदीप शादीशुदा था और बीवी के साथ था। आते-जाते हम दोनों की नजरें मिलती थीं। मैं उसको देखने के बाद उसकी तरफ आकर्षित हुई। जॉब से लौटकर आती तो नजरें उसी को खोजती। मैंने नोटिस किया कि वह भी मुझे देखने की कोशिश करता।

silly love story
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उसकी बीवी से मेरी अच्छी दोस्ती हो गई। मैं दिल ही दिल में प्रदीप से प्यार करने लगी थी लेकिन कह नहीं पाई। कुछ दिन वो अपने नए घर में शिफ्ट हो गया जो कुछ ही दूरी पर था। जब वो किसी काम से बाहर निकलता तो मैं उसको छत से देखने की कोशिश करती।
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मैंने फेसबुक पर प्रदीप को सर्च किया और उसको एड कर लिया। पहले कमेंट में हल्की फुल्की बातें हुई। उसके बाद चैट पर उससे बात करना बहुत अच्छा लगने लगा। एक बार मैं ऑफिस से आ रही थी तो रास्ते में उसने बाइक पर मुझे बिठा लिया। उफ्फ, पहली बार मैं उनके साथ बैठी, उस वक्त एक अजीब सा दर्द था क्योंकि अभी तक हमने एक दूसरे को यह नहीं बताया था कि हमें प्यार हुआ था।
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मैं उसी बीच घूमने जम्मू चली गई जहां मुझे अहसास हुआ कि मैं उसके बिना रह नहीं पा रही। उससे बात भी नहीं हो पा रही थी। वापस जब मैं अंबाला पहुंची तो मैंने फेसबुक ओपन किया तो उसका मैसेज आया था जिसमें लिखा था – आई लव यू।
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मैं बहुत खुश हुई। उसे पर्पल कलर पसंद था। अब मुझे उसकी हर पसंद अच्छी लगने लगी। हमारे बीच लगाव काफी बढ़ गया और इसी तरह दो साल निकल गए। मैं प्रदीप पर डिपेंड हो गई थी। कोई भी फैसला उससे बात किए बगैर नहीं ले पाती थी। मेरी पसंद वही तय करता था।
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लेकिन मुझे यह भी अहसास होने लगा था कि हम दोनों कभी एक नहीं हो सकते। वह शादीशुदा था। मैं सोचने लगी कि कहीं मेरा प्यार उसके लिए मुसीबत न बन जाए।मुझे जॉब के सिलसिले में दिल्ली और फिर उसके बाद मुंबई शिफ्ट होना पड़ा। प्रदीप को यह पसंद नहीं था। पर मैं चली गई। लेकिन मेरी तड़प मुझे परेशान करने लगी थी।
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मैं अब अकेली हो गई थी और प्रदीप के बिना कोई फैसला नहीं ले पा रही थी। फिर मैंने खुद को संभाला और सबकुछ मैनेज करने लगी। पर उससे प्यार का रंग कभी फीका नहीं हुआ। न चाहते हुए भी मैं उससे मिलने के लिए चार पांच महीने पर एक बार आ जाती थी। जॉब जरूरी थी इसलिए वापस जाना पड़ता था।
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मुंबई में जॉब करना मेरा शौक नहीं, मेरी मजबूरी थी जिसकी वजह से मैं अपने प्यार से दूर हो गई। फिर भी हम दोनों ने साथ चलने की कोशिश की। मुझे मेरी मंजिल तक ले जाने के लिए वो हमेशा मेरे साथ रहा। वह शादीशुदा था लेकिन इस बात से हम दोनों के प्यार पर कोई फर्क नहीं पड़ा। मुझे उसकी बीवी से जलन होने लगी थी।
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मेरे फैमिली ने मेरी शादी की बात चलाई। मेरी शादी फिक्स हो गई। यह वक्त के साथ एक समझौता था। प्रदीप खुश था कि मुझे मेरी वो मंजिल मिलने जा रही थी। प्रदीप एक फरिश्ते की तरह आया और मेरी मंजिल के पास मुझे छोड़कर वापस चला गया। उसकी बीवी को हमारे बारे में सबकुछ पता चल चुका था और सब खतम हो गया।
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प्रदीप ने मुझे कहा कि हमारा साथ यहीं तक था, तुम अपनी शादीशुदा जिंदगी निभाओ और मैं अपनी निभाता हूं। उसके बाद मेरी शादी तो हो गई लेकिन प्रदीप के बगैर मैं अधूरा महसूस करती हूं। मुझे नहीं पता कि ये गलत है या सही, पर मैं खुद से झूठ नहीं बोल सकती।
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मैं आज भी प्रदीप से बहुत प्यार करती हूं। अगर उनसे मेरी शादी होती तो मेरी मैरिज लाइफ बहुत अच्छी चल रही होती। वो मेरा गाइड था। मैं आज भी उसे पाना चाहती हूं..प्यार न सही दोस्त बनकर सही।

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