Tag Archives: मेहरबां शायरी

शायरी – अपने रोते हुए दिल को समझा न सका

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हम तेरे दर्द में जीकर भी परेशां न हुए
घुट-घुट के मरके भी हम बेजां न हुए

देख तेरे आने, तेरे जाने की कशिश
हमें पलकें मूंदने कभी आसां न हुए

आ पिला दे हमें अपने हाथों से जहर
ये ही कर दे जब तुम मेहरबां न हुए

अपने रोते हुए दिल को समझा न सका
माफ करना हम तेरी तरह इंसां न हुए

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – दर्द बेजुबां हो तो दिल क्या कहे

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दर्द बेजुबां हो तो ये दिल क्या कहे
आह खामोश हो तो ये लब क्या कहे

आरजू का हर एक अश्क आंखों में था
उसने देखा नहीं तो पलक क्या कहे

चाहतें मंद हैं बुझती लौ की तरह
रोशनी ही नहीं तो दीपक क्या कहे

कोई नहीं यहां अपना मेहरबां सा कोई
तन्हाई में अब मुझसे शब क्या कहे

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – जी रहे हो आशियां में आईने की तरह

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जी रहे हो आशियां में आईने की तरह
इतने जुबां वालों के बीच बेजुबां की तरह

टूट जाओगे जमाने से दगा मत खाना
यहां मिलते हैं बेवफा भी मेहरबां की तरह

चुप रहते हो और खुद पे सितम ढाते हो
फिर भी दिखते नहीं हो परेशां की तरह

तेरे दिल में बसा है उल्फत का सागर
मगर आंखें हैं तुम्हारी रेगिस्तां की तरह

©RajeevSingh