Tag Archives: रहबर शायरी

शायरी – वहां इश्क का परिंदा उड़ता है बेखबर सा

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लगता है उसका घर एक आजाद शहर सा
वहां इश्क का परिंदा उड़ता है बेखबर सा

घर में हर तरफ खड़ी हैं तनहाई की दीवारें
सुकूं से रहता है वो मोहब्बत भरे बशर सा

उसके लिए दुनिया कातिलों का कारवां था
आईना ही बना था वफादार हमसफर सा

बेवफाओं से दूर वो जिंदगीभर भागता रहा
दिल को था बनाया उसने अपना रहबर सा

बशर – इंसान, रहबर – राह दिखाने वाला

©राजीव सिंह शायरी

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शायरी – दीवानगी ऐसी है कि दिन-रात की खबर नहीं

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जिंदगी के सफर में अब संग कोई रहबर नहीं
माजी के आईने में भी कोई अक्स मयस्सर नहीं

मेरे दर्द की निगाहों का ऐसा हुआ नजरो-करम
इन आंसुओं की बाढ़ में दिखता कोई मंजर नहीं

टूटा हुआ जुनून है, खोया हुआ सुकून है
दीवानगी ऐसी है कि दिन-रात की खबर नहीं

मुद्दतों से तलाश है पर दिल मेरा हताश है
मेरी जिंदगी की राह पे है एक भी पत्थर नहीं

रहबर- राह दिखाने वाला
माजी- अतीत, past life
मयस्सर- उपलब्धि, प्राप्ति
नजरो करम- कृपा

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – मेरी राहों पे रहबर मुझे खींचता चला गया

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मेरी राहों पे रहबर मुझे खींचता चला गया
मैं उसे देख न पाया और चलता चला गया

इन समाजों की जंजीरों में मन घुटता था
इसलिए भीड़ में मैं तन्हा होता चला गया

आपको देखकर भी पूछना तो भूल गया मैं
आपके बारे में ही दिल सोचता चला गया

मेरी दुनिया में बेखुदी थी मगर मैं न था
खबर थी कि जिंदा हूं पर मरता चला गया

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari