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शायरी – किसकी सिसकी ये कहती है

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कट कट के ही रात कटेगी
जाने कितने करवट बदेलगी

किसकी सिसकी ये कहती है
ऐ दरिया, तू चुपके से बहेगी

इश्क की राख अपने बदन पे
जिंदगी कब तक मलती रहेगी

जुगनू जैसी उम्मीद है बाकी
मुझमें तू जल जल के बुझेगी

©राजीव सिंह शायरी

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शायरी – सीने में जो आग जली है, जलके कोई राख न छूटे

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दर्दे दिल से आह न रूठे
साज का एक तार न टूटे

सीने में जो आग जली है
जलके कोई राख न छूटे

जख्मों पे बस तेरे निशाँ हैं
दाग ये पड़ जाए न फीके

अश्कों ने आवाज तो दी थी
बेकस के गम तूने न देखे

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari