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शायरी – है कौन सा ये शहर, जहां कोई न हमसफर

#100 दर्द शायरी

है कौन सा ये शहर, जहां कोई न हमसफर

बस्तियों में गुल खिले हैं, पर खुशबू है बेअसर

सुबहो शाम उदास है, रात रोती कराह कर

धूप निकलता शोला सा, चांदनी थोड़ी मुरझा कर

  1. तेरे इश्क में दीवाना मरता नहीं कभी
  2. माना कि तेरे हुस्न के काबिल नहीं हूं मैं
  3. कोई इल्ज़ाम न लेगी वो अपने सर पे
  4. आह और दर्द बस तेरा तलबगार हुआ
  5. तू न आई तो अधूरी है जिंदगी की गजल
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शायरी – अंधेरी रात में तुम कभी ठोकर न खाओ

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सफर कट जाएंगे, बिछड़ के मर जाएंगे
तेरे बारे में लेकिन गजल कह जाएंगे

अंधेरी रात में तुम कभी ठोकर न खाओ
जहां पे तुम रहोगे, वहीं जल जाएंगे

न जुड़ पाया है हमसे ये टूटा आशियां भी
तेरे बिन ये हुनर हम कहां से पाएंगे

चले आए हैं लिखने इश्क की दास्तां हम
किताबों में ही हम-तुम संग रह जाएंगे

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – तेरे आशिक को तेरी याद बहुत आती है

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तेरे आशिक को तेरी याद बहुत आती है
दूर रहके ही तू उसपे सितम ढाती है

जागता है वो सारी रात बहुत रोते हुए
सारी दुनिया बस्ती में जब सो जाती है

कोई पैगाम न पाएगी तू कभी उसकी
इश्क में आशिक की जुबां मर जाती है

न कोई काट सके अपने हिज्र की रातें
तू कहीं पे इस शायर की गजल गाती है

हिज्र – जुदाई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – तेरे आगोश में मिटता है मेरा नामोनिशां

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बंद कर ली आंखें और लब थरथराए
आ गए करीब फिर तुम क्यूं शरमाए

दिन में कह लेना जो भी हो गिले शिकवे
तेरी खामोश जुबां मुझे रातों को समझाए

तेरे आगोश में मिटता है मेरा नामोनिशां
सिर्फ अहसास मेरी रूह बनकर रह जाए

जब तलक सामने ये तेरी हसीं सूरत है
तब तलक सारे जमाने का गम मर जाए

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – आधी रातों में वो दिल को छूकर चली गई

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कोई दरवाजे पे दस्तक देकर चली गई
आधी रातों में वो दिल को छूकर चली गई

मैं बरसता भी तो कैसे अबके सावन
वो अपनी जुल्फों में मुझे लेकर चली गई

वो कुदरत के नज़ारों से भी सुंदर है
अपनी तस्वीर मेरे दिल को देकर चली गई

दिल धड़कता है, धड़कने की सज़ा पाता है
मुझे दर्द भरी सांसे वो देकर चली गई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – अपनी आंखों में उसे बांध कर भला मैं कैसे रखूं

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शाम तो रख लिया अब रात को मैं कैसे रखूं
इतने उदास लम्हों को एक दिल में कैसे रखूं

हाथ आए थे चंद अश्क, छिटक के भाग गए
अपनी आंखों में उसे बांध कर भला कैसे रखूं

यादों के बयार संग मेरे दिल तक चले आए हैं
इन गर्द गुबारों को इस जिगर में अब कैसे रखूं

बूंद बनकर जो मेरी आंखों से दर्द बहा ले गया
ऐसे सावन को तेरे तोहफे के लिए मैं कैसे रखूं

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari