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दिल्ली से निवेदिता की प्रेम कहानी – nivedita love story from delhi

हम पहली बार में ही उसके हो गए। वो मुस्कुराता चेहरा, गेहुंआ रंग, पतला सा बदन। वो मेरी केमेस्ट्री की क्लास में आया था जहां हम 12वीं का क्लास की ट्यूशन करते थे। सर से उसने कुछ बात की और चला गया। एक पल के लिए उससे नजरें मिली और वो मेरी पलकों में समा गया। कुछ खास था, वो कुछ अपना सा लगा। पहली बार कोई ऐसा दिल को पसंद आया। हां पसंद आ गया मुझे एक अजनबी। नजरें सिर्फ उसे खोज रही थी। उस अंजान को ही।

nivedita love story

अगले दिन क्लास में एक बहुत ही मीठी सी आवाज सुनाई दी। एक्सक्यूज मी, क्या मैं यहां बैठ सकता हूं। और उसको में सुनती रह गई। धीरे धीरे उस लड़के पे सारी लड़कियां फिदा हो गई। पर मुझे उसका नाम भी नहीं पता था। वो ब्रिलिएंट स्टूडेंट था।
सारी लड़कियों का क्रश। वो शायद बोर्डिंग स्कूल में पढ़ा था और छुट्टियां बिताने के दौरान यहां कोचिंग ज्वाइन किया था। कुछ दिनों बाद चला गया। एक वही तो पूरे शहर में मुझे पसंद आया था।
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एक दोस्त से पता चला कि उसका नाम प्रीत था। कितना खूबसूरत नाम। जिसने भी उसका नाम प्रीत रखा, वो बहुत सोच समझ कर रखा होगा। उससे कभी बात नहीं हुई। 12वीं के एग्जाम भी खत्म हो गए और मैं आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली आ गई और बिजी हो गई। प्रीत का ध्यान ही नहीं रहा।
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तीन साल बाद मेरे ग्रेजुएशन का एग्जाम खत्म हुआ और जून 2014 में मैंने फेसबुक पर आपना नया आईडी बनाया, संस्कृति के नाम से। उसपे अपनी कुछ फ्रेंड को एड किया। एक दिन सुबह के समय फेसबुक ओपन किया तो मैंने एक नोटिफिकेशन और मैसेज देखा। मैसेज में लिखा था, हे यू नो मी (तुम मुझे जानती हो।) ये किसी प्रीत नाम के लड़के का मैसेज था।
मैं उसको पहचान नहीं पाई। वह चैट करता था तो मैं इग्नोर करती थी। कई बार ब्लॉक और अनब्लॉक भी किया। तीन महीने तक यही सिलसिला चलता रहा। प्रीत के जोर देने पर मैंने एक बार उससे फोन पर बात की तो मुझे उसकी स्वीट आवाज से याद आया कि यह वही प्रीत है जो 12वीं में केमेस्ट्री की क्लास में मिला था।
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मैं प्रीत की तरफ अट्रैक्ट होती चली गई। मैं बेचैन रहने लगी। हफ्तों ऐसे ही गुजर गए। एक दिन मैंने उसे कॉल किया और बोला कि प्लीज बात करो मुझसे। मैं तुम्हारी गर्लफ्रैंड बनना चाहती हूं। प्रीत यह सुनकर बहुत खुश हुआ। अब हम दोनों की बातें होने लगी। प्रीत दूसरे शहर में है और मैं दिल्ली में। वो भी आईएएस की तैयारी करता है और मैं भी।
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मैं चाहती थी कि वो प्यार का इजहार करे लेकिन वह कभी नहीं कर पाया। इसके लिए मैं उससे झगड़ती रहती। मैंने दिल्ली में एक बार गुस्सा होकर सिम चेंज कर लिया। लेकिन 1 जनवरी 2016 को उसने कहीं से मेरा नया नंबर लेकर मुझे मैसेज किया। मैं बहुत गुस्सा हुई लेकिन उसने सॉरी बोला। इसके बाद तीन महीने तक हम दोनों की बात होती रही।
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बहुत सारे प्रॉब्ल्मस हैं। वह भी बिजी रहता है। वो स्टडी पर फोकस्ड है और मैं भी। जब उसके पास टाइम निकलता है तो मेरे पास नहीं रहता। वो ठाकुर है और मैं पंडित हूं, इसलिए वो कहता है कि तुम अपनी लाइफ में आगे बढ़ो और मैं यही सुनकर दुखी हो जाती हूं।
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आज भी याद है 5 मार्च 2016 की वो दोपहर, जब मैंने प्रीत को कॉल किया और बड़ी बहस कर ली। उसके बाद से हम दोनों एक दूसरे से दूर हो गए। गलती उसकी है कि वह प्यार का इजहार ही नहीं कर रहा, बस चुप सा हो गया है। बस इतना कहूंगी किअपने प्यार का इजहार करना सीखो और निभाना भी। दूरी मायने नहीं रखती। मायने रखता है इजहार और प्यार का रिस्पेक्ट।

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