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शायरी – चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

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चल पड़ा हूँ किधर, जबसे छूटा है घर
और बिछड़ा है मेरा हसीं हमसफर
चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

अपने साये से रुखसत हुआ था कभी
जब दीये बुझ गए मुफ़लिसी में सभी
अब अंधेरे में रहता हूँ आठों पहर
चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

कोशिशें की बहुत, हौसले थे मगर
हो गया चाक मेरा ये नाज़ुक जिगर
फिर भी मिल न सका इश्क में रहगुज़र
चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

सागर से उठे थे धुएँ की तरह
फिर हवा में उड़े पंछियों की तरह
और घटा बनके एक दिन बरसी नज़र
चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

©RajeevSingh #love shayari

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शायरी – रुखसत न हुआ गम तो दिल रूला बैठे

love shayari hindi shayari

लम्हों की आहटों में हर रात गुजरती है
एक चांद के साये में मेरी रूह जलती है

रुखसत न हुआ गम तो दिल रूला बैठे
रोका तो बहुत फिर भी ये आह निकलती है

तेरी आंखों में देखा था जो, वो दर्द उठा था
ये इश्क के आगाज की तस्वीर होती है

टूटा हूं मगर तुमसे मैं इस तरह जुड़ा हूं
मरता हूं मैं तेरे लिए, तू जान लेती है

©RajeevSingh #love shayari