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शायरी – दीवानगी में न जाने कल कहां पे रहूँगा

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ये दिल किसी मुकाम पर ठहर न सका
मीलों तलक चला मगर मंजिल पा न सका

दीवानगी में न जाने कल कहां पे रहूंगा
आवारगी में अपना घर भी बना न सका

सर पे कफन है और जलता हुआ दिल है
चाहा बहुत पर जिस्म को खुद जला न सका

तड़पती हुई लहरों को शायद नहीं मालूम
साहिल की प्यास को वो कभी बुझा न सका

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – आई थी शाम बेकरार, आकर चली गई

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आई थी शाम बेकरार, आकर चली गई
होना था बस इंतजार, होकर चली गई

साहिल से दूर एक लहर आती मुझे दिखी
आंखों से वो सागर पार, बहकर चली गई

आस्मा के सारे तारे टूटकर गिरते रहे
चांद जिनसे करके प्यार, बुझकर चली गई

दिल में दो रूहों का दर्द लेकर जी रहा
मुझपे अपना जां निसार दिलबर चली गई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari