Tag Archives: वजूद शायरी

शायरी – दिल जमाने को समझेगा आखिर कब

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ठोकरें खाना बंद करेगा आखिर कब
दिल जमाने को समझेगा आखिर कब

मुद्दतों से मुझे ख्वाब दिखा रहा है वो
सारे ख्वाब तोड़ जाएगा आखिर कब

हाल रिश्तों का एक दिन बुरा होते देखा
तू भी तो मुझे धोखा देगा आखिर कब

आईने से कई बार ये पूछती रहती हूं मैं
मेरा वजूद मुझे तलाशेगा आखिर कब

©राजीव सिंह शायरी

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शायरी – जिस शहर में सच्चा हमसफर न मिलेगा

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जिस शहर में सच्चा हमसफर न मिलेगा
मुसाफिर वहां सफर में कहां तक चलेगा

हर जगह जहां बेवफाओं की महफिलें हैं
एक तन्हा उस मंजर में कहां तक टिकेगा

मकानों के कारवां में फंसके फड़फड़ाया
गलियों की कैद में परिंदा कहां तक रहेगा

चांद सूरज भी जहां अपना वजूद खो चुका
उस शहर में दीया फिर कहां तक जलेगा

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – तेरी यादों में जलता रहा आज देर रात तक

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तेरी यादों में जलता रहा आज देर रात तक
ये दिल खाक बनता रहा आज देर रात तक

तेरे ख्यालों की तेज आंधियों के थपेड़ों से
गश खाकर गिरता रहा आज देर रात तक

भीगा सा अहसास था लेकिन नहीं थी खबर
आखों से कुछ गिरता रहा आज देर रात तक

दामन में समेटता रहा अपने वजूद के टुकड़े
आईने सा मैं टूटता रहा आज देर रात तक

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – तेरी मोहब्बत के गम का असर न मिटे

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तेरी मोहब्बत के गम का असर न मिटे
अमृत न मिले सही, ये जहर न मिटे

अब मेरी तन्हाई तकलीफ नहीं देती
तुझमें खोये रहने का ये पहर न मिटे

अपने वजूद की तलाश में भटका मैं
मरते दम तक मेरा ये सफर न मिटे

चांद की चाहत में जो दीवाना हुआ हो
आंखों के समंदर में वो लहर न मिटे

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – अब दिल के लिए कोई पत्थर भी तो आए

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तुम किस अंधेरे में हो ऐ नूर खुदा के
शब ने तुझे पुकारा है खामोश सदा से

दामन की उलझनों में डूबे हुए हैं हम
लो दफ्न हो गए हैं खुद अपनी खता से

अब दिल के लिए कोई पत्थर भी तो आए
ऐ बेरहम तन्हाई मुझे इतनी दुआ दे

एक दर्द का वजूद है आगोश में मेरे
वो दूर रह रहा है अपनी दिलरुबा से

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – जब जज्ब कर गए हम हर दर्द को इस दिल में

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रहने को हालांकि वो अच्छा सा घर बना गए
लेकिन सुकून पाने को दरिया किनारे आ गए

जब जज्ब कर गए हम हर दर्द को इस दिल में
फिर अश्क में ही अपनी आंखों को डूबा गए

अपने वजूद के लिए जो ताउम्र भटकते रहे
इस जिंदगी की राह से कितने ही बेवफा गए

जब तक किसी गम को मिटा पाते हम दिल से
तब तक तो सैकड़ों गम जाने कहां से आ गए

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – आईना हमने कई बार तुझे रोते देखा

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आईना हमने कई बार तुझे रोते देखा
कोई दुखड़ा खुद ही से कहते देखा

जो गले से तू लगाए तो सौ बार लगूं
पर तेरे वजूद को टुकड़ों में बंटते देखा

क्या समझ पाएंगे जिसने दर्द न झेला हो
ऐ जमाना तुझे दीवानों पे हंसते देखा

देखना कुछ भी न बाकी रहा दुनिया में
जिंदगी को जीते-जी सूली पे चढ़ते देखा

©RajeevSingh/ love shayari

शायरी – जिंदगी भर मैं उनके लिए तमाशा ही रहा

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कुछ बेकदरों का जमघट था शहर में
उम्रभर मैं उनके लिए तमाशा ही रहा

मेरे गमों पर करता रहा वो छींटाकशी
हर कोई मेरे दर्द को ठुकराता ही रहा

मैं बहुत परेशां हुआ खुद को बनाने में
जब देखो जमाना मुझे मिटाता ही रहा

अपने वजूद की सच्चाई पाने के लिए
मैं जिंदगी को भीड़ से हटाता ही रहा

 

©rajeev singh shayari