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हीर रांझा 34 – कहानी का आखिरी पन्ना

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राजा से विदा लेकर हीर रांझा घर लौट चले। रास्ते में रांझा ने हीर से कहा, ‘खुदा और पीरों ने तुमसे मुझे मिला ही दिया।’ हीर ने जवाब दिया, ‘मैं इस हालत में तुम्हारे साथ घर लौटूंगी तो लोग मुझे बदचलन कहेंगे। वे कहेंगे कि मैंने अपने पिता और ससुर का घर उजाड़ा है। फिर हम दोनों का यह मेल क्या कोई खुशी लेकर आएगा? औरतें ताना देंगी कि मैं बिना शादी किए तुम्हारे साथ रह रही हूं।’

हीर रांझा के साथ अपने गांव पहुंची तो घरवालों ने दोनों का स्वागत किया। लेकिन गांव घरवाले पहले से ही दोनों से जले भुने थे इसलिए वे अंदर ही अंदर दोनों को मौत देने की योजना बनाने लगे। ऊपर से तो वह हीर रांझा के साथ बहुत अच्छे से पेश आए। दोनों को घर में लाकर प्यार से बिठाया। हाल चाल लेने लगे। लेकिन हीर रांझा अब कसाइयों के हाथ में थे।

हीर के ससुराल से एक आदमी संदेशा लेकर आया कि खेरा अपनी बहू को वापस ले जाना चाहते हैं। लेकिन हीर के घरवालों को यह कहते हुए लौटा दिया कि खेराओं से अब उनका कोई संबंध नहीं रहा और वे हीर को वापस नहीं भेज सकते।

हीर के रिश्तेदारों ने रांझा से कहा, ‘तुम अपने घर तख्त हजारा जाओ। वहां अपने भाइयों से बात कर बारात लेकर आना।’ रांझा तख्त हजारा चला गया। इधर रिश्तेदारों के साथ मिलकर हीर का चाचा कैदु हत्या की योजना बनाने में लग गया।

किसी ने हीर के कान में डाल दिया कि उसके रिश्तेदार उसे खेराओं के पास भेजने की तैयारी में लगे हैं। कैदु ने हीर को डांटते हुए कहा, ‘अगर खेरा यहां आ गए तो झगड़ा बवाल होगा। तुम्हारा पति सैदा शादी के गवाह लाएगा और तुम्हारी रांझा से हुई शादी की मनगढ़ंत कहानी की पोल खोलेगा।’

कैदु अपने अन्य रिश्तेदारों के साथ सलाह करने लगा। कैदु ने उनसे कहा, ‘भाइयों, सियालों में तो आज तक ऐसा नहीं हुआ। हम लोग अगर हीर की शादी रांझा से करेंगे तो लोग हम पर थूकेंगे। कहेंगे कि देखो, ये सियाल अपनी बेटियों की शादी किसी से करते हैं और फिर उसे किसी और को सौंप देते हैं।’

रिश्तेदारों ने कैदु की हां में हां मिलाई। वे कहने लगे कि इससे उन सबकी नाक कट जाएगी। जिंदगीभर लोग हीर की कहानी सुनाकर उनको ताना देंगे। अगर चरवाहे के साथ हीर को भेजेंगे तो उनकी भारी बदनामी होगी। सबने इस योजना पर मुहर लगाई कि हीर को जहर देकर मार दिया जाय।

योजना के अनुसार कैदु हीर के पास गया और उसके बगल मैं बैठकर कहने लगा, ‘बेटी धीरज से काम लेना। रांझा की लोगों ने हत्या कर दी। तलवार से उसके टुकड़े टुकड़े कर दिए गए।’ यह सुनते ही हीर गश खाकर गिर पड़ी। जब हीर को थोड़ा थोड़ा होश आया तो उस हालत में ही कैदु ने जहर मिला शरबत उसे पिला दिया। हीर की हालत बिगड़ने लगी। जब उसे लगा कि वह अब मर जाएगी तो वह चिल्लाने लगी, ‘रांझा को एक बार मेरे पास ले आओ। मैं उसे एक बार देख लूं।’ कैदु कहने लगा, ‘रांझा मर चुका है। अब तुम भी खामोश हो जाओ।’ रांझा का नाम लेते लेते हीर की आखिरी सांस टूट गई।

सबने मिलकर हीर को दफना दिया और रांझा के पास खबर भिजवाई। ‘तुम्हारी हीर को हम बचा नहीं पाए। बहुत कोशिश की लेकिन मौत के आगे हम सब बेबस हो गए। तुम्हारी हीर नहीं रही।’

खबर लेकर एक आदमी रांझा के पास तख्त हजारा गया। रांझा के हाथ में चिट्ठी देते हुए वह रो रहा था। रांझा ने पूछा, ‘क्या हुआ? क्यों रो रहे हो? क्या हीर को कुछ हो गया? हीर तो ठीक है न।’

चिट्ठी लाने वाले ने रांझा से कहा, ‘मौत ने तुम्हारी हीर को तुमसे छीन लिया है।’ यह सुनते ही रांझा के दिल को धक्का लगा और वहीं उसकी मौत हो गई।

इस तरह खुदा ने तो दो सच्चे प्रेमियों को मिलाया था लेकिन दुनियावालों ने उनकी हत्या कर दी। आज तक प्रेमियों के साथ दुनिया के लोग ऐसा ही जुल्म करते आ रहे हैं और न जाने इसका कब अंत होगा।

हलांकि इस दुनिया में सबको एक न एक दिन मरना है। सभी बचपन से बुढ़ापा तक जिंदगी जीते हैं और मर जाते हैं लेकिन हीर रांझा की मौत साधारण मौतें नहीं थीं। दुनिया खत्म हो जाएगी लेकिन हीर रांझा के सच्चे प्रेम की यह दर्दभरी कहानी हमेशा जिंदा रहेगी।

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हीर रांझा – 33 – राज दरबार में पहुंचा सच्चे प्रमियों का मामला

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जोगी रांझा को राजा ने राज दरबार में बुलाया। रांझा के बदन पर मुक्कों और चाबुकों के निशान थे। वह दर्द से कराह रहा था। उसने राजा से कहा, ‘आपका सिंहासन हमेशा सलामत रहे महाराज। आपके इंसाफ की चर्चा दूर दूर तक है। मैं भी इंसाफ की उम्मीद लेकर आया हूं। आपके राज्य में मुझ बेगुनाह को बुरी तरह पीटा गया।’

राजा ने रांझा की बात सुनने के बाद सैनिकों को खेराओं को लाने भेजा। सैनिक खेराओं को पकड़ कर दरबार में लाए। रांझा बोला, ‘इन डकैतों ने मुझे मारा और मेरी बीवी का अपहरण कर लिया।’

खेरा कहने लगे, ‘महाराज, यह फकीर नहीं ठग है। इसने चालाकी से हमारी बहू को घर से भगाया। आप इसके फकीरी वेश पर मत जाइए। यह सांप का जहर उतारने के बहाने से आया और हीर को चुरा ले गया। इस चोर को मौत की सज़ा मिलनी चाहिए।’

रांझा ने जवाब दिया, ‘हीर मेरी है और मैं हीर का हूं। हम दोनों की शादी पांच पीरों ने कराई है। काजी ने धोखे से हीर की शादी सैदा से करा दी। इंसाफ कीजिए महाराज।’

खेराओं से राजा भी नाराज हुए। वह कहने लगे, ‘तुम लोगों ने पाप किया है। अब काजी तुम दोनों के मामले की सुनवाई करेंगे। जो झूठा निकलेगा, उसे फांसी पर लटका दूंगा।’

राजा ने इंसाफ के लिए अपने काजी को बुलाया। काजी ने दोनों पक्षों को अपना मामला रखने को कहा। खेराओं ने अपना पक्ष रखा, ‘झांग सियाल के चूचक ने अपनी बेटी हीर की शादी रंगपुर खेरा के सैदा से की। बकायदा बारात लेकर खेरा गए और मुल्ला ने गवाहों के सामने दोनों का निकाह कराया। हीर ससुराल आई लेकिन यह जोगी रावण बनकर आया और सीता को उठा ले गया। यह पहले चूचक के यहां चरवाहे का काम करता था। यह हीर से शादी करना चाहता था लेकिन चूचक नहीं माना। अब यह झूठ बोल रहा है कि इसकी हीर से शादी हुई। यह बहुत बड़ा झूठा और जालसाज है।’

अब काजी ने रांझा से पूछा, ‘फकीर, क्या तुम्हारे पास कोई गवाह है जो यह कहे कि तुम्हारी शादी हीर से हुई है।’

रांझा ने जवाब दिया, ‘आप मजहब और खुदाई जानते हैं। मेरी और हीर की रूह ने एक दूसरे के लिए हां कहा और हम दोनों एक दूजे के हो गए। खुदा ने हम दोनों की रूहों को मिलाया है। जब हमने खुदाई इश्क किया है तो उसके आगे संसार के ये रीति रिवाज क्या मायने रखते हैं?’

काजी रांझा की बातों से सहमत नहीं हुआ। उसने कहा, ‘तो तुम झूठ बोल रहे हो कि हीर और तुम्हारी शादी हुई। बेकार की बातें मत बनाओ, सच सच बताओ। तुम्हारी वजह से सियाल और खेरा बदनाम हुए हैं। यह शैतानी छोड़ो वरना सज़ा के तौर पर और चाबुक की मार पड़ेगी।’

रांझा ने कहा, ‘तुम काजियों ने दुनिया का सत्यानाश किया है। तुम लोगों को गलत बातें सिखाते हो और दूसरों के पैसे पर पेट पालते हो। अगर खेराओं से इतनी ही हमदर्दी है तो हीर के बदले अपनी बेटी दे दो उनको।’

काजी ने हीर की बांह पकड़ी और उसे खेराओं के हवाले करते हुए कहा, ‘यह फकीर मक्कार है।’ लेकिन हीर दो पाटों के बीच फंसी कुछ समझ नहीं पा रही थी कि वह क्या करे। वह मुरझाई हुई सी पीली पड़ गई थी और बेजान सी दिख रही थी।

रांझा गुस्से में बोला, ‘काजी मेरी नजरों से दूर हट जाओ। इश्क में जुदाई से बेहतर तो मेरे लिए मौत है। इन डकैतों ने मेरी हीर को लूट लिया। मैं गरीब फकीर हूं और मेरा पास तुमको देने के लिए घूस नहीं है। तुम लोग पैसे लेकर बेगुनाह को फंसाते हो और फैसला सुनाते हो।’

काजी के फैसले के बाद हीर दर्द से कराह उठी। कहने लगी, ‘ऐ खुदा, या तो मुझे रांझा से मिला दे या मौत दे दे। इस मुल्क के लोगों ने हम पर कहर बरपाया है। ऐ खुदा, ऐसे मुल्क में आग लगे, कयामत आए।’ हीर का इतना कहना था कि शहर में सच में आग लग गई। घर जलने लगे। आग लगने की खबर राज दरबार में पहुंची तो राजा समझ गए कि जरूर दो सच्चे प्रेमियों के साथ नाइंसाफी हुई है और दोनों को लोगों ने दबाया है।

राजा ने आग का कारण जानने के लिए ज्योतिषियों को बुलाया। ज्योतिषियों ने कहा कि दोनों प्रेमियों की आह को खुदा ने सुना और यह कयामत ला दिया। अब इन दोनों प्रेमियों को मिलाने पर ही खुदा हमें माफ करेंगे और यह आग भी तभी बुझेगी।

राजा ने हीर को रांझा के हाथ सौंप दिया और खेराओं को बहुत फटकारा। राजा ने कहा, ‘दो सच्चे प्रेमी पति पत्नी बनें, यही सही है।’ रांझा ने राजा से कहा, ‘आपका राज हमेशा सलामत रहे महाराज। आप पर कभी कोई संकट न आए। यही दुआ है मेरी।’ इस तरह राजा ने दो प्रेमियों को मिलाया। हीर और रांझा अब एक हो गए थे। दोनों राजा को दुआ देते हुए वहां से घर की ओर चले।

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हीर रांझा – 32 – सबको झांसा देकर दोनों हुए फरार

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रांझा हीर के घर आया तो वह बेहोश पड़ी थी। वहां औरतें एक दूसरे से कह रही थीं, ‘देखो खेरा जिसे बदनाम कर रहे थे, दरवाजे से जिस फकीर को भगा रहे थे; आज अपनी बहू की जान बचाने की नौबत आई तो उसी को पकड़ लाए हैं। अब हीर की जान बच जाएगी।’

रांझा ने आदेश दिया कि हीर को किसी एकांत कोठरी में ले जाया जाय जहां वह मंत्र पढ़ेगा। उसने कहा कि जहरीले सांप के विष का असर खत्म करने में वक्त लगेगा। वहां सेहती के अलावा किसी को रहने की इजाजत उसने नहीं दी।

सेहती की योजना कामयाब हुई। रांझा हीर को वहां से भगा ले जाने के लिए ही आया था। जब आधी रात हुई तो रांझा हीर के साथ भागने को तैयार हुआ। सेहती ने कहा, ‘जोगी, मैंने अपने परिवार की इज्जत को दांव पर लगाकर तुमको हीर से मिलवाया है। अब मुझे भी मुराद से मिलवा दो।’

सेहती को मुराद से मिलवाने की खातिर रांझा खुदा से दुआ मांगने लगा और उसका असर भी हुआ। न जाने कहां से मुराद अपनी ऊंट के साथ वहां पहुंचा। उसने कहा, ‘पता नहीं मेरे ऊंट को अचानक क्या हो गया। हम कहीं और जा रहे थे और ऊंट पर बैठे बैठे मुझे नींद आ रही थी। ऐसा लगा जैसे आसमान से कोई आवाज आई जिसे सुनकर मेरा ऊंट आंधी की तरह दौड़ता हुआ यहां आ पहुंचा। अब मैं समझा कि क्या बात थी। चलो हम सब यहां से भाग चलें।’

हीर-रांझा, सेहती-मुराद वहां से फरार हो गए। सुबह हुई तो सबने पाया कि चारों गायब थे। देखते देखते गांव में हल्ला मचने लगा। सब कहने लगे, ‘हीर और सेहती ने पूरे गांव की इज्जत मिट्टी में मिला दी। हमारी तो नाक कट गई। अब पूरी दुनिया हम पर थू थू करेगी।’

खेराओं ने अपने हथियार निकाल लिए। सब चारों को खोजने निकल पड़े। मुराद सेहती के साथ भागने में सफल रहा लेकिन रास्ते में एक जगह थककर चूर हुए हीर रांझा की नींद आ गई। वहां राजा अदाली का राज चलता था। खेरा वहां आ धमके और रांझा को उन्होंने बुरी तरह पीटा और हीर को ले गए। अब रांझा राजा अदाली के दरबार में इंसाफ मांगने पहुंचा।

वह राजभवन के बाहर जोर जोर से रोने चिल्लाने लगा। जब शोरगुल राजा के कानों तक पहुंची तो उनको नौकरों से पता चला कि कोई जोगी इंसाफ के लिए गुहार लगा रहा है। कहानी आगे पढ़ें।

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हीर रांझा – 31 – हीर और सेहती ने मिलकर बनाई योजना

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सेहती हीर के पास गई और जोगी रांझा का संदेशा उसे सुनाया। कहा, ‘तुमने उससे भैंसों की रखवाली करवाई। प्यार किया और धोखा देकर सैदा से शादी कर ली। वह फकीर बदन पर राख मलकर अब दर-दर भटक रहा है। तुमको जाकर अपने प्रेमी से मिलना चाहिए।’

हीर बोली, ‘मैं उससे जाकर मिलूंगी और उसके सारे दुख को अपने सर ले लूंगी।’ हीर ने रांझा से मिलने का फैसला किया। वह नहाने के बाद जाने के लिए तैयार हो गई। कालाबाग के बगीचे में रांझा ने जैसे ही हीर को आते देखा, उसने दूर से ही उसे पहचान लिया।

हीर आते ही रांझा के गले लग गई। ‘रांझा, यह जुदाई मैं बरदाश्त नहीं कर पा रही हूं। मेरा दिल भट्टी की तरह जलता है। मैं तुम्हारी अमानत सुरक्षित तुम्हारे पास ले आई हूं। मैंने अब तक तुम्हारे सिवा किसी और के बारे में सोचा तक नहीं। चलो यहां से कहीं दूर भाग चलें।’

जलते दीए में पतंगा जल जाता है तो लौ और भी भड़क उठती है। रांझा और हीर के मिलन पर प्यार और भी दीवानगी से भर उठा। दोनों की नसों में प्यार का जहर चढ़ता रहा। दोनों के मिलन की खुशबू दूर दूर तक फैल रही थी।

लेकिन हीर को घर लौटना भी था। जल्दी ही रांझा से हीर को विदा लेना पड़ा। घर लौटते समय सेहती से हीर सलाह करने लगी, ‘मैं रांझा से फिर मिलना चाहती हूं। यह तुम ही कर सकती हो। तुमको प्रेमी मुराद से मिलना है और मुझे रांझा से। कोई ऐसा रास्ता निकालते हैं जिससे हम दोनों अपने प्रेमी से हमेशा के लिए मिल जाएं।’

हीर के कहने पर सेहती ने एक योजना बनाई। वह मां के पास गई और बोली, ‘मां, हीर की तबीयत खराब रहती है। वह दिन पर दिन दुबली होती जा रही है। दिनभर पलंग पर वह मरीज जैसी पड़ी रहती है। खाती है न पीती है। ऐसे में तो दुख से वह मर जाएगी। बहू तो घर की शोभा होती है। लेकिन जब से हीर आई है तबसे हमारा घर परेशानियों से घिरा है। यह अपने साथ हमारी बदकिस्मती लेकर आई है। पति सैदा से तो यह दूर भागती है। वह कुछ इसे कहता भी नहीं।’

सेहती मां को हीर की तकलीफों के बारे में समझा ही रही थी कि तब तक योजना के मुताबिक हीर वहां आई और सास से कहने लगी, ‘मां जी, घर के अंदर रहते रहते मन ऊब गया है। मैं सेहती के साथ बाग बगीचे खेतों में घूम आऊं। घर में बैठे रहने से जी घबराता है।’

हीर की सास मसले पर अभी सोच ही रही थी कि सेहती बोल पड़ी, ‘चलो हीर, बाहर घूमने निकलते हैं। मां, हम घर की चारदीवारी में गुलाब की कली को मुरझाते नहीं देख सकते।’

सेहती की मां यह सुनकर राजी हो गई और कहने लगी, ‘जाओ घूम आओ, हो सकता है इससे हीर की तबीयत में कुछ सुधार हो। लेकिन इसे अपनी सहेलियों के साथ ही रखना। हीर, तुम घर के बाहर जा रही हो तो बहू होने की मर्यादा का ख्याल रखना। कुछ ऐसा वैसा मत करना कि हमारी बदनामी हो।‘

सेहती अगली सुबह सहेलियों और हीर के साथ बाहर घूमने निकली। सभी बगीचे में जाकर नाचने गाने लगे। तभी सेहती ने चुपके से हीर के पैर में एक कांटा चुभा दिया। योजना के मुताबिक हीर रोने चिल्लाने लगी, ‘मुझे सांप ने काट लिया, बचाओ, कोई मेरी जान बचाओ।’ हीर बेहोश होने का नाटक करने लगी।

सेहती भी चिल्लाने लगी, ‘बहू को काला सांप ने काट लिया।’ सब हीर को उठाकर घर ले आए। जादू मंतर करने वालों से लेकर हकीमों, फकीरों तक को बुलाया गया। लेकिन हीर ठीक नहीं हो पाई। उसकी सास कहने लगी, ‘लगता है हीर अब नहीं बचेगी।’ तब सेहती ने मां को सलाह दिया, ‘इस सांप के जहर को सिर्फ एक ही जोगी मार सकता है। वह कालाबाग में रहता है। उसकी बांसुरी की धुन में जादू है। जहरीले सांप, भूत प्रेत शैतान तक उससे डरते हैं।’ यह सुनकर हीर के ससुर ने सैदा से कहा, ‘जाओ बेटा, बहू की जान बचानी है तो उस फकीर को ले आओ।’

सैदा जोगी रांझा के पास दौड़ा दौड़ा पहुंचा। वह हीर की चिंता में पीला पड़ गया था। उसने जोगी से कहा, ‘मेरी हीर को सांप ने काट लिया। बहुत इलाज के बावजूद ठीक नहीं हुई। मेरी बहन कहती है कि आप उसे ठीक कर सकते हैं। हमारे साथ चलिए।’

लेकिन रांझा जाने को तैयार नहीं हुआ। सैदा ने उसके पैर पकड़ लिए लेकिन रांझा ने उसे झटक दिया और उसे पीटने लगा। सैदा वहां से भागा भागा घर लौटा और पिता से अपने साथ हुई बदसलूकी के बारे में बताया। इस पर उसके पिता गुस्से में आ गए और जोगी को सबक सिखाने की बात करने लगे। लेकिन सेहती ने उनको रोक लिया और हीर की जान का वास्ता देकर जोगी को मनाकर लाने को कहा।

सेहती की बात मानकर पिता जोगी रांझा के पास गए तो वह भी आने को तैयार हो गया और इस तरह से खेराओं ने अपने पैर पर खुद कुल्हाड़ी मार ली। कहानी आगे पढ़ें।

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हीर रांझा 30 – सेहती को हीर ने मनाया और रांझा से मिलने भेजा

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रांझा हीर के घर से लौटकर कालाबाग के बगीचे में चला गया और धूनी रमाने लगा। वह आग जलाकर ईश्वर का ध्यान करने लगा। रंगपुर की लड़कियां एक दिन उस बगीचे में घूमने आई। खूबसूरत परियों के आने से बगीचा जन्नत बन गया। लड़कियों ने जोगी की झोपड़ी देखी तो उनको शैतानी सूझी। सबने झोपड़ी को तोड़ दिया। जल रहे आग को बुझा दिया और वहां रखे बर्तनों को तोड़ दिया। जब जोगी रांझा ने यह सब देखा तो गुस्से से चिल्ला उठा। सभी लड़कियां वहां से भागी लेकिन एक लड़की को रांझा ने पकड़ लिया और वह ‘बचाओ बचाओ’ पुकारने लगी। वह लड़की रांझा से कहने लगी, ‘मुझे छोड़ दो। मैं तुम्हारा संदेशा हीर तक पहुचाऊंगी। हम सब जानते हैं कि हीर तुमसे प्यार करती है।’

हीर का नाम सुनकर रांझा को राहत मिली। लड़की रांझा का संदेशा लेकर हीर तक आई, बोली, ‘मैं सहेलियों के साथ कालाबाग के बगीचे में गई थी। वहां हमें रांझा मिला। उसने कहा कि वह दिनभर गांव के रास्ते पर नजरें टिकाए रहता है। तुम्हारे इंतजार में रातों को तारे गिनते हुए रोता रहता है। वह बहुत दुख में जी रहा है।’

इस पर हीर ने लड़की से कहा, ‘रांझा ने ये भेद तुमको क्यों बताईं। सच्चे प्रेमी अपने दिल की बात किसी को नहीं बताते। जो प्रेम का राज दूसरों के आगे उगलते हैं वो हारे हुए प्रेमी कहलाते हैं। रांझा की बुद्धि को क्या हो गया है जो वह इस मामले को और बिगाड़ने पर तुला है?’

हीर ने कुछ सोचा और सेहती के पास  गई। उसने सेहती के पैर पकड़ लिए और उसका दिल जीतने की कोशिश करने लगी। ‘बहन, मुझे माफ कर दो। मैंने तुमको बुरा भला कहा। तुम मुझे उसके बदले दुबारा गाली दे लो लेकिन मुझे मेरे आशिक से मिला दो। मैं तुम्हारी गुलामी करूंगी। मेरे पास जितनी धन दौलत है, सब तुम ले लो। रांझा और मैं एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते। रांझा ने मेरे लिए बहुत कुछ सहा है। उसने घर छोड़ दिया, भैंसों की देखभाल की। जोगी बन गया। यह सब उसने मेरी खातिर किया।’

सेहती ने कहा, ‘तुम अपने मतलब को हासिल करने के लिए मेरे पैर पकड़ रही हो। तुमने मुझे अपने घर से बाहर निकाल दिया और अब आकर मेरे आगे हाथ जोड़ रही हो। दुनिया में हर कोई अपने स्वार्थ के लिए किसी हद तक जा सकता है।’

हीर यह सुनकर और भी मीठी आवाज में उससे कहने लगी, ‘बहन, मुझपर दया करो। मैं मुश्किल मैं हूं। मेरी मदद करो। कालाबाग के बगीचे में जोगी से मुझे मिला दो। तुम अच्छा काम करोगी तो खुदा भी तुम्हारी दुआ कुबूल करेंगे। तुम हीर को रांझा से मिलाओगी तो तुमको भी खुदा तुम्हारे प्रेमी मुराद से मिलाएंगे।’ यह सुनते ही सेहती का दिल गदगद हो गया। उसने हीर से कहा, ‘जाओ, मैंने तुमको माफ किया। तुम प्यार में शुरू से ही वफादार रही हो इसलिए दो प्रेमियों को मिलाने में मदद करूंगी।’

सेहती जोगी रांझा से मिलने कालाबाग पहुंची। वह जोगी के लिए खाना लेकर गई थी। सेहती ने रांझा को सलाम कहा लेकिन वह भड़क गया। ‘यहां क्यों आई हो तुम। दुनिया के सारे झगड़े तुम औरतों की वजह से हैं। यह हव्वा ही थी जिसके कारण आदम को जन्नत से निकाला गया।’

इस पर सेहती ने कहा, ‘नहीं, आदम के जन्नत से निकाले जाने की वजह हव्वा नहीं थी। यह आदम की हवस थी। जब फरिश्ते ने उसने फल खाने से मना किया था उसने क्यों खाया। लेकिन हवस आदमी से कुछ भी करवाता है। उसने फल खाया और जन्नत से निकाला गया।’

रांझा ने कहा, ‘बकबास कर रही हो तुम। औरतें शुरू से ही बुरी रही हैं। कब उसने वफादारी निभाई है? हमेशा धोखा ही किया है।’

सेहती ने जवाब दिया, ‘क्यों, औरतों को गाली दे रहे हो। बुरे तो मर्द होते हैं जो शादी के बाद बीवी को छोड़कर दूसरी औरतों के लिए मुंह मारते फिरते हैं। जब बीवी उसे छोड़कर चली जाती है तब वह औरतों को गाली देना शुरू कर देता है। यह पाखंड है। तुम क्यों उसमें बुराई खोज रहे हो जिसने तुमको जन्म दिया। तुम उनको शैतान की बेटी साबित करने पर क्यों तुले हो। अगर धरती पर औरतें नहीं होंगी तो दुनिया खत्म हो जाएगी। तुम क्यों जोगी बने फिर रहे हो? क्यों किसी लड़की से कहकर हीर तक संदेशा पहुंचाते हो। धोखेबाज तो तुम हो और अपने आपको बहुत बुद्धिमान समझ रहे हो।’

यह सुनकर रांझा का गुस्सा थोड़ा कम हुआ। सेहती ने भी देखा कि हीर के लिए रांझा कितना दुख उठा रहा है तो वह भी शांत हुई। जब दोनों ही शांत हो गए तो रांझा ने अपनी बात छेड़ी, ‘मैंने हीर के सालों पशुओं की रखवाली करने का काम करता रहा। उससे कहना कि वह चरवाहा उसे पुकार रहा है। मुझे मेरी हीर से मिला दो तो हम दोनों मिलकर तुम्हें तुम्हारे मुराद से मिलने में मदद करेंगे। हीर से कहना कि मैंने क्या गलती की जो वह मुंह फेर रही है। मैं उसका चांद जैसा चेहरा देखने को आतुर हूं। उसकी जुल्फों में उलझकर रह गया हूं और उसकी आंखों के काजलल ने मेरे दिल को चीर दिया है। प्रेम ने मुझे बेशरम बना दिया है। हीर, या तो तुम यहां बगीचे में मिलने चली आओ या मुझे अपने घर बुला लो।’

इस पर सेहती से नहीं रहा गया। वह कहने लगी, ‘मैं भी मुराद के बिना नहीं जी सकती। मैं तुमको हीर से मिलवाऊंगी लेकिन तुमको भी मुराद से मुझे मिलवाना होगा। तुम मुराद को ला दोगे तो मैं तुम्हारे पैरों पर गिर पड़ूंगी। मैं दिन रात उसके प्यार में जलती रहती हूं।’ रांझा ने सेहती को मदद का भरोसा दिलाकर विदा किया। कहानी आगे पढ़ें।

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हीर रांझा 29 – ननद सेहती से हीर और जोगी रांझा का हुआ झगड़ा

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रांझा और हीर को एक दूसरे से बातें करते सेहती ने देख लिया। उसने देखा कि हीर बड़े प्यार से जोगी को देख रही है और उससे कुछ कह रही है। हीर को इस तरह जोगी के जादू में आते देख सेहती को गुस्सा आया। वह जोगी पर बरसते हुए हीर से बोली, ‘बहन, जोगियों पर भरोसा मत करो। ये झूठे मक्कार होते हैं। इस बदमाश जोगी पर तो हम बिल्कुल भी भरोसा नहीं कर सकते।’

रांझा ने जवाब दिया, ‘तुमको तो जोगी के पैर पकड़कर आशीर्वाद मांगना चाहिए। इसके बदले तुम लड़ रही हो।’ सेहती ने कहा, ‘ज्यादा बोलोगे तो मैं तुम्हारा मुंह तोड़ दूंगी।’

सेहती और रांझा में तू तू मैं मैं होने लगी। दोनों को झगड़ते देख हीर ने रांझा को इशारा किया कि वह झगड़ा बंद करे और सेहती से भी यही कहा। यह बात सेहती को बुरी लगी। उसने हीर से कहा, ‘हाय हाय, सैदा की दुल्हन पर तो जोगी ने प्यार का जादू कर दिया है।’ इस पर हीर भी गुस्सा हो गई। बोली, ‘सेहती, तुम सब नौजवानों से लड़ती रहती हो। इस फकीर को भी बुरा भला कह रही हो। पति के लिए बहुत तरस रही औरतें ही ऐसा करती हैं।’ इस पर सेहती बोली, ‘बहन, तुम तो इस दुष्ट का पक्ष लेकर मेरी हत्या कर रही हो। या तो यह जोगी ही तुम्हारा आशिक है या तुम्हारे आशिक की कोई खबर लाया है।’

इस पर हीर कहने लगी, ‘हां सेहती, तुम तो दूध की धुली हुई हो और मुझे बुरा ठहरा रही हो। तुम बहुत ही घटिया औरत हो।’ यह सुनते ही सेहती आपा खो बैठी। उसने एक नौकरानी से कहा, ‘इस फकीर को कुछ देकर भगा दो।’ नौकरानी ने थोड़ा सा चावल दिया और उसे जाने को कहा। अब रांझा का गुस्सा फूटा, ‘यह तुम चिड़ियों का खाना जितना चावल दे रही हो। तुमने फकीर का अपमान किया है। अब तुमको इसका दंड झेलना होगा।’ इस पर सेहती आई और फकीर के कटोरे में उसने कुछ और सामान फेंका। कटोरा फकीर के हाथ से छूटकर गिरा और टूट गया।

जोगी चिल्लाने लगा, ‘तुम्हारे सर पर कयामत आए। तुमने फकीर का कटोरा तोड़ दिया। तुम्हें कोई प्यार करने वाला न रहे। यह कटोरा मुझे मेरे पीर ने दिया था। तुम क्या जानो इसकी कीमत मेरे लिए क्या है। तुमको खुदा का खौफ नहीं है।?’ जोगी कटोरे का टुकड़ा बटोर रहा था। सेहती ने उसे कहा कि कटोरा उसने नहीं तोड़ा। वह तो दुर्भाग्य से टूट गया। ‘तुम जाओ, कुम्हार से नया कटोरा बनवा लेना। दुर्भाग्य से कोई बच नहीं सकता। आदम हव्वा नहीं बच पाए और जन्नत ने निकाले गए तो जोगी तुम किस खेत की मूली हो?’

हीर ने सेहती से कहा, ‘यह क्या तरीका है किसी से बात करने का। क्यों इस फकीर से लड़ रही हो जो बस भोजन के सहारे जिंदा रहता है। क्यों तुमने उसका कटोरा तोड़ दिया और मेरे दरवाजे पर उसको अपमानित कर रही हो। क्यों इस घर की खुशी में तुम और आग लगा रही हो जबकि तुम जानती हो कि मेरा दिल किसी के प्रेम की आग में ऐसे ही जल रहा है।’

अब सेहती हीर पर टूट पड़ी, ‘हां हां, सारा घर तो तुम्हारा ही है। हम कौन होते हैं इस घर में। तुम्हारे बाप ने तो इस घर को तुमको खरीदकर दिया है। बदचलन औरत, तुम शादीशुदा होकर भी मर्दों के पीछे भागती हो। अपने पति सैदा के बारे में अब तक तुम्हारे मुंह से एक बोल नहीं फूटे होंगे और इस जोगी से बहुत तुम्हारी बन रही है।’

हीर ने जवाब दिया। ‘तुमको लड़ने के लिए यह जोगी ही मिला। तुम जिंदगी में कभी किसी के साथ खुश नहीं रह सकती। जोगी से झगड़ा करने से शामत आ सकती है। अगर इसने शाप दिया तो हम बरबाद हो जाएंगे। सिकंदर भी फकीर के पैर छूते थे। जोगी से माफी मांग लो वरना वह हमारे ऊपर कयामत ला देगा।’

सेहती हीर की बातों से नहीं डरी। ‘इस जोगी ने मुझे ताना दिया, बुरा भला कहा। मैं और बरदाश्त नहीं कर सकती। अब या तो मैं जहर खा लूंगी या इस जोगी को मार डालूंगी या तुमको नहीं छोड़ूंगी। मैं तुम्हारे चाल चलन के बारे में अपने भाई सैदा और मां को सब कुछ बता दूंगी कि किस तरह तुम अब भी चरवाहे के इश्क में मरी जा रही हो।’ इसके बाद सेहती एक डंडा लेकर जोगी की तरफ लपकी और उसे पीटने लगी। उसने जोगी का सर फोड़ दिया। वहां हो रहे शोर को सुन आसपास की महिलाएं भी आ गईं और सबने मिलकर रांझा को वहां से धक्का देकर निकाल दिया।

रांझा वहां से जाते जाते खुदा से कह रहा था, ‘क्यों मुझे तुमने हीर से मिलाकर जुदा कर दिया। मैं क्या पाप किया है जो पहले तुमने जन्नत दिखाई और अब मुझे जंगल में भटकना पड़ रहा है। मैं अपने प्रेम को पाने के लिए आखिर क्या करूं।’ रांझा सेहती से बदला लेने की बात सोचता हुआ चला गया। कहानी आगे पढ़ें।

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हीर रांझा 28 – रंगपुर पहुंचा रांझा, हीर से हुई पहली मुलाकात

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जोगी बनने के बाद रांझा बालनाथ को अलविदा कह टिल्ला से रंगपुर की तरफ चला। रांझा का नस नस प्रेम में डूबा हुआ था। वह जब रंगपुर के इलाके में पहुंचा तो वहां कुएं से पानी ले जाने वाली औरतों को उस पर शक हुआ। उन्होंने आपस में कहा, ‘यह जोगी तो हीर का प्रेमी रांझा लग रहा है।’ लेकिन औरतों ने रांझा से कुछ नहीं कहा।

रंगपुर में रांझा घर घर जाकर भीख मांगने लगा। धीरे धीरे वहां उस जोगी की तरफ सब खिंचने लगे। सब अपना दुखड़ा लेकर फकीर रांझा के पास आने लगे। सैदा की बहन सेहती तक यह बात पहुंची तो वह हीर से जाकर बोली, ‘बहन, इस जोगी का रूप तो चांद की तरह है। लेकिन ऐसा लगता है जैसे उसका कुछ खो गया है, जिसे वह तलाश रहा है। वह जोर जोर से कहता रहता है, ‘मेरे यार, खुदा तुम्हारे साथ हो।’ शायद किसी प्रेमी के लिए वह यह दुआ करता है। कुछ लोग कह रहे हैं कि वह तुम्हारे गांव सियाल से आया है। कोई कह रहा है कि वह तख्त हजारा से आया है। कोई कह रहा है कि वह जोगी नहीं है, हीर के लिए उसने यह वेश बना लिया है।’

इस पर हीर ने जवाब दिया। ‘तुम इस बारे में मुझसे कोई बात मत करो। तुम्हारी बातों से ऐसा लग रहा है, वह रांझा ही है। उसके प्यार ने मेरा जीवन ऐसे ही बरबाद कर दिया है। वह क्या मुझे मौत देने आया है। आखिर फकीर बनकर उसे क्या मिलेगा?’ हीर की आंखों से आंसू झरने लगे। ‘उसे किसी तरह यहां ले आओ। मैं भी देखूं कि वह कौन है और क्यों फकीर बन गया है।’

हीर का दिल रांझा को देखने के लिए बेचैन हो गया। वह जुदाई बरदाश्त नहीं कर पा रही थी। वह रांझा से मिलने का रास्ता तलाशने लगी। उधर रांझा भी हीर के दरवाजे पर भीख मांगने जा पहुंचा। उसने जोर से कहा। ‘फकीर को भिक्षा दो।’

सेहती घर से निकल कर आई। ‘जोगी, तुम्हारे पास तो बहुत ताकत होगी। क्या तुम दुल्हन हीर की बीमारी पहचान कर उसे ठीक कर सकते हो। वह दिन पर दिन कमजोर होती जा रही है।’ इस पर रांझा ने कहा, ‘देर न करो, उसे जल्दी यहां लाओ, मैं भी देखूं कि उसे क्या हुआ है?’ सेहती उधर हीर को बुलाने चली गई, इधर हीर खुद ही बाहर निकल आई। लेकिन वह परदे के भीतर ही रही। परदे के पीछे से हीर बोली, ‘जोगी, यहां से चले जाओ, क्यों कोई अपने दिल का दर्द किसी जोगी, अजनबी या मूर्ख को बताए।’

जोगी बोला, ‘मैं खुदा का बंदा हूं। यह फकीर दो बिछड़े प्रेमियों को मिला सकता है। खोए हुए दोस्तों को वापस ला सकता है। ऐसे फकीरों को जाने को कहना ठीक नहीं।’ हीर ने जवाब दिया, ‘यह सच नहीं है जोगी। जुदा हो चुके दो दिलों को कोई नहीं मिला सकता। मैंने बहुत तलाशा लेकिन ऐसा कोई न मिला जो यह काम कर सके।’

इस पर जोगी ने कहा, ‘तुमको अपने आशिक को खोजने बाहर जाने की जरूरत नहीं है। वह तो तुम्हारे घर में ही है। परदा हटाकर देखो अगर तुमको अपना खोया प्रेमी न दिखे तो फिर कहना।’

हीर ने परदा हटा दिया। उसने जोगी को देखा और देखती रह गई। वह उसका खोया रांझा था। उसने धीरे से कहा, ‘हमारे बारे में सेहती को पता न चले।’ जोगी बोला, ‘ऐ खेराओं की बहू, चिंता न करो। ऐसा कुछ नहीं होगा। बस अपने यार का ख्याल रखना।’ कहानी आगे पढ़ें।

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हीर रांझा 27 – बालनाथ के पास जाकर जोगी बना रांझा

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रांझा जोगी बनने टिल्ला की पहाड़ियों की ओर चला जहां जाने माने फकीर बालनाथ रहते थे। रांझा ने खुद से कहा, ‘बालनाथ जरूर मुझे मुक्ति का मार्ग दिखाएंगे।’ कई दिनों की यात्रा के बाद रांझा टिल्ला पहुंचा और वहां बालनाथ के आगे जाकर सिर झुका लिया। वहां पर पहले से बहुत सारे चेले बैठे थे। वे सब ईश्वर की प्रार्थना कर रहे थे और गीता भागवत महाभारत पढ़ रहे थे।

रांझा ने बालनाथ से फकीर बनने की इच्छा जाहिर की। उसने कहा, ‘मुझे अपना चेला बना लीजिए और आप मेरे पीर बन जाइए।’ बालनाथ रांझा की बात सुनते रहे और उसे ध्यान से देखते रहे। उन्होंने कुछ देर सोचा और फिर कहा, ‘तुमको देखकर मुझे ऐसा लग रहा है कि तुम सांसारिक हो और मालिक बनने की योग्यता रखते हो, सेवक नहीं। तुमको दुनिया में लोगों के बीच रहकर ही काम करना चाहिए। तुम्हारे अंदर ऐसा फकीर नहीं दिख रहा जिसका आदेश सब माने। फकीर बनने के लिए पवित्र आत्मा के साथ साथ पूर्ण समर्पित होने की भावना भी जरूरी है। तुम सजते संवरते हो, बांसुरी बजाते हो, स्त्रियों पर टकटकी लगाते हो। तुम एक गुरू को धोखा नहीं दे सकते। मुझे सच सच बताओ। ऐसा क्या हो गया तुम्हारे साथ कि सारा सुख भोग छोड़कर फकीर बनना चाहते हो। फकीरी का रास्ता बहुत दुखभरा है।’

बालनाथ बोलते रहे, ‘फकीर बनोगे तो वैसा कपड़ा पहनना पड़ेगा। भीख मांगना पड़ेगा। तुम जिंदगी की खुशी और अपनों की मौत का गम नहीं मना सकोगे। स्त्रियों की तरफ नजर नहीं उठा सकोगे। दुनिया को तुमको माया समझना होगा। धार्मिक यात्रा पर जगन्नाथ, गोदावरी, गंगा, जमुना के तट पर जाना पड़ेगा। जोगी बनना आसान नही है। तुम जाट जोग नहीं पा सकते।’

रांझा ने बालनाथ की सारी शर्तों को स्वीकार करने का वचन दिया। कहा, ‘मुझे आप जोगी बनाइए। मैं फकीरी के सागर में डुबकी लगाना चाहता हूं। मैं दुनिया के सारे सुखों का त्याग कर दूंगा। आप अपनी शरण में आए हुए का दिल नहीं तोड़ सकते।’ बालनाथ फिर भी आश्वस्त नहीं हुए। वह शंका करते रहे। उन्होंने कहा, ‘जोग उसी के लिए जिसे मौत से प्यार हो। इसके लिए अपने जुनून पर नियंत्रण के साथ बहुत धैर्य चाहिए। जोग का मतलब जिंदा रहते भी मरे हुए इंसान की तरह जीना। अपने शरीर की बांसुरी से उस ईश्वर के गीत गाना। जहां अहंकार को खत्म करना होता है। यह बच्चों का खेल नहीं है। मैं फिर कह रहा हूं तुम जोगी नहीं बन सकते। इसलिए इस बारे में और ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है। देखो बच्चे, ईश्वर हर जगह उसी तरह है जैसे माला के मोतियों में धागा रहता है। वह जिंदगी की हर शै में सांस लेता है। वह दुनिया के हर रंग में है। वह मेंहदी में भी है और बदन के लहू में भी।’

बालनाथ के इतना समझाने पर भी रांझा जिद पर अड़ा रहा और जाने से इंकार कर दिया। उसने बालनाथ से कहा ‘आपको देखकर मेरी आत्मा पर से बोझ हट गया है। मैं संसार का सुख त्यागकर यह दुख उठाने को तैयार हूं।’ अब बालनाथ पिघल गए।

जब चेलों ने बालनाथ को रांझा की बातों से पिघलते देखा तो वह ताना देने लगे, ‘आप इस जाट को जोगी बनाना चाहते हैं जबकि इतने सालों से जो आपसे जोग पाने के लिए दुख उठा रहे हैं उनकी तरफ आप ध्यान नहीं देते।’ रांझा ने उन सबको समझाने की कोशिश की, ‘देखिए,आप सब मेरे लिए बालनाथ के समान हैं। आप सब मेरे भाई हैं। आप लोगों की मदद से ही मैं मुक्ति पाने की कामना करता हूं।’

इस पर चेलों ने कहा, ‘देखो बच्चे हम अठारह साल से भीख मांगकर बालनाथ की सेवा कर रहे हैं। दिन रात ईश्वर को याद करते हैं। फिर भी इन्होंने अब तक हमें जोगी नहीं बनाया। वह कभी आग बन जाते हैं तो कभी पानी। हम आज तक बालनाथ के रहस्य को नहीं समझ पाए।’ अब बालनाथ के खिलाफ चेलों ने विद्रोह कर दिया। उन्होंने जोगी बनने का रास्ता छोड़ने का फैसला किया और वहां से जाने लगे। वह बालनाथ को बुरा भला भी कह रहे थे। इस पर बालनाथ भी गुस्सा हो गए। उनकी आंखें क्रोध से लाल हो गईं। उनका यह रूप देखकर चेलों के होश उड़ गए। वह उनके आगे नतमस्तक हो गए। उनके दिमाग में सारी बुरी बातें जलकर राख हो गईं।

गुरू बालनाथ ने रांझा के शरीर पर राख मल दिया और गले से लगा लिया। रांझा के कानों में बालियां पहनाई गईं। उसके हाथ में अब भीख का कटोरा था। बालनाथ ने उसे जोगी बना दिया। लेकिन बालनाथ की एक बात पर रांझा भड़क गया। बालनाथ ने कहा, ‘दुनिया की औरतों को गलत निगाह से कभी मत देखना। उन्हें मां बहन मानना।’ अब रांझा तो हीर को पाने के लिए जोगी बना था, वह बालनाथ की यह बात नहीं मान सकता था।

रांझा ने कहा, ‘आपकी यह बात मैं गले से नहीं उतार सकता। एक नौजवान पर आप अपनी हर बात थोप नहीं सकते। किसने आपको यह सिखाया है?’ बालनाथ इस पर गुस्से में बोले, ‘देखो तुमने जोग का रास्ता चुना है इसलिए सारे अपवित्र विचार तुमको त्यागने होंगे। फकीरों को बदनाम मत करना।’

अब रांझा बोला, ‘ईश्वर के प्रेम में जब कोई जोगी बन जाता है, दुनिया छोड़ देता है तो मैं हीर के प्रेम में ऐसा क्यों नही कर सकता। मैं हीर के इश्क में फकीर बना हूं ताकि उसके सिवा किसी और का ख्याल न कर सकूं। अगर मुझे पता होता कि तुम मुझे मेरी हीर को भुलाने को कहोगे तो मैं तुम्हारे पास इतनी दूर चलकर कभी न आता।’

बालनाथ रांझा की बात सुनकर उदास हो गए। कहा, ‘मैंने तुमको जोगी बनाकर भूल कर दी। रांझा! बुरे विचारों को छोड़कर सच्चे फकीर बनो।’ इस पर रांझा ने भी हीर से अपनी दीवानगी भरी मोहब्बत से फकीर बनने तक का किस्सा सुना दिया। ‘मैंने हीर के लिए घर संसार सब छोड़ दिया। हम दोनों प्यार करते हैं लेकिन खेरा हीर को छीन ले गए। मुझे हीर से जुदा कर दिया, मुझे दुनिया में उसके सिवा कुछ नहीं चाहिए। मेरे पास हीर नहीं रही तो मैं फकीर बन गया हूं।’

रांझा बालनाथ से कहने लगा, ‘आप सच्चे गुरू मिले। आपने मुझे जोगी बनाया। एक भटके हुए नाव को किनारा दिया। अब मुझे हीर से मिला दीजिए। मैं बस इतना ही चाहता हूं। मुझे भीख में बस हीर चाहिए, और कुछ नहीं।’ अब बालनाथ समझ गए कि रांझा इश्क में घायल होकर यहां आया था और वह हीर की तलाश कभी छोड़ नहीं सकता। बालनाथ ने ईश्वर से रांझा के लिए प्रार्थना की, ‘हे ईश्वर, जमीं आसमां के मालिक, रांझा ने हीर के इश्क में अपना सब कुछ त्याग दिया और फकीर बना है। उसको जो चाहिए, उसे दे दो।’

बालनाथ ने रांझा को विदा करते हुए कहा, ‘रांझा, जाओ, ईश्वर तुम्हारी सारी इच्छा पूरी करेंगे। जाओ, खेराओं से लड़कर अपनी हीर को हासिल करो।’ कहानी आगे पढ़ें।

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हीर रांझा 26 – हीर का संदेशा मिलते ही रांझा जोगी बनने चला

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देखते देखते एक साल गुजर गए। हीर ससुराल में उसी तरह उदास रहती थी। रंगपुर की एक महिला मायके सियाल जा रही थी। वह हीर से बोली कि अगर माता पिता को कुछ संदेशा भेजना हो तो वह पहुंचा देगी। ‘मुझे बताओ, पति के साथ तुम्हारा रिश्ता कैसा चल रहा है, मैं तुम्हारा सारा हाल तुम्हारे मां बाप तक पहुंचा दूंगी।’

हीर ने कहा, ‘पति तो मेरे लिए कांटों की सेज है। मेरी किस्मत खराब है। मैं कर ही क्या सकती हूं। मेरे घरवालों को हाथ जोड़कर मेरा सलाम कहना। उनको बताना कि उन्होंने अपनी बेटी को दुश्मनों के हाथ में सौंप दिया है। तुम रांझा से मिलकर कहना कि मेरे पास चला आए वरना मेरी जान निकल जाएगी। मैं उससे मिलने की रोज दुआ करती हूं।’

वह महिला सियाल गई तो उसने रांझा को खोजना शुरू किया। उसने वहां लड़कियों से पूछा, ‘वो लड़का कहां गया जो चूचक के पशुओं को चराता था। वह जो तख्त हजारा से आया था। वो रांझा जिसकी हीर को खेरावाले छीन ले गए और जो प्यार में पागल बना फिरता है।’

लड़कियों ने जवाब दिया, ‘उसने तो संसार त्याग दिया है। वह जंगल में भटकता फिरता है। कोई उससे बात नहीं करता। तुमको वह मिल जाएगा। तुम ही उससे बात करना। हम सबका उस पर कोई वश नहीं है।’

आखिरकार उस महिला ने रांझा को खोज लिया। उसने कहा, ‘हीर तुम्हारे लिए मरी जा रही है। उसकी अंतिम सांसें उसके होठों पर अटकी हुई है। तुमने उस पर जादू कर दिया है। वह अपने पति से बिल्कुल प्यार नहीं करती। सैदा ने उसको खुश करने की बहुत कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाया। वह सैदा को अपने पास फटकने तक नहीं देती। वह रातों को तारे गिनते हुए तुम्हारे बारे में सोचती रहती है। तुम जोगी बनकर रंगपुर जाओ और उससे मिलने की कोशिश करो। खुदा ने चाहा तो तुम लोगों का मिलन होकर रहेगा।

रांझा ने जब हीर का संदेशा सुना तो उसका सारा दर्द खुशी में बदल गया। उसने अपना संदेशा पत्र में लिखकर हीर तक पहुंचाने के लिए उस महिला को दिया। पत्र में लिखा, ‘हीर मैं कैसे कहूं कि तुमसे जुदाई को मैं कैसे सह रहा हूं। तुमको तो नया घर मिला। लेकिन मैं जलते अंगारों पर चलता हूं और कांटों पर सोता हूं। प्रेम की अगन एक बार लग जाती है तो जमीं आसमा जल जाते हैं। तुमने मुझे अपने करीब लाने के लिए घर वालों को धोखे में रखकर नौकरी पे रखवाया। तुम औरतें इतनी चतुर होती हो कि आसमान के सितारे भी तोड़ लाती हो। मेरा अब कोई ख्याल नहीं रखता और तुमने भी मुंह फेर लिया है। मेरी जिंदगी से मोर उड़ चुके हैं और उल्लुओं के बीच मैं रह रहा हूं।’ इस तरह रांझा ने पत्र में हीर से खूब दिल खोलकर शिकायतें लिखीं।

रांझा के दिल में प्यार की शहनाइयां बजने लगीं। वह हीर से मिलने को बेचैन हो गया। वह सोचने लगा, ‘गहरे नदी में पानी की लहरें कितनी ही तेज हों, कश्ती को तो उस पार जाना ही होगा। हीर से मिलने के लिए जान भी देनी पड़े तो वह मंजूर है। मैं अपने शरीर पर राख मलकर जोगी बनकर उससे मिलने जाऊंगा। मैं किसी फकीर को खोजने निकलता हूं जो मेरा भाग्य बदल दे।’ कहानी आगे पढ़ें।

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हीर रांझा 25 – ससुराल में उदास हीर, दर दर भटका रांझा

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धोखे से शादी कराने के बाद हीर को अब डोली में बैठने के लिए मजबूर किया गया। खेरा उसे सियाल से रंगपुर उसी तरह ले चले जैसे चोर पशुओं को चुरा कर ले जाता है। डोली में बैठी हीर रांझा के लिए रोए जा रही थी, ‘मेरे रांझा, आज खेरा के लोग तुम्हारी अमानत को लूटकर ले जा रहे हैं। सियालों की जो तुमने अब तक सेवा की उसके बदले तुम्हें यह सिला मिला। अब तुमसे दूर जा रही हूं तो तुम्हारी देखभाल कौन करेगा? तुम दुखी और अकेले होकर भटकते फिरोगे। ओ रांझा, जमीं आसमा हमारा दुश्न हो चुका है और मौत देने पर तुला है।’

इस तरह रांझा से जुदा होकर हीर विलाप किए जा रही थी। हीर को पालकी में लेकर लौटती बारात जंगल तक पहुंची तो सभी कुछ खाने पीने सुस्ताने के लिए वहीं रुक गए। लोग शिकार पर जाने की भी तैयारी करने लगे। रांझा भी हीर की बारात का पीछा करते हुए जंगल में ही था। उसका दिल दर्द से फटा जा रहा था।

शिकार को लोगों ने जंगल में ही आग में भूना और खाते हुए सभी जश्न मनाने लगे। इस बीच मौका देखकर हीर ने रांझा को पालकी के पास बुलाया और गले से लगा लिया। किसी की नजर दोनों पर पड़ गई और उसने जाकर सबको बताया। सभी रांझा को पकड़ने के लिए लपके लेकिन हीर ने सबको रोक दिया। उसने कहा कि रांझा को उसने किसी काम से बुलाया था और किसी ने उसे हाथ लगाया तो वह जहर खा लेगी। खेरा वाले चुप रह गए।

बारात जंगल से चली और रंगपुर पहुंची। वहां दुल्हन के स्वागत के लिए महिलाएं पहले से इंतजार कर रही थीं। गीत गाते हुए लड़कियों ने पालकी का पर्दा हटाया। हीर को घर के अंदर ले जाया गया। सास और ननद हीर के बगल में आकर बैठी। लोग उपहार देने आने लगे। इतनी खूबसूरत बहू लाने के लिए सास को बधाइयां मिलने लगीं।

रांझा भी रंगपुर पहुंचा। हीर और रांझा के दिल में कैसा हंगामा मचा था इसे सिर्फ वही दोनों जान रहे थे। रांझा चुपके से हीर के पास पहुंचा लेकिन हीर ने इसका विरोध किया। हीर ने कहा कि किस्मत उन दोनों के साथ नहीं है और वह रांझा के लिए कुछ नहीं कर सकती। इस पर रांझा हीर को उलाहना देने लगा। कहने लगा कि हीर ने पहले उसको प्यार के लिए बढ़ावा दिया और अब वह उसे छोड़ रही है। इस पर हीर उसे समझाने लगी कि दोनों का प्यार हमेशा रहेगा।

हीर ने रांझा से वादा किया कि वह कभी सैदा की नहीं हो सकेगी। अगर कभी वह उसके पास आया तो वह मुंह फेर लेगी। ‘सुनो रांझा, मैं तुमसे मिलती रहूंगी। मेरे पास एक योजना है। मैं तुमको जब जब बुलाऊंगी, तुम फकीर के वेश में मुझसे मिलने आना। तुम फकीर बनकर इसी गांव में रहो। तुम मुझे देख पाओगे और मैं तुमको। देखो, अगर तुम इस जगह से जाओगे तो मैं मर जाऊंगी।’

रंगपुर की महिलाओं ने जब हीर को उदास रहते देखा तो वह बहुत नाराज हुईं। दुल्हन के आने की खुशी में किए जा रहे रीतियों में भी हीर कोई खुशी नहीं दिखा रही थी। हीर की आंखों से आंसू टपकते रहते थे। इधर काजी चूचक को बता रहा था, ‘तुम्हारी खुशनसीबी कि सारी मुसीबतें एक साथ टल गईं। हीर ससुराल चली गई। सियाल में भी अब शांति है। रंगपुर भी चहक रहा है। और रांझा पर अब कोई ध्यान नहीं देता।’

तख्त हजारा में रांझा के भाइयों और भौजाइयों को जब उसकी कहानी के बारे में पता चला तो वे उस पर हंस रहे थे। उन्होंने बुलावा भेजा, ‘रांझा, घर लौट जाओ। दुनिया की कोई लड़की वफादार नहीं होती। खेराओं ने उस फूल को तोड़ लिया जिसे तुमने बाघ सिंहों से भरे जंगल में खिलाया था। जिसकी रक्षा में तुम इतने दिन लगे रहे और अब भटक रहे हो। हम तुम्हारी खुशी के लिए सब कुछ करेंगे। आ जाओ।’

रांझा ने जवाब दिया, ‘जब पतझड़ आता है तो गाने वाली चिड़िया आशा पर जिंदा रहती है कि बहार फिर आएगी। जब बाग सूख जाता है तो बुलबुल जंगल में भटकती फिरती है कि कहीं उसके लिए कोई फूल जरूर खिला होगा। सच्चा प्यार करने वाले कभी हार नहीं मानते।’ भौजाइयों को जब रांझा का संदेशा मिला तो वह समझ गईं कि वह अब कभी वापस नहीं लौटेगा।

रांझा फकीर बन गया। उसने कान छिदवा लिए और कसम खायी कि या तो वह हीर को कैद से निकालेगा या मिट जाएगा। उधर, ससुराल में हीर ने गहना श्रृंगार त्याग दिया था। वह ठीक से खाना भी नहीं खाती थी और हमेशा रांझा को यादकर रातों को जागती रहती थी।

हीर की ननद का नाम था सेहती। वह हीर से कहती, ‘भाभी, किसने काला जादू कर दिया है तुम पर। तुम दिन पर दिन कमजोर होती जा रही हो। तुम्हारी खूबसूरती मुरझाती जा रही है। तुम सूखी टहनी बन गई हो और बदन की हड्डियां निकल आई हैं। इतनी उदास क्यों रहती हो तुम? मुझे अपना कष्ट बताओ। हो सकता है, मैं तुम्हारी मदद कर सकूं।’ तब हीर ने ननद सेहती को रांझा से इश्क और धोखे से हुई शादी की सारी कहानी बताई। सेहती ने हीर के दर्द को समझा। उसने कहा, ‘मेरा भी एक प्रेमी है। मुराद बख्श नाम है उसका। ऊंट की देखभाल करता है। हम दोनों मिलकर तुम्हारे लिए जो कर सकते हैं, करेंगे।’

अब तक हीर ने सैदा को पास नहीं आने दिया था। एक रात सैदा बहुत खुश होता हुआ हीर के बिस्तर पर गया। लेकिन हीर ने उसे झिड़क दिया। सैदा नहीं माना। वह हीर से जबरदस्ती करने पर उतारू हुआ। तब हीर पांचों पीरों को बुलाने के लिए प्रार्थना करने लगीं। तभी वहां पीर प्रकट हुए तो हीर ने कहा, ‘मुझे बचा लीजिए, मैं रांझा के सिवा किसी और की नहीं हो सकती।’ पीरों ने सैदा के हाथ पैर बांध दिए। सैदा गिड़गिड़ाकर माफी मांगने लगा। ‘मुझसे भूल हो गई। मुझे माफ कर दीजिए।’

हीर दूसरे दिन नहाने के बाद सिर झुकाए उदास बैठी थी। अचानक सोचती सोचती वह जाने कहां खो गई। वह पीरों का ध्यान करने लगी। पीर उसके ध्यान को देखकर रह नहीं पाए और फिर उसके पास आए। उन्होंने पूछा, ‘बेटी, उठो, कौन सा दुख तुमको खाए जा रहा है।’

हीर बोली, ‘आपने रांझा से मुझे मिलवाया। उसका प्यार दिलाया। मैं रांझा की याद में पागल हो रही हूं। खत्म होती जा रही हूं। खुदा ने आपको इश्क का मददगार बनाया है।’ इस पर पीरों के दिल में हीर के लिए करुणा उमड़ पड़ी और उन्होंने हीर से कहा, ‘उदास मत हो। वह तुमसे जल्दी ही मिलने आएगा। यही खुदा की इच्छा है।’ कहानी आगे पढ़ें।

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हीर रांझा 24 – काजी ने जबरदस्ती कराया सैदा से ब्याह

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रंगपुर में खेराओं ने ब्राह्मणों को ब्याह का मुहूर्त निकालने को कहा। ब्राह्मणों ने सावन महीने के एक गुरुवार को शादी की तारीख तय कर दी। चूचक के घर भी हीर की शादी की तैयारियां जोर शोर से चल रही थीं। बेटी की शादी और दहेज में कोई कमी न रह जाए इसके लिए चूचक दौलत पानी की तरह लुटा रहा था।

गुरुवार को रंगपुर से खेराओं की बारात चली। दूल्हे का नाम सैदा था। सियाल में बारातियों का जुलूस देखने के लिए लोग उमड़ पड़े। खेरा पैसा फेंक रहे थे। बारातियों को मेहमानघर में ठहराया गया और उनका स्वागत सत्कार किया जाने लगा। उधर हीर को लेने आई बारात और शादी के जश्न को देखकर रांझा का दिल दुख से भर आया था।

रांझा मन ही मन कह रहा था, ‘सैदा तो आज बिन पिए ही नशे में लग रहा है, वह नवाब बन गया और हीर उसकी रानी। चरवाहे रांझा को कौन पूछता है? हीर के बिना इस जिंदगी के लिए मौत बेहतर है।’ कुछ लोगों को रांझा से हमदर्दी भी हो रही थी। वे हीर के पिता चूचक को कोस रहे थे।

बारात हीर के दरवाजे पर पहुंची। जमकर आतिशबाजियां हो रही थीं। दूल्हा और दुल्हन को निकाह के लिए लाया गया। लड़कियां दूल्हे को छेड़ने लगीं। काजी दो गवाहों के साथ आया और निकाह पढ़वाने बैठा। लेकिन हीर ने निकाह पढ़ने से इंकार कर दिया। बोली, ‘क्यों मेरा दिमाग खराब कर रहे हो। मैं रांझा को छोड़ नहीं सकती। तुम्हारे जैसा काजी क्या जाने इश्क और सच्चा मजहब क्या होता है। काजी, तुमको खुदा नरक के कुएं में फेकेगा।’

हीर की बात सुनकर काजी डांट डपट पर उतर आया। ‘तुम मजहब मुझे सिखा रही हो। अगर जिंदा रहना चाहती हो तो जैसा मैं कह रहा हूं वैसा करो।’ हीर ने जवाब दिया, ‘मैं खुदा के दरबार में रो रोकर कहूंगी कि मेरी मां ने मुझे धोखा दिया, रांझा से जुदा कर दिया।’ इस पर काजी बोला, ‘घमंडी लड़की, मां बाप को कोस रही हो। मजहब में सब लिखा है कि मां बाप की मर्जी से ही निकाह करवाया जाता है।’

हीर बोली, ‘मेरे दिल में रांझा बसता है, इस पर सैदा का अधिकार नहीं हो सकता। मैं अगर रांझा को भुला दूंगी तो खुदा को क्या जवाब दूंगी।’ इस पर काजी हीर पर और दवाब डालने की कोशिश करने लगा। ‘तुम्हारा और रांझा का निकाह किसने करवाया। कौन गवाह है? बिना गवाह के कोई शादी वैध नहीं हो सकती। मजहब में साफ साफ लिखा है कि निकाह कैसे होता है?’

अब हीर ने काजी से सवाल पूछा, ‘किसने तुमको यह नियम कानून पढ़ाया है। तुमको कुछ भी आता जाता नहीं है। खुदा ने रांझा से मेरी शादी कराई है। सितारे और फरिश्ते उसके गवाह रहे हैं।’ काजी पूरी कोशिश करता रहा कि हीर सैदा से निकाह को मान जाए लेकिन वह नहीं मानी और लगातार यही कहती रही कि वह रांझा के सिवा किसी और को अपना पति नहीं मान सकती।

चूचक ने काजी से कहा, ‘सुनो काजी, दरवाजे पर बारात है और अगर यह शादी नहीं हुई तो सियालों के मुंह पर कालिख पुत जाएगी। मेरे रिश्तेदार लगातार पूछ रहे हैं कि शादी में देर क्यों हो रही है। मैं तुम्हारे सिवा किसी और पर भरोसा नहीं कर सकता। किसी तरह यह शादी करा दो, इसके बदले तुम जो मांगोगे वह दूंगा।’

काजी ने दुष्टता से कहा, ‘बिना धोखा के कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। बुलाओ सबको। मैं यह शादी करा के दम लूंगा। अगर रांझा बीच में आया तो उसे जलाकर मार दिया जाएगा।’ काजी को खुदा का डर ना रहा। धोखे से उसने शादी संपन्न करा दिया। हीर ने काजी से कहा, ‘खुदा तुमको इस पाप की सजा देगा झूठे, मक्कार। खुदा उन सभी काजियों पर कहर बरपाएगा जो घूस लेकर ऐसी नीच हरकत करते हैं।’

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हीर रांझा 23 – दोनों के प्रेम का भेद खुला, शादी का प्रस्ताव लेकर आए खेरा

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जंगल में हीर और रांझा के होने की बात कैदु ने जाकर गांववालों को बताई और साथ चलने को कहा। हीर का पिता चूचक उसकी बात सुनकर ताव में आ गया। उसे लगा कि गांव वालों के सामने उसे जलील होना पड़ा है। भाला लेकर वह घोड़े पर चढ़ा और तेजी से जंगल की ओर चला।

जंगल चूचक के घोड़े की टापों से थर्रा उठा। हीर को अहसास हो गया उसके पिता आ रहे हैं। उसने रांझा से कहा, ‘उठो, पिताजी आ रहे हैं।’ वह रोने लगी, ‘मैं फिर तुमसे मिलने नहीं आ पाऊंगी, मुझे माफ कर देना।’ और वह रांझा के पास से हट गई।

जंगल में हीर रांझा को अकेले पाकर चूचक गुस्से में जलने लगा। उसका दिल शर्मिन्दगी से भर गया। वह चिल्लाया, ‘ये देखो, लड़की तो जंगल में अकेली घूम रही है। मैं तुम्हारा सर काट दूंगा तभी तुम्हारा यह खेल रुकेगा।’

हीर रांझा से कहने लगी, ‘तुम भैंसों को यहीं छोड़ दो और अपने घर लौट जाओ। अब तुम्हारे लिए कोई खाना नहीं लाएगा, तुम्हारी देखभाल यहां कोई नहीं करेगा। पिताजी, जो कुछ भी हुआ उसके लिए मैं माफी चाहती हूं। मैं आपकी प्यारी बेटी हूं और यह ठीक नहीं है कि मेरी वजह से आपकी और बदनामी हो।’ चूचक गुस्से में वहां ऐसे खड़ा था जैसे भांग के नशे में हो। चूचक ने हीर की शादी करने की ठानी।

रांझा के चरवाहे बनने की खबर तख्त हजारा में उसके घर तक पहुंची तो उसके भाई और भौजाई उसे वहां से ले जाने के लिए चिट्ठी पर चिट्ठी लिखने लगे। जब चूचक को पता चला कि रांझा तख्त हजारा के मौजू चौधरी का बेटा है तो वह उलझन में पड़ गया। उसने रांझा को वापस तख्त हजारा नहीं भेजा। रांझा भी वहां जाना नहीं चाहता था।

चूचक हीर की शादी के लिए बेचैन रहने लगा। वह हमेशा इसी के बारे में सोचता रहता। उसने अपने सगे संबंधियों और जाति के लोगों को हीर के लिए रिश्ता खोजने को कहा। वह फैसला नहीं कर पा रहा था कि हीर की शादी रांझा से कर दे या किसी और से।

बदनामी को खत्म करने के लिए यह शादी जल्दी होनी थी। रांझा से शादी की बात पर चूचक के रिश्ते के लोग तैयार नहीं हुए। वे कहने लगे कि रांझा नीची जाति का है और सियालों की बेटियां कभी रांझाओं से ब्याही नहीं गई। उन्होंने खेरा के जाट से शादी का प्रस्ताव किया और चूचक से कहा कि इस रिश्ते से उनकी इज्जत बढ़ेगी।

खेरा की तरफ से शादी का प्रस्ताव आया और रिश्तेदारों से सलाह कर चूचक ने सगाई का ऐलान कर दिया। घर में ढ़ोल बाजे बजने लगे, शादी का माहौल दिखने लगा। खेरा भी इस रिश्ते पर खुश हुए। उन्होंने भी जश्न मनाया। रांझा इससे दुखी था।

उधर हीर भी मां से खफा थी कि उसकी मर्जी के खिलाफ यह सब हो रहा था। उसने मां से कहा, ‘तुम लोग ठीक नहीं कर रही हो। एक हंस को उल्लू के हाथों सौंप रही है। एक परी सांढ़ के साथ कैसे जिंदगी गुजार पाएगी?

मौका देखकर हीर रांझे से मिली। रांझे से कहा, ‘हम दोनों पर यह कैसा कयामत बरपा है। चलो, कहीं दूर चलते हैं। एक बार मैं यहां से खेरा के घर गई तो कभी लौट नहीं पाऊंगी। हम दोनों ने प्यार की इस जंग को लड़ने के लिए बहुत कुछ किया है। हम सच्चे प्रेमी हैं और यह जंग लड़ना हम छोड़ नहीं सकते।’

रांझा हीर के बातों से सहमत नहीं हुआ। वह कहने लगा कि प्यार को कभी भी चोरी या अपहरण करके हासिल करना ठीक नहीं है। ‘हीर, तुम मुझसे उस चोर की तरह भागने की सलाह दे रही हो, जो चोरी करते पकड़ लिया गया है।’

हीर की सहेलियां रांझा से मिलने पहुंची और उसे ताना देने लगी। ‘ये सब अच्छा लग रहा है तुमको। इधर तुम भैंसो को चराने में दिन रात व्यस्त रहते हो उधर हीर की शादी की तैयारियां चल रही हैं। अगर यही करना था तो फिर प्यार क्यों किया?’

रांझा ने लड़कियों से कहा, ‘देखो, इन सब बातों में क्या रखा है? मुसीबत आए तो धैर्य से उसका सामना करना चाहिए। अगर ईश्वर की इच्छा होगी तो खेरा और सियाल का यह रिश्ता नहीं हो पाएगा। तुमलोग प्यार के बारे में कुछ नहीं जानती। दिल में धीरज रखने से ही प्यार की दुनिया में जीत होती है।’

रांझा का जवाब सुनने के बाद लड़कियां हीर के पास लौटीं और कहने लगीं, ‘तुमने इस प्यार को गंभीरता से नहीं लिया। तुमने उसके भरोसे को तोड़ा है। वह गांव छोड़ने की तैयारी कर रहा है। अगर यही करना था तो रांझा को प्यार के लिए बढ़ावा नहीं देना चाहिए था। तुम्हारी वजह से उसका दिल टूटा है। वह तुम्हारी खातिर दुनिया के ताने सुन रहा है और तुम उसपर जुल्म कर रही हो।’

हीर ने सहेलियों से रांझा को लड़की के वेश में छुपाकर लाने को कहा। ‘उसे मेरे पास ले आओ। मेरे मां बाप को पता न चले। तुमलोगों के सामने यह फैसला हो जाएगा कि किसने भरोसा तोड़ा है और कौन प्रेम में सच्चा है। मैंने तो रांझे को साथ भागने को कहा लेकिन वह नहीं माना। अब गांव में रहकर ताने क्यों सुन रहा है?’

एक रात रांझा को लड़कियों के कपड़े पहनाकर सहेलियां उसे हीर के पास ले आईं। दोनों प्रेमियों का एक बार फिर आमना सामना हुआ। दोनों ने एक दूसरे से सच्चा प्रेम करने की बात दोहराई। कहानी आगे पढ़ें।

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हीर रांझा 22 – पिटाई से बौखलाया कैदु ने रची दोनों के खिलाफ साजिश

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हीर की सहेलियों ने आकर उसे कैदु की शैतानियों के बारे में बताया। ‘तुम्हारा दुष्ट चाचा गांव के बड़े बुजुर्गों को तुम्हारे खिलाफ भड़का रहा है। तुम्हारे और रांझा के प्रेम का बाजार में ढोल पीट रहा है। हम मिलकर उसे ऐसा सबक सिखाएंगे कि जिंदगीभर याद रखेगा।’ हीर राजी हो गई और सहेलियों संग सलाह करने लगीं। कैदु को सबक सिखाने की योजना बन गई।

हीर और सहेलियां कैदु को घेरने का अवसर तलाशने लगीं। इंतजार करते करते आखिर वह वक्त भी आ ही गया। सबने कैदु को उसके ही घर में ऐसे पकड़ा जैसे धोबी गधे को पकड़ता है। सबने कैदु को ऐसे पीटना शुरू किया जैसे लोहार लोहे को पीटता है। उन्होंने उसके बाल खींचे और मुंह पर कालिख मल दिया।

कैदु उस चोर की तरह चिल्लाता रहा जो सिपाही के हाथ लग गया हो और सिपाही उसे जमकर पीट रहा हो। सबने मिलकर उसकी झोपड़ी को जला दिया। झोपड़ी से उठती आग की लपटें हीर और उसकी सहेलियों के लिए विजय पताका की तरह लहरा रही थीं। उस रोशनी में उनके सूरतें और भी चमक उठीं।

उधर फटे कपड़ों में मार खाया कैदु बड़ों की सभा में रो रोकर गुहार लगाने लगा, ‘मुझे इंसाफ चाहिए। इंसाफ दो मुझे। उन लोगों ने मेरी झोपड़ी जला दी। मेरे बर्तन तोड़ दिए। मुझे मारा। मैं पूरी दुनिया के सामने सबकी शिकायत रखूंगा। काजी से इंसाफ मांगूंगा।’

कैदु की बात सुन हीर का पिता चूचक गुस्से में आकर उससे बोला, ‘भाग जाओ यहां से दुष्ट, तुम ठगों के सरदार हो। तुम पहले लोगों को तंग करते हो और फिर पंचायत करने चले आते हो। तुम लड़कियों को परेशान करते हो इसलिए तुम्हारे साथ ऐसा हुआ।’

वहां लड़कियों को बुलाकर पूछा गया कि उन्होंने कैदु को क्यों मारा? क्या उसने कुछ बुरा किया था? लड़कियों ने कहा, ‘यह बदमाश हमारे गालों को छूता है और हमारी बाहें मरोड़ता है। हम कहां जाते आते हैं, इसकी जासूसी करके हमारा ऐसे पीछा करता है जैसे गाय के पीछे सांढ़ जाता हो।’

इसके बाद मिल्की की मां से हीर और उनकी सहेलियां कहने लगीं, ‘कैदु पागल कुत्ते जैसा है। इसे हम दूर क्यों नहीं भगा देते? हमें उससे डर लगता है। वह हमारे साथ बुरा बर्ताव करता है और आपलोग उससे प्यार से बातें करते हो। हमें बार बार जिसकी वजह से बड़ों की सभा में आना पड़ता है, ऐसे दुष्ट झगड़ालू आदमी के प्रति आपलोग दयालु क्यों बन रहे हैं? यह तो इंसाफ नहीं है।’

कैदु फिर और जोर से रोने चिल्लाने लगा और इंसाफ की मांग करता रहा। सभा में लोगों ने कैदु को शांत होने को कहा। उनका मानना था कि कैदु के साथ लड़कियां कुछ ज्यादा ही कठोरता से पेश आई हैं। उन्होंने लड़कियों को डांटा और कैदु से वादा किया कि उसका घर फिर से बना दिया जाएगा। उसके बर्तन सहित अन्य नुकसान की भी भरपाई कर दी जाएगी।

लेकिन कैदु को इस फैसले से संतोष नहीं हुआ। वह कहने लगा, ‘आप लोगों ने अपनी बेटियों की तरफदारी की है और मुझे ऐसी तुच्छ सांत्वना दे रहे हो। ये तो अंधे राजा और दमन करने वाले अधिकारियों के राज्य जैसा इंसाफ है।’

इस पर हीर का पिता चूचक बोल पड़ा, ‘हमारे गांव  के बड़े बुजुर्ग नीच नहीं हैं। उन्हें ईश्वर का खौफ है। हम कभी नाइंसाफी नहीं करते। शैतान से हमें नफरत है। तुम्हारी कहानी की सच्चाई पर आंखों से देखने पर ही यकीन किया जा सकता है। अगर वह सच्ची निकली तो हीर को काट कर फेक देंगे और रांझे को गांव से निकाल देंगे।’

कैदु मन ही मन कहने लगा, ‘मैं तो उस हीर को भांग की तरह पीस दूंगा और उस रांझे के बालों से रस्सियां बनाऊंगा।’ फिर वह बोला, ‘हां चूचक, अगर तुमने खुद अपनी आंखों से देखने के बाद अगर अपनी बेटी को कुछ नहीं कहा तो तुम इस सभा में बैठे सभी लोगों को झूठा साबित करोगे।’

वहां से जाने के बाद कैदु जंगल में हीर रांझा को एक साथ पकड़ने की योजना बनाने लगा। वह रांझा पर नजर रखने लगा। दूसरे दिन रांझा सुबह जब पशुओं को लेकर जंगल की ओर चला तो कैदु भी झाड़ियों के पीछे छिपकर उसका पीछा करता रहा। दो पहर बाद हीर अपनी सहेलियों के साथ जंगल आईं। जंगल सियाल की लड़कियों की खूबसूरती से चहकने लगा। कुछ देर खेलने के बाद सहेलियां घर लौट गईं लेकिन हीर रांझे के साथ नर्म घास पर लेटी बातें करती रहीं।

मौका पाकर झाड़ियों के पीछे छिपा कैदु तुरंत वहां से तेजी से दौड़ता हुआ गांव पहुंचा और बड़ों के पास जाकर कहने लगा, ‘चलो, खुद अपनी आंखों से देख लो, जंगल में क्या तमाशा चल रहा है।’ कहानी आगे पढ़ें

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