Tag Archives: शिकवा शायरी

शायरी – हो इश्क का तमाशा और हुस्न की कयामत

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हो इश्क का तमाशा और हुस्न की कयामत
ऐसे में दिल-ए-आशिक कैसे रहे सलामत

एक बूंद दर्द में डूबा, तब बन गया समंदर
किसी बेवफा ने की थी उसपे कभी इनायत

सब सूख चुकी हैं वो गुलाब की पंखुरियां
संभाल के रखा था आखिरी तेरी अमानत

आंखों में जमा होके गिले-शिकवे हुए पानी
चेहरे पे बहता दरिया, आईने की है शिकायत

©RajeevSingh # love shayari

 

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शायरी – तेरे आने से मैं अपना चमन भूल गई

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तेरे आने से मैं अपना चमन भूल गई
जो निभाना था घर से, वो वचन भूल गई

सात जनमों की भला कौन खबर रखे
तेरी दहलीज पे जब मैं ये जनम भूल गई

क्या जमाना भी करेगा हमसे शिकवा
जब जमाने के कीए सारे सितम भूल गई

दीवानी होकर तेरे पास चली आई हूं
तुमको देखा तो दिल की लगन भूल गई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – ऐ यार तुमसे जुदा हो गया हूँ

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फना हो गया हूँ, तन्हा हो गया हूँ
ऐ यार तुमसे जुदा हो गया हूँ

माज़ी के जितने तसव्वुर हैं मेरे
मैं सबसे अचानक खफा हो गया हूँ

दिल से शिकायत करें भी तो कैसे
मैं जिसके लिए शिकवा हो गया हूँ

तुमसे कहानी शुरू जो हुई थी
मैं आज उसकी इन्तहा हो गया हूँ

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – तेरे जाने की अब किससे शिकवा करें

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घुल गई आग इस चांदनी में कहीं
खो गया दर्द इस रागिनी में कहीं

रो रही थी आज मेरी शाम-ए-गजल
अश्क गिरता रहा मौशिकी में कहीं

दिल के टुकड़ों में जल रहे हैं कई गम
सबकुछ बुझ गया इस रोशनी में कहीं

तेरे जाने की अब किससे शिकवा करें
ये जुबां मर चुकी है आशिकी में कहीं

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – मुझे देखते ही हर निगाह पत्थर सी क्यूँ हो गई

अब जानेमन तू तो नहीं, शिकवा-ए-गम किससे कहें
या चुप रहें या रो पड़ें, किस्सा-ए-गम किससे कहें

मुझे देखते ही हर निगाह पत्थर सी क्यूं हो गई
जिसे देख दिल हुआ उदास,हैं आंखें नम,किससे कहें

इस शहर की वीरां गुलशनें, हैं फूल कम, कांटे कई
दामन मेरा छलनी हुआ, हम दर्दो-गम किससे कहें

कोई रहगुज़र तो देर तक टिकता नहीं कदमों तले
तेरा निशां है कहीं नहीं, मंज़िल न सनम, किससे कहें

©RajeevSingh #love shayari