Tag Archives: शीशा शायरी

शायरी – दिल के शीशे पे दुनिया में पत्थर बरसे

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दिल के शीशे पे दुनिया में पत्थर बरसे
टूटकर आईने के आंसू भी अक्सर बरसे

जितने तन्हा थे कल उतने आज भी हैं
रोज अपने ही मुकद्दर को कोसकर बरसे

जा रहे थे मगर रस्ते में कोई न मिला
जो मुझे अपने सीने से लगाकर बरसे

कौन दुनिया में आखिर प्यार करेगा तुझे
फूल पे भी जहां गुलशन में नश्तर बरसे

नश्तर – कांटे

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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शायरी – शीशे के खिलौनों से खेला नहीं जाता

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शीशे के खिलौनों से खेला नहीं जाता
रेतों के घरौंदों को तोड़ा नहीं जाता

जलते हुए दिलों की निशानी जो दे गया
कुछ ऐसे चिरागों को बुझाया नहीं जाता

बनती हुई तस्वीर तेरी चांद बन गई
अब मेरे तसव्वुर का उजाला नहीं जाता

अपनों ने उसे इतना मजबूर कर दिया
कि घर में सुकून से अब जिया नहीं जाता

तसव्वुर –  खयाल

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शायरी – दुनिया में न बना सके दिल का कोई आशियां

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दुनिया में न बना सके दिल का कोई आशियां
चिड़ियों सा ढूंढते रहे तिनके यहां-वहां

खाली पैर गरीब का घायल न हो जाए कहीं
यारों हटा दो राहों से शीशे पड़े हैं जहां

गम का असर कुछ यूं पड़ा मेरी निगाहों पे
जैसे कि गीली होती है बरसात में मिट्टियां

घटती गई हर साल में मिलने की दो घड़ी
हम-तुम बड़े हो चले, बच्चों से दिन अब कहां

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – कितनी प्यासी थी ये लहरें रेतों के लिए

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जो सुलगता नहीं हो वो चिरागां कैसा
जो उजड़ता नहीं हो वो बहारां कैसा

मैंने पत्थर को भी शीशे का टुकड़ा समझा
बिना दिल के इन निगाहों का नजारा कैसा

जिंदगी थी तो तन्हा थे, ये भीड़ न थी
मेरी मैयत पे रिश्तों का ये सहारा कैसा

कितनी प्यासी थी ये लहरें रेतों के लिए
बिना रेतों के समंदर का गुजारा कैसा

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari