Tag Archives: सच्चा आशिक

शायरी – कैसी है आशिक की फितरत, क्या कहूं

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कैसी है आशिक की फितरत, क्या कहूं
इसे सुकूने दिल से है नफरत, क्या कहूं

दिल लगाया तो अक्ल क्यों कम हो गई
नादानों सी हो गई है हरकत, क्या कहूं

जिंदगी का क्या होगा, कह नहीं सकता
किधर चली गई मेरी किस्मत, क्या कहूं

जमाने से वो आखिरकार इतनी डर गई
दे न सकी मिलने की मोहलत, क्या कहूं

©राजीव सिंह शायरी

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शायरी – गम के मारों में तो समंदर छुपा होता है

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इतना दर्द आंखों के अंदर छुपा होता है
गम के मारों में तो समंदर छुपा होता है

जिसे खुदा के सिवा किसी का खौफ नहीं
उसी शख्स में तो सिकंदर छुपा होता है

हुस्न के चेहरे से जब खामोशी छलकती है
वहीं सच्चे आशिक का मंजर छुपा होता है

ऐसी दुनिया में अकेले ही रह गए हैं जहां
रिश्तों की आस्तीन में खंजर छुपा होता है

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – वो आबरू के लिए आशिक को ठुकराएंगे

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हाले दिल जानकर भी वो नहीं आएंगे
इश्क उनको भी है फिर भी नहीं मानेंगे

रस्मे दुनिया है और वालिद का आशियां है
वो आबरू के लिए आशिक को ठुकराएंगे

हम तो सहकर जीए जाते हैं उनके सितम
जाने कब तक वो मेरे दिल को आजमाएंगे

रात तन्हा ही सही, दिन बेसहारा ही सही
बस उनके दर्द में हम हर लम्हा बिताएंगे

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – जिनकी भी आंखों में देखी वफा

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जब दिल में हो सच्चे जज़्बात
होता है इश्क तब अपने-आप

तन्हा ही राहों पे चलते रहे हम
कोई थामेगा कब मेरे हाथ

जिनकी भी आंखों में देखी वफा
वहीं पे आंसू भी थे उनके साथ

हमने जमाने में अक्सर ये पाया
बनने से ज्यादा बिगड़ती है बात

©RajeevSingh