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शायरी – गम के मारों में तो समंदर छुपा होता है

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इतना दर्द आंखों के अंदर छुपा होता है
गम के मारों में तो समंदर छुपा होता है

जिसे खुदा के सिवा किसी का खौफ नहीं
उसी शख्स में तो सिकंदर छुपा होता है

हुस्न के चेहरे से जब खामोशी छलकती है
वहीं सच्चे आशिक का मंजर छुपा होता है

ऐसी दुनिया में अकेले ही रह गए हैं जहां
रिश्तों की आस्तीन में खंजर छुपा होता है

©राजीव सिंह शायरी

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