Tag Archives: समंदर शायरी

शायरी – गम के मारों में तो समंदर छुपा होता है

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इतना दर्द आंखों के अंदर छुपा होता है
गम के मारों में तो समंदर छुपा होता है

जिसे खुदा के सिवा किसी का खौफ नहीं
उसी शख्स में तो सिकंदर छुपा होता है

हुस्न के चेहरे से जब खामोशी छलकती है
वहीं सच्चे आशिक का मंजर छुपा होता है

ऐसी दुनिया में अकेले ही रह गए हैं जहां
रिश्तों की आस्तीन में खंजर छुपा होता है

©राजीव सिंह शायरी

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शायरी – दोस्त बनाकर उसने मेरा कत्ल किया

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घर घर की कहानी जान मुझे हैरानी है
रिश्तों के पीछे कितनी नमकहरामी है

बेईमानों की जेब में तो अब समंदर है
ईमानों के रेगिस्तान में क्यों वीरानी है

खुदा क्या इश्क भी वो नहीं जानती
लोग कहते हैं कि वो बहुत दीवानी है

दोस्त बनाकर उसने मेरा कत्ल किया
उसकी सूरत पे शिकन न परेशानी है

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – तेरी मोहब्बत के गम का असर न मिटे

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तेरी मोहब्बत के गम का असर न मिटे
अमृत न मिले सही, ये जहर न मिटे

अब मेरी तन्हाई तकलीफ नहीं देती
तुझमें खोये रहने का ये पहर न मिटे

अपने वजूद की तलाश में भटका मैं
मरते दम तक मेरा ये सफर न मिटे

चांद की चाहत में जो दीवाना हुआ हो
आंखों के समंदर में वो लहर न मिटे

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – कभी गली में वो दिखती नहीं

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इश्क का ये उदास मंजर है
दर्द सीने में गड़ा खंजर है

वो हुस्न पिंजरे में बंद पंछी है
इधर दिल रोता घर के अंदर है

आंखें झरने की तरह गिरती हैं
जिस्म में भर गया समंदर है

कभी गली में वो दिखती नहीं
ये उम्मीद भी कितनी बंजर है

©RajeevSingh

शायरी – मुहब्बत में जिंदगानी यूं पाले बदलती है

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अपनी ही सांस किसी और की लगती है
मुहब्बत में जिंदगानी यूं पाले बदलती है

आज न कल हसीन चांद कहीं तो टपकेगा
इसी उम्मीद में ये जमीं दिन-रात चलती है

तेरा अक्स खींचता रह गया मैं गजलों में
न जाने कितने चेहरों में तू रोज मिलती है

कोई इस पार से उस पार आखिर कैसे पहुंचे
जब बीच समंदर में तू कश्ती से उतरती है

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – एक नदी की चाहत तो उस रेगिस्तां को भी है

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समंदर से प्यार करना कोई नदी छोड़ पाती नहीं
रेगिस्तां की तरफ भूलकर भी कभी वो जाती नहीं

एक नदी की चाहत तो उस रेगिस्तां को भी है
मगर प्यासे की प्यास कोई भी बुझाती नहीं

जहां कांटें ही हैं, फूलों का खिलना मयस्सर नहीं
वहां रेतों को सींच, कोई गुलशन बसाती नहीं

जिधर पानी अथाह, उसी के दामन को थामेगी नदी
इधर पानी नहीं, ये कमी तो कभी भर पाती नहीं

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – आंसू के कतरों से तेरे लिए दुआ निकली

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मेरी आंखों से गुनाह की सजा निकली
आंसू के कतरों से तेरे लिए दुआ निकली

जो ख्यालों में बहुत सच्ची लगती थी
उसे करीब से देखा तो बेवफा निकली

जिसे पीकर मैं कभी होश में न आ सका
वो हुस्न तो एक दिलकश नशा निकली

जब लौटा उसके दर से ठोकरें खाकर
आईने में अपनी सूरत गुमशुदा निकली

मुझे मुहब्बत के समंदर में डुबोकर
जाने किधर साथ छोड़ मेरी खुदा निकली

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – हम मुस्कुराते हुए जख्म खाते गए

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वो सितम पे सितम मुझपे ढाते गए
हम मुस्कुराते हुए जख्म खाते गए

जिनकी खुशियों की खातिर मरते रहे
वो रिश्ते नाते ही दिल को रुलाते गए

आंखों में आंसुओं की कमी ना रहे
हम समंदर में पानी को लाते गए

दीवानगी ने कभी हार मानी नहीं
मेरी मुुहब्बत भले वो ठुकराते गए

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – जब तलक है ये जिंदगी, दिल में मेरी वफा है

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जब तलक है ये जिंदगी, दिल में मेरी वफा है
तेरी उम्मीद में जिए जाने का यही फलसफा है

माहताब निकलने में जाने कितनी देर है बाकी
गम की अंधेरी रात भी अब लगती बेवफा है

तेरी हसरत लेकर हम मरते रहे जो उम्रभर
यह जानकर ऐ दिलबर, तू हो गई क्यों खफा है

एक समंदर गुम हुआ अब गर्दिश की रेत में
साहिल पे है लिखा कि मुहब्बत की ये जफ़ा है

जफ़ा- जु्ल्म

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – तुम आए तो एक समंदर भी ठहरा

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तुझे देखकर सारी थकान भूलते हैं
मन के सभी परिंदे उड़ान भूलते हैं

तुम आए तो एक समंदर भी ठहरा
लहरों की जवानी तूफान भूलते हैं

मुहब्बत की इस हसीं दिलकशी में
दीवाने तो आखिरी अंजाम भूलते हैं

ज़हन में इस तरह बसा अक्स तेरा
आईना देख अब अपना नाम भूलते हैं

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – अपने खयालों में देखा जिनको

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दोनों चिरागों में दो समंदर
देखा है उनकी आंखों के अंदर

अपने खयालों में देखा जिनको
आज नजर में आए वो दिलबर

जुल्फें या आंखें, चेहरा या चितवन
हरसू हैं उनमें जलवों के खंजर

नाजुक बदन जब निकले फिजा में
खुशबू से भर जाए सारा मंजर


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – तुझे करते हैं याद, दिन हो या रात

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ये जिस्मो-जां और मेरे सारे जज़्बात
तुझे करते हैं याद, दिन हो या रात

चांद अब तक नहीं आई मेरे दामन में
उदास है मन सोचकर बस यही बात

मैं समंदर हूं, दरिया हूं या कुछ भी नहीं
जब पानी नहीं तो सबके एक से हालात

मन में आती है, पहलू में तो नहीं आती
क्यों कराते हो ऐ ख्वाब उनसे मुलाकात

अब तो इंतहा हो चुकी है मेरे सब्र की
शायद खुदा को मंजूर नहीं हमारा साथ

शायरी – हो इश्क का तमाशा और हुस्न की कयामत

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हो इश्क का तमाशा और हुस्न की कयामत
ऐसे में दिल-ए-आशिक कैसे रहे सलामत

एक बूंद दर्द में डूबा, तब बन गया समंदर
किसी बेवफा ने की थी उसपे कभी इनायत

सब सूख चुकी हैं वो गुलाब की पंखुरियां
संभाल के रखा था आखिरी तेरी अमानत

आंखों में जमा होके गिले-शिकवे हुए पानी
चेहरे पे बहता दरिया, आईने की है शिकायत

©RajeevSingh # love shayari