Tag Archives: समंदर शायरी

शायरी – इश्क की लहरों के भंवर में हमको एक दिन डूब है जाना

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दुनिया के इन शहरों से तुम गम की बस्ती दूर बसाना
आशिक मस्तानों की फितरत मेरे दिल तू भूल न जाना

उतर पड़े हैं समंदर में जज़्बातों की कश्ती लेकर
इश्क की लहरों के भंवर में हमको एक दिन डूब है जाना

चांद की चाहत में भटकता बादल भी तो फकीर हुआ
आसमां की बेमंजिल राहों पे देखो चलता रहा दीवाना

दर्द भरी मासूम आंखों में जबसे देखी है एक बेचैनी
करके याद उसकी सूरत को टूटके बिखरा है आईना

©RajeevSingh # love shayari

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शायरी – दर्द की लहरों से जब भीगती है ये आंखे

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नजरे-मुहब्बत का बस इतना है फसाना
हम तुझे देखते हैं, हमें देखे है जमाना

दलदल भरे रिश्तों से बचके निकल चले
कसम खाए हैं, अब खुद को नहीं रुलाना

चांद की तन्हाई में अब यूं खो चुका हूं मैं
ऐ सितारों अपनी भीड़ में हमको न बुलाना

दर्द की लहरों से जब भीगती है ये आंखे
बहुत मुश्किल होता है समंदर को दबाना

नजरे मोहब्बत- मोहब्बत की नजर

शायरी – मुहब्बत के समंदर में दिलदार बहुत हैं

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मुहब्बत के समंदर में दिलदार बहुत हैं
यहां कश्तियां हैं कम, पतवार बहुत हैं

इस दुनिया में बेवफाओं का एक है उसूल
वो अक्सर कहते हैं कि मेरे यार बहुत हैं

तेरे नाम की माला जपने जो कोई बैठा
उसे काटने को समाज में तलवार बहुत हैं

देख ओ जमाना चला तेरे दर से दीवाना
उसके लिए सहराओं के घरबार बहुत हैं

सहरा- वीरान जगह

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – समंदर तेरी सूरत महबूब से मिलती है

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समंदर तेरी सूरत महबूब से मिलती है
तेरी आंखें उस खूबसूरत सी लगती है

तेरे दामन सा फैला है उसका आंचल
उसकी जुल्फें तेरी लहरों सी लगती है

उसकी बाहों में खुशियों के मोती है
वह भी गहरी सी, गुमसुम सी लगती है

मासूम जज़्बातों के लहू से बनी है वो
उसकी परछाई तेरे पानी सी लगती है

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – कौन समझाएगा इश्क में रोनेवालों को

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वो आंखों में समंदर की तरह आता है
आईने में भी पत्थर की तरह आता है

कौन समझाएगा इश्क में रोनेवालों को
टूटा सपना भी दिलबर की तरह आता है

वक्त-बेवक्त बेसबब बेतकल्लुफ सा
मेरे सीने में वो खंजर की तरह रहता है

ना गमगीन हो मेरे दोस्त मेरी मैयत पे
कोई दुनिया में मुसाफिर की तरह आता है

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – आ लौट के तू आ जा, पहलू उदास है

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आ लौट के तू आ जा, पहलू उदास है
बरसात में जलता दिल का चिराग है

तू तो बड़ा प्यासा है पर जानती हूँ मैं
समंदर नहीं तुमको रेतों की तलाश है

हर ओर से कयामत उठाया है जिगर ने
शायद ये मेरे खून में चढ़ता शबाब है

सावन का पपीहा भी रो-रो के थक गया
एक बूंद की खातिर वो इतना हताश है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – मेरी मुंतज़िर निग़ाहों को हुस्न का रूप मिला

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जख़्म दर जख़्म हम पाते गए कुछ न कुछ
हर दर्द हर गम पे गाते गए कुछ न कुछ
जो मुझे एक पल की खुशी दे न सके
वो हर पल सितम ढ़ाते गए कुछ न कुछ

हर मंजिल पे एक किनारा दिखता था मगर
उसके बाद एक रोता समंदर भी रहता था
हम नहीं गए उस किनारे पे दिल के लिए
जहाँ आँसू न थे पहले से कुछ न कुछ

मेरी मुंतज़िर निग़ाहों को हुस्न का रूप मिला
मेरे बेकरार रूह को दर्द का धूप मिला
चाँद तो बस दूर से ही नूर को बिखराती रही
मगर देती रही बुझते चिराग को कुछ न कुछ

हमें अफसोस नहीं कि तुझे देखा नहीं जी भर के
तेरी तस्वीर तो तेरे आने से पहले सीने में थी
तू आके बस दरस दिखा के गुजर गई
अब उम्रभर तेरे बारे सोचना है कुछ न कुछ

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – दर्द इतना तेरी आंखों में नज़र आया है

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ये समंदर मेरे दिल में उतर आया है
दर्द इतना तेरी आंखों में नज़र आया है

बड़ी मुश्किल है ये इश्क छुपाए रखना
राज़ ऐसा है कि चेहरे पे संवर आया है

इतने सदमे सहे हैं तेरी ख्वाहिश में
मेरी खामोशी के टुकड़ों ने गजल गाया है

ये आंसू हैं मेरे जिसको रोना नहीं आता
तेरा हर गम मेरी आंखों में ठहर आया है

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शायरी – कितनी प्यासी थी ये लहरें रेतों के लिए

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जो सुलगता नहीं हो वो चिरागां कैसा
जो उजड़ता नहीं हो वो बहारां कैसा

मैंने पत्थर को भी शीशे का टुकड़ा समझा
बिना दिल के इन निगाहों का नजारा कैसा

जिंदगी थी तो तन्हा थे, ये भीड़ न थी
मेरी मैयत पे रिश्तों का ये सहारा कैसा

कितनी प्यासी थी ये लहरें रेतों के लिए
बिना रेतों के समंदर का गुजारा कैसा

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शायरी – मेरी खामोशी में सिवा तेरे भला क्या मिलता

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पत्थरों पे सर पटकने के सिवा क्या मिलता
एक समंदर को बिलखने से भला क्या मिलता

दश्त में चिड़िया भटकती रही तन्हा-तन्हा
इस घनी रात में उसे नीड़ भला क्या मिलता

गूंजती है तेरी आवाज ही जिस्मो-जां में
मेरी खामोशी में सिवा तेरे भला क्या मिलता

जहां मातम ही मनाता हो बंदगी में कोई
ऐसे मंदिर में कोई दीप भला क्या मिलता

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शायरी – दीवाना तेरी दुनिया में कुछ दिन का मेहमान है

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दिल जख्मी है, जिस्म खाक है और जेहन परेशान है
दीवाना तेरी दुनिया में कुछ दिन का मेहमान है

एक समंदर सैलाबों का, जलता हुआ एक सहरा सा
एक पैकर में शोला-शबनम, तेरी आंखों की शान है

हालत दुश्मन क्या समझेगा, जाने कब शमा बदलेगा
मौत के दर पे मैं खड़ा हूं, कैद में मेरी जान है

चांद सुलगता पत्थर है, रात का आलम बंजर है
मेरे लम्हों के मंजर में कोई सुबह न शाम है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – अपने सीने में तेरी तस्वीर को छुपा ही गई

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कोई आहट सी आई तो मैं घबड़ा ही गई
अपने सीने में तेरी तस्वीर को छुपा ही गई

जांनिसारों की तरह दिल भी फना होता है
मैं भी एक दिन तुम्हीं में समा ही गई

तेरा इंतजार भी समंदर से बड़ा लगता है
ढ़ूंढ़ती हूं कि तेरी कश्ती कहां खो गई

दरो-दीवार और हया के सौ पर्दों में
इन घटाओं में छुपकर फिर चंदा रो गई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – रात तड़प के गुजर गई और चांद तन्हा रह गया

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रात तड़प के गुजर गई और चांद तन्हा रह गया
आस्मा के मंजर में एक दर्द गूंजकर खो गया

गमजदा सूरत पे देखो मायूसी के साये हैं
जबसे हमको छोड़ गए हो, हुस्न हमारा खो गया

इश्क की बेताब लहरें बहुत सताती हैं हमें
बहते आंसू ये कहते हैं, वो समंदर खो गया

अब मेरी दीवानगी की इंतहा तो हो चुकी
ये निगाहें बुझ गई और ये जुबां भी खो गया

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari