Tag Archives: समाज शायरी

शायरी – अपने समाज में आजादी कब मिलेगी

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फिरंगियों से तो आजादी मिल गई हमें
अपने समाज में आजादी कब मिलेगी

इस समाज के चप्पे चप्पे पर बैठें हैं जो
उन ठेकेदारों से आजादी कब मिलेगी

मुझे आगे बढ़ता देखकर जो जलते हैं
ऐसे रिश्तेदारों से आजादी कब मिलेगी

चारों तरफ इज्जत आबरू की दीवारें हैं
कैद से इश्क को आजादी कब मिलेगी

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शायरी – नशीली रातों को तुझपे नाज आज भी है

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हसीन वादियों में तेरी याद आज भी है
इन फिजाओं में तेरी आवाज आज भी है

कैसे भूलेंगे लोग आसानी से मोहब्बत को
दुनिया में शाहजहां का ताज आज भी है

दिलवालों का सर कलम कर देने के लिए
सदियों का यह दुश्मन समाज आज भी है

आंख लगती है तो तेरे ही ख्वाब आते हैं
नशीली रातों को तुझपे नाज आज भी है

©RajeevSingh

शायरी – कैसा जंगल है ये समाज देखिए तो जहां

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मुझे दुनिया का दस्तूर निभाना नहीं आता
जान देना ही आता है, जान लेना नहीं आता

कोई भरता नहीं अपने दिल का खाली पन्ना
आंसुओं से यहां सबको लिखना नहीं आता

कैसा जंगल है ये समाज देखिए तो जहां
घोंसलों में पंछियों को रहना नहीं आता

रोज आते हैं सभी लोग यहां दैरो-हरम
मांगना आता है सबको, बांटना नहीं आता

दैरो हरम –  मंदिर मस्जिद

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – मेरी राहों पे रहबर मुझे खींचता चला गया

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मेरी राहों पे रहबर मुझे खींचता चला गया
मैं उसे देख न पाया और चलता चला गया

इन समाजों की जंजीरों में मन घुटता था
इसलिए भीड़ में मैं तन्हा होता चला गया

आपको देखकर भी पूछना तो भूल गया मैं
आपके बारे में ही दिल सोचता चला गया

मेरी दुनिया में बेखुदी थी मगर मैं न था
खबर थी कि जिंदा हूं पर मरता चला गया

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari