Tag Archives: सितम शायरी

किसी से दिलबर का रिश्ता जोड़ने के लिए

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जिस हसीं गुलाब से गुलशन में प्यार किया
तुमने उसी नाजुक बेजुबान पर वार किया

किसी से दिलबर का रिश्ता जोड़ने के लिए
उसे टूटा हुआ गुलाब देकर इजहार किया

कैसा प्यार है जो फूल की जिंदगी छीनता है
दुनिया में क्यों सबने बेरहम कारोबार किया

मुरझा गया एक दिन तो फेंक दिया उसको
फूल पर सितम जमाने ने कितनी बार किया

©rajeevsingh           शायरी

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शायरी – हम मुस्कुराते हुए जख्म खाते गए

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वो सितम पे सितम मुझपे ढाते गए
हम मुस्कुराते हुए जख्म खाते गए

जिनकी खुशियों की खातिर मरते रहे
वो रिश्ते नाते ही दिल को रुलाते गए

आंखों में आंसुओं की कमी ना रहे
हम समंदर में पानी को लाते गए

दीवानगी ने कभी हार मानी नहीं
मेरी मुुहब्बत भले वो ठुकराते गए

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – दर्द रहता है जिस दिल में

#100 लव शायरी

ये जुदाई सदाएं देती हैं

मेरे आंसू दुआएं देती हैं

सदाएं- पुकार

वो हमपे सितम ढाती हैं

हम उनकी बलाएं लेते हैं

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शायरी – मेरे हमराह तेरी राह के हम मुसाफिर हैं

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खंजर मेरे दिल को खून से तर कर दे
ऐ पत्थर मेरी आंखों में तू पानी भर दे

तू सूरज है, चंदा है, शम्मा भी है
मेरे अंधियारे जीवन में रोशनी भर दे

मेरे हमराह तेरी राह के हम मुसाफिर हैं
तू मेरे संग चले, ऐसा मंजर कर दे

रात बीते हैं जैसे गुजरते हैं सितम
तू कभी आके अमावस को पूनम कर दे

©RajeevSingh # love shayari

 

शायरी – वो आबरू के लिए आशिक को ठुकराएंगे

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हाले दिल जानकर भी वो नहीं आएंगे
इश्क उनको भी है फिर भी नहीं मानेंगे

रस्मे दुनिया है और वालिद का आशियां है
वो आबरू के लिए आशिक को ठुकराएंगे

हम तो सहकर जीए जाते हैं उनके सितम
जाने कब तक वो मेरे दिल को आजमाएंगे

रात तन्हा ही सही, दिन बेसहारा ही सही
बस उनके दर्द में हम हर लम्हा बिताएंगे

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – तेरा सुरूर जबसे निगाहों पे छा गया

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तेरा सुरूर जबसे निगाहों पे छा गया
जाना था अपने घर तो तेरे दर पे आ गया

बेहोश था जब आया तेरे मयकदे में मैं
तूने थमाया जाम तो मुझे होश आ गया

कितने करम किए हैं मुझपे मेरे खुदा
जिनके सितम से जीने का मजा आ गया

शम्मे को जलता देखकर मैं उसमें जल गया
ये जिस्म खाक था मगर मैं पाक हो गया


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – जब-जब सितम तूने किया, हम सह गए दिल खोल कर

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मुझे देखकर मुंह फेर लो, ऐसी भी क्या तेरी बेरुखी
महफिल में दूर-दूर हो, ऐसी भी क्या तेरी बेबसी

मुड़के जो देखती हो तुम, मजबूर हो क्यूं दिल से तुम
मुझे इस तरह न तलाश कर कि बदनाम हो दीवानगी

जब-जब सितम तूने किया, हम सह गए दिल खोल कर
जालिम है तेरी हर अदा, कातिल है तेरी आशिकी

खत की तरह खामोश तुम, तेरा हुस्न ही मजमून है
तेरे नैनों पे गजल लिखी, तेरे नक्श में है शायरी

मजमून- खत के अंदर लिखी बातें

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – हद से ज्यादा ये दर्द जब बढ़ जाएगा

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हम वस्ल के वहम में जीये जाएंगे
हिज्र के दर्द अलम से पीये जाएंगे

तेरी यादों की रातों में रोएंगे हम
इश्क में ये सितम भी सहे जाएँगे

हद से ज्यादा ये दर्द जब बढ़ जाएगा
हम खामोशी को तोड़ गजल गाएंगे

जब फुरकत के सदमे मिले हैं हमें
तुमसे मिलने की दुआ बस मांगेंगे

वस्ल- मिलन
फुरकत- विरह
हिज्र – जुदाई

अलम – वेदना, कष्ट

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – मेरी मुंतज़िर निग़ाहों को हुस्न का रूप मिला

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जख़्म दर जख़्म हम पाते गए कुछ न कुछ
हर दर्द हर गम पे गाते गए कुछ न कुछ
जो मुझे एक पल की खुशी दे न सके
वो हर पल सितम ढ़ाते गए कुछ न कुछ

हर मंजिल पे एक किनारा दिखता था मगर
उसके बाद एक रोता समंदर भी रहता था
हम नहीं गए उस किनारे पे दिल के लिए
जहाँ आँसू न थे पहले से कुछ न कुछ

मेरी मुंतज़िर निग़ाहों को हुस्न का रूप मिला
मेरे बेकरार रूह को दर्द का धूप मिला
चाँद तो बस दूर से ही नूर को बिखराती रही
मगर देती रही बुझते चिराग को कुछ न कुछ

हमें अफसोस नहीं कि तुझे देखा नहीं जी भर के
तेरी तस्वीर तो तेरे आने से पहले सीने में थी
तू आके बस दरस दिखा के गुजर गई
अब उम्रभर तेरे बारे सोचना है कुछ न कुछ

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – ऐ सनम तेरे जैसा मेरा कोई दुश्मन न हुआ

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खैर अच्छा ही हुआ कि ये मुमकिन न हुआ
मेरे इस रूह का कोई भी पैरहन न हुआ

पल गुजारे थे जो तन्हाई में रोते-रोते
इस तरीके से भी मेरा गम कुछ कम न हुआ

उड़ रहा था मेरा दिल भी परिंदों की तरह
तीर जब लग गई तो कोई भी मरहम न हुआ

देख लेना था मुझे भी हर सितम की अदा
ऐ सनम तेरे जैसा मेरा कोई दुश्मन न हुआ

पैरहन- कपड़े

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – इश्क के इस दाग का एक बेवफा से रिश्ता है

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इश्क के इस दाग का एक बेवफा से रिश्ता है
इस दुनिया में सदियों से आशिक का ये किस्सा है

दर्दे-दिल की आग को कोई सागर क्या बुझाएगा
दिलजला तो मौत के पहलू में जाकर ही बुझता है

हर सितम एक आईना है, तुमको देखूं बार-बार
खूने-जिगर तो तेरी जफा ही पाने को तरसता है

कागज के फूलों की खुशबू भर जाती है आंखों में
तेरे इन पुराने खतों में तेरा साया दिखता है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – उस नाज पे, उस हुस्न पे जांनिसार हों हर जनम में हम

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कभी दिल्लगी कभी संगदिली, कितने सितम तुमने किए
कभी की वफा, कभी थी खफा, कितने करम तुमने किए

उस हुस्न के दीदार पे जांनिसार हों हर जनम में हम
जो रूह बनके जुदा हुई, इस जनम में जां उसने लिए

ये इश्क का इंसाफ है, कि तेरी हर खता मुआफ है
इस गुनाह को कुबूल कर खुद को सजा हमने दिए

ये चांद भी तेरे नूर का एक मिसाल है इस जहां में
हम रातभर यूं ही जागकर तुझे देखकर जीते गए

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – खून के रिश्तों में ही होती है अक्सर दुश्मनी

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बन रहे हैं रोज शहर में ईंट-पत्थर के मकां
जिसमें दबते हैं कई जुल्मो सितम के निशां

खून के रिश्तों में ही होती है अक्सर दुश्मनी
हक-हिस्सों के झगड़े में खून करते हैं इसां

सबके दिल में एक जज्बा, हाय दौलत हाय पैसा
क्या मर्द और क्या औरत, एक से हैं सब यहां

धूमधाम से करके शादी करते हैं बच्चे पैदा
औलादों-मां-बाप के झगड़ों में रोता है ये जहां

©RajeevSingh