Tag Archives: हमसफर शायरी

shayari – काश मुझसे वो कभी इजहार ए मोहब्बत कर पाती

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मेरी हमसफर शायरी फोटो

काश मुझसे वो कभी इजहार ए मोहब्बत कर पाती
काश मैं जितना करता हूं, उतना प्यार वो कर पाती

उसको मेरी आठों पहर हर पल इतनी फिकर होती
कि कभी रूठ भी जाता तो आकर मुझे मना पाती

मेरे बुरे हालातों को जानकर भी वो मेरी हमसफर
मुझे अपनाकर मेरी जिंदगी का हमदर्द बन पाती

मेरे दिल में धड़कते इश्क की आवाज सुनकर वो
काश कभी अपनी चाहत का भी इकरार कर पाती

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शायरी – जिस शहर में सच्चा हमसफर न मिलेगा

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जिस शहर में सच्चा हमसफर न मिलेगा
मुसाफिर वहां सफर में कहां तक चलेगा

हर जगह जहां बेवफाओं की महफिलें हैं
एक तन्हा उस मंजर में कहां तक टिकेगा

मकानों के कारवां में फंसके फड़फड़ाया
गलियों की कैद में परिंदा कहां तक रहेगा

चांद सूरज भी जहां अपना वजूद खो चुका
उस शहर में दीया फिर कहां तक जलेगा

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – वहां इश्क का परिंदा उड़ता है बेखबर सा

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लगता है उसका घर एक आजाद शहर सा
वहां इश्क का परिंदा उड़ता है बेखबर सा

घर में हर तरफ खड़ी हैं तनहाई की दीवारें
सुकूं से रहता है वो मोहब्बत भरे बशर सा

उसके लिए दुनिया कातिलों का कारवां था
आईना ही बना था वफादार हमसफर सा

बेवफाओं से दूर वो जिंदगीभर भागता रहा
दिल को था बनाया उसने अपना रहबर सा

बशर – इंसान, रहबर – राह दिखाने वाला

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – होती नहीं आंखों से जब दर्द की बरसातें

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यूं होता हूं बेखबर, दुनिया की याद नहीं आती
खुद अपने वजूद से कोई आवाज नहीं आती

होती नहीं आंखों से जब दर्द की बरसातें
जागते हैं और रोने की ख्वाहिश नहीं जाती

रातों की तन्हाई में हम उस चांद के लिए
जलते रहे लेकिन वो कभी पास नहीं आती

बहुत दर्द से भरा था मेरे हमसफर का दिल
सुनती मगर उस तक मेरी फरियाद नहीं जाती

©RajeevSingh

शायरी – दर्द से अब निजात दिलाए कोई

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मुझे अपने पहलू में छुपाए कोई
दर्द से अब निजात दिलाए कोई

हमसफर मेरा जिस डगर पे है
उस मोड़ तक मुझे पहुंचाए कोई

मेरी जिंदगी में कोई रोशनी नहीं
मेरे घर में शम्मा जलाए कोई

जमाने की इतनी कड़ी धूप में
आंचल की छांव में बुलाए कोई

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – जिस रहगुजर पे चले दूर तक तेरी तलाश में

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दर्द ए मुहब्बत के अफसानों में खोये जा रहा हूं
जानेजां तुझे अपनी गजलों में पिरोये जा रहा हूं

मुफलिसी के आसमान में चांद तो नहीं निकलता
दिल के अंधेरों में सितारों को जलाए जा रहा हूं

दर्द की नमी को हमने आंखों में बसा लिया है
गमों की दरिया को चेहरे पे बहाए जा रहा हूं

जिस रहगुजर पे चले दूर तक तेरी तलाश में
उसी को अब अपना हमसफर बनाए जा रहा हूं

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

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चल पड़ा हूँ किधर, जबसे छूटा है घर
और बिछड़ा है मेरा हसीं हमसफर
चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

अपने साये से रुखसत हुआ था कभी
जब दीये बुझ गए मुफ़लिसी में सभी
अब अंधेरे में रहता हूँ आठों पहर
चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

कोशिशें की बहुत, हौसले थे मगर
हो गया चाक मेरा ये नाज़ुक जिगर
फिर भी मिल न सका इश्क में रहगुज़र
चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

सागर से उठे थे धुएँ की तरह
फिर हवा में उड़े पंछियों की तरह
और घटा बनके एक दिन बरसी नज़र
चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – तुम थी मिली उस मोड़ पे, जिस मोड़ पे कोई न था

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अपने भी सारे गैर थे, गैरों में अपना कोई न था
तुम थी मिली उस मोड़ पे, जिस मोड़ पे कोई न था

तेरे वजह से गीत के सुर-ताल को मैं पा सका
पहले तो बस लफ्ज थे पर लय उनमें कोई न था

तुम मशाल हो अंधेरे में तो रोशनी मेरे दिल में है
सारे चिराग बुझ गए, तेरे सिवा और कोई न था

मैं आज तुमसे दूर हूं, तुमपे गजल मैं लिख रहा
तुम जब जुदा हुए थे तब मेरा हमसफर कोई न था


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – तुम मेरे दिल में आ चुके, हम तेरे दिल से जा चुके

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हम कितनी दूर आ चुके, तुम कितनी दूर जा चुके
तुम मेरे दिल में आ चुके, हम तेरे दिल से जा चुके

अब गैर कोई छू ले तुझे तो मुझे ऐतराज नहीं
तेरे इश्क में हम जिस्म की जरूरत को गंवा चुके

इस चांद को तुमसा कहूं तो बुरा लगेगा खुद मुझको
जबसे हमें तुम छोड़ गए, ये चिराग हम बुझा चुके

उसे कौन सा सफर कहूं जिसे हो नसीब न हमसफर
इस जिंदगी की राह को हम दर्द में डुबा चुके

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari