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हम दोनों एक दूसरे से टूटकर प्यार करते हैं लेकिन कास्ट अलग है – अमिता लव स्टोरी

मैं लखनऊ से अमिता हूं। मैं ओबीसी कास्ट की हूं और जिस लड़के से प्यार करती हूं वो जनरल कास्ट का है। वो मुझसे बहुत प्यार करता है। हम दोनों एक दूसरे की बहुत इज्जत करते हैं और केयर भी। पिछले सात साल से हम दोनों रिलेशनशिप में हैं पर अब मेरे घरवाले मेरी शादी कराने में लग गए हैं। जैसे ही कोई लड़का मिल जाएगा, वो मेरी शादी कर देंगे।

मेरे अपने लवर के साथ हसबैंड वाइफ जैसे रिश्ते हैं। बस शादी नहीं हुई है हमारी, बाकी सारे रिश्ते हैं हमारे बीच। वैसे जब उसने प्रपोज किया था तभी उसने कह दिया था कि हो सकता है कि हमारी शादी न हो पाए। उसने कहा था कि मेरे घरवाले मानेंगे तभी मैं शादी कर पाऊंगा, अगर नहीं कर पाऊं तो मुझे माफ कर देना। पांच साल प्यार करने के बाद हम दोनों के फिजिकल रिलेशन बने लेकिन फिर भी हम दोनों का एक दूसरे से प्यार कम नहीं हुआ।

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अपने घर में उसने मम्मी से बातों-बातों में कहा कि शादी अपनी मर्जी से करूंगा चाहे वो ओबीसी कास्ट की हो या किसी और कास्ट की। यह सुनकर उसकी मां बहुत गुस्सा हो गई और कहने लगी कि ऐसा करोगे तो जानते हो कि क्या होगा, आज के बाद फिर ऐसी बात मत बोलना कि किसी और कास्ट में शादी करोगे। वो कहता है कि शादी नहीं कर पाएगा लेकिन मेरे बिना रह भी नहीं पाएगा। मैंने उससे यह कहा है कि जब तक मेरी शादी किसी और से नहीं हो जाती तभी तक तुम्हारे साथ रहूंगी, उसके बाद तुमको छोड़ दूंगी।

मैंने कहा कि अगर तुमको घरवालों की इतनी फिक्र है तो मेरा भी घर है, मेरा भी हसबैंड होगा, जिम्मेदारी होगी, मैं किसी का घर बर्बाद नहीं करूंगी। मैंने उससे कह तो दिया लेकिन मैं जानती हूं कि उसके सिवा मैं किसी और से शादी नहीं कर सकती। उसने मुझसे कहा कि तुम अभी ही मुझे छोड़ दो तो आगे तकलीफ नहीं होगी क्योंकि मैं तुम्हारा साथ जिंदगीभर नहीं दे पाऊंगा। मैंने गुस्से में कह दिया कि आज से ही तुमको छोड़ रही हूं, बात नहीं करूंगी तो कहने लगा कि आखिरी बार गले लगा लो। हम अलग हो गए थे उस दिन।

लेकिन पता चला कि उसकी तबियत बहुत खराब हो गई। हम फिर मिले तो रोकर कहने लगा कि मैं मर जाऊंगा तुम्हारे बिना, तुम हमसे दूर मत होना, चाहे तुम्हारी शादी किसी और से हो जाए, मुझसे बात करती रहना। मैं उसकी बात सुनकर बहुत उलझ गई हूं। उसके घरवाले किसी कीमत पर नहीं मानेंगे और वो मेरे बिना किसी कीमत पर जी नहीं पाएगा। वो कहता है कि मेरे बिना वो जिंदा लाश बन जाएगा और इस बात को मैंने कई बार फील भी किया है कि मेरी बहुत केयर करता है और उसकी सांस मेरे साथ ही चलती है।

मेरे बारे में वो इतना सोचता है कि मुझे जरा सा भी कुछ होता है तो वो परेशान हो जाता है इसलिए मैं उसके लिए अपनी बहुत केयर करने लगी हूं। लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि आगे क्या किया जाए? कभी सोचती हूं कि छोड़ दूं उसे अभी ही वरना आगे चलकर तकलीफ होगी। कभी सोचती हूं कि अभी से फ्यूचर के बारे में सोचकर क्यों रोएं क्योंकि अगर वो छूट गया तो अभी से ही मेरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।

हम दोनों के बीच का प्यार धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा है। मैं किसी दूसरे लड़के के साथ शादी करके रहने के बारे में सोचती हूं तो मुझे घिन आती है, मन करता है कि जिस दिन किसी और ने मुझे छुआ भी, उस दिन मैं खुद को काट डालूंगी। बिना पसंद की शादी होना मतलब रेप होने जैसी फीलिंग आती है।

मेरे लिए खुशी नाम की चीज है तो वो है मेरा प्यार। मां बाप को तो उम्रभर साथ रहना नहीं है, साथ रहता है वो जिसे हम जीवनसाथी चुनते हैं पर पता नहीं कब तक मेरा जीवन है और कब तक मेरा साथी साथ है? कास्ट की वजह से हमारी शादी नहीं हो सकती…काश दुनिया में सिर्फ इंसान नाम की कास्ट होती तो जिंदगी कास्ट की वजह से बर्बाद नहीं होती….

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जिससे प्यार किया उसने शादी नहीं की, जिससे शादी की वो लड़ाई करती है

मैं बैंगलौर से विशाल हूं। मैं इस पेज से जुड़ा हूं। मैं एक लड़की से बहुत प्यार करता था। उसका नाम अनु था। अनु के साथ मेरा रिश्ता सात आठ सालों तक चला। उससे शादी करने के लिए कहा तो उसने बहाना बनाना शुरू कर दिया कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी होगी तब शादी करूंगी। पढ़ाई पूरी हुई तो उसने नया बहाना बना दिया। इधर मेरी मां की तबियत बहुत ज्यादा खराब होती जा रही थी।

मां को घर का काम करने में दिक्कत होती थी तो उन्होंने मुझसे पूछा कि बेटा हम तुम्हारी शादी कर दे रहे हैं, कोई लड़की पसंद हो तो बता दो। मैंने मां को उस लड़की के बारे में बताया तो इसके बाद मेरे पापा ने उससे शादी करने से मना कर दिया। वो बोले कि बेटा तुम गलत कर रहे हो, तुम्हारी शादी वहीं होगी जहां हम करेंगे।

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पापा ने मेरी शादी किसी और से तय कर दी। जब शादी तय हो रही थी तो अनु ने मना किया कि शादी मत करो लेकिन वो खुद भी उस वक्त शादी के लिए तैयार नहीं थी और इंतजार करने के लिए कह रही थी। मैं कुछ नहीं कर सका। मेरी शादी हो गई तो अनु ने मुझसे बात करनी बंद कर दी। शादी को एक साल हो चुके हैं और अनु भी मुझसे बात नहीं करती, उधर बीवी मुझसे बहुत झगड़ा करती है। समझ नहीं आता कि जीऊं कि मरूं?

छोटी छोटी बातों को लेकर बीवी झगड़ा करती रहती है। ऐसा कोई दिन नहीं जिस दिन लड़ाई न होती हो। मुझे बहुत गुस्सा आता है मगर मैं कुछ नहीं कर सकता। मैं बीवी को बहुत समझाने की कोशिश करता हूं मगर वो नहीं मानती। मैंने मम्मी पापा की देखरेख के लिए उससे शादी की थी लेकिन वो उनलोगों के पास भी नहीं रही। वहां भी झगड़ा करती रही। मैं जहां रहता हूं वहीं जाने की जिद करती थी तो मैं बहुत परेशान हो गया।

जिनलोगों की खुशी के लिए इससे शादी की थी, उनके साथ रहने को तैयार नहीं। मां पापा ने कहा कि बेटा तू इसे अपने साथ ले जा, ये साथ रहेगी तो खुश रहेगी। मां पापा की बात मानकर उसे साथ ले आया मगर यहां भी वो नहीं बदली। मेरी जिंदगी तबाह हो चुकी है और बहुत उलझ गई है। अगर मैं अनु से शादी कर लेता तो मेरी लाइफ बहुत अच्छी होती, मैं उससे बहुत प्यार करता था। पता नहीं क्या हुआ, उसने मुझसे शादी ही नहीं की और मेरी जिंदगी किसी और से शादी करके बर्बाद हो गई। मैं क्या करूं?

हीर रांझा – 3 – भौजाई से रांझे की लड़ाई

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साहिबा की बात सुनकर रांझा को बहुत गुस्सा आया और उसने जवाब दिया,”सही कहा गया है कि औरत दगाबाज़ होती है। तुम औरतों ने समस्या खड़ी की और मुझे मेरे भाइयों से अलग करवा दिया। मैं एक खुश जिंदगी जी रहा था लेकिन तुम्हारी बुरी जुबान के कारण घर में झगड़े शुरू हुए। तुम औरतें मर्दों को उकसाती हो ताकि एक-दूसरे से लड़ पड़ें।”

साहिबा ने उतनी ही तल्ख़ी से उलटकर कहा, “तुम बहुत ज़्यादा दूध और चावल खा रहे हो, इसलिए इतना घमंड दिखा रहे हो। एक तुम ही हो जो हमारे परिवार पर कलंक हो। अगर घर छोड़ दो और कुछ दिन भूखा मरना पड़े तो तुम्हारी ये सारी भाषणबाज़ी बंद हो जाएगी। तुम आलसी हो और किसी काम के नहीं हो। तुम गाँव की लड़कियों पर बुरी नज़र रखते हो। गाँव की औरतें हमें खुलेआम कहती हैं कि वे तुम्हारे प्यार में पड़ गई हैं। तुम्हारी खूबसूरती देख ये औरतें उसी तरह फंसती हैं जैसे कि मधु में मक्खियाँ चिपक जाती हैं। औरतें तुम्हारे पीछे दिन-रात भागती हैं। तुम्हारे प्यार ने जाने कितने घरों को बर्बाद कर दिया है।”

भौजाई की जली-कटी सुनने के बाद रांझा और भी गुस्से में आया और जवाब दिया, “सारी दुनिया जानती है कि तुम इस गाँव की सबसे झगड़ालू औरत हो और तुम इतनी खूबसूरत हो कि तुम्हारे पति को इस बात का कभी डर नहीं होगा कि कोई दूसरा आदमी तुमको भगा ले जाएगा।”

क्रोध से साहिबा की आँखे लाल हो गई और उसकी सूरत पर लहराती लटें जहरीले साँप की फन की तरह हो गए।

वह बोलने लगी, “अगर हमलोग तुम्हारे लिए इतने ही बुरे हैं तो जाओ किसी सियाल की लड़की से शादी कर लो। जाओ उनके घरों के आस-पास जाकर अपनी बाँसुरी बजाओ और उनकी औरतों को फाँस लो। अगर तुमको हमारी खूबसूरती पसंद नहीं तो जाओ हीर से शादी कर लो। उसे दिन-रात तलाश करो ताकि तुम उसे अपने जाल में फँसा सको। अगर दिन में वह हाथ न आए तो रात को घर की पिछली दीवार गिराकर उसे भगा ले जाओ।”      कहानी आगे पढ़ें-

हीर रांझा – 2 – रांझे के खिलाफ भाइयों की साजिश

रांझा के सभी भाई मिलकर जमीन की माप-जोख करनेवाले काज़ी के पास गए और उसे रिश्वत देकर अच्छी जमीनों को आपस में बाँट लिया। बंजर और बेकार जमीन रांझे के हिस्से में आई। यह सब देखकर रांझा के दुश्मनों की खुशी का तो ठिकाना नहीं था।

अब वे समाज में घूम-घूम कर कहने लगे कि अब रांझा को भाइयों ने जाल में अच्छा फांसा है। रांझा को भी वो अपमानित करते हुए कहते थे, “यह आदमी खेत कैसे जोत सकता है जिसके सर पर बड़े-बड़े बाल हैं लेकिन दिमाग में दही भरा है। ऐसे आदमी से कौन औरत शादी करेगी जो जिंदगी में कभी कुछ नहीं कर सकता।”

रांझा की बेइज्जती करने में भाई भी पीछे नहीं थे, वे कहते, “उसने तो औरतों की तरह चूड़ियाँ पहन रखी हैं। दिन भर बाँसुरी बजाता रहता है और रात भर गाता रहता है। अगर वह जमीन को लेकर लड़ने आता है तो आने दो। देखते हैं कि क्या कर लेता है? हम सब की ताकत के आगे वह अकेला कुछ नहीं कर सकता।”

रांझा भारी दिल लिए अपने बैलों को लेकर खेत जोतने चला लेकिन उसकी आत्मा रो रही थी और धूप की तल्ख़ी उसके दुख को और बढ़ा रही थी। खेत जोतते हुए जब थक गया तो वह छाया में जाकर लेट गया और आराम करने लगा।

उसकी भौजाई साहिबा उसके लिए खाना लेकर आई और वह अपना दर्द उससे कहने लगा, “भौजी, मुझे खेत जोतना अच्छा नहीं लग रहा। जमीन बहुत कठोर है। मेरे हाथों में फफोले और पैरों में छाले पड़ गए हैं। पिताजी जिंदा थे तो कितने अच्छे दिन थे। जाने वे कहाँ चले गए और ये बुरे दिन मुझे देखने पड़ रहे हैं।”

साहिबा ताना मारते हुए बोली, “वैसे तुम तो बस अपने पिता के ही दुलारे थे। माँ के लिए तुम शर्मसार करने वाले बेटे थे।”आगे कहानी पढ़ें