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मां पर कविता: दिल को छू लेगी, आंख नम कर देगी

शादी के बाद ससुराल में बेटी को जब मां की याद सताती है, इस पर पहाड़ की बेटी ने खुद के अहसासों पर लिखी कविता…आपके दिल को छू जाएगी, आपकी आंखें नम कर देंगी..निवेदन है एक बार पढ़िएगा…

बहुत याद आती है तेरी
है कहां तू, यह सवाल बहुत सताता है
खोया मैंने है क्या, ये तो बस मेरा दिल जानता है

खोजूं कहां मैं तुझे, पता कुछ तो बता
है तू कहां अब मां, आस कुछ तो जगा

अब जब भी याद आती है ना मां तेरी
आसमा मैं देखने लगती हूं
चमकता जो सितारा है सबसे ज्यादा
उसे मां तुझे समझती हूं

चेहरा पढ़कर अब मेरी थकान का अंदाजा कोई लगाता ही नहीं मां
प्यार वो तुझसा जाने क्यों कोई जताता ही नहीं मां
आंखें पढ़कर मेरी तू दर्द सब जान लेती थी
हुआ क्या मुझे, बता बाबू बिन कहे बोल देती थी

aastha poetry on mother

तेरी गोदी सा वो सुकून कहीं मिला है नहीं मां
तेरे जाने के बाद जिंदगी में वो प्यार रहा ही नहीं मां

मेरा गुस्सा मेरे नखरे हंसकर जो सहती थी
एक तू ही थी मां जो मेरा हर रूप देख बस हंसती थी
मेरे गुस्से में भी पलटकर जो बस प्यार करती थी
मां मेरी जाने कैसे इतना बड़ा दिल रखती थी

कभी-कभी गुस्से में मां मैं कितना बुरा कहती थी
समझ मेरे दिल का हाल बस गले तू लगाती थी
मेरे एक आंसू को भी जो बहने नहीं देती थी
मेरी गलती पर भी मां मुझे मनाया करती थी

तेरे जाने के बाद मां कितना कुछ मैं समझी हूं
एक पल मैं वो बचपना खो बैठी हूं
आंसू छुपा कर अब मां मैं झूठी मुस्कान रखती हूं
अब सबकी खातिर मां मैं अंदर ही अंदर घुटती हूं

अब कोई दुख जब हो, मां तेरी तस्वीर पकड़ बस रोती हूं
हर लम्हा मां मैं तो तुझे बस याद करती हूं
होती जो तू, तेरे गले लग जीभर मैं रो लेती मां
सर रख गोदी में तेरी सुकून से सो जाती मां

अब तो सारी चोटें मैं यू ही सह लेती हूं
दर्द कितना ही हो मां चुप हो रह लेती हूं
याद आता है वो सब मुझको जब तू हुआ करती थी
छोटी सी चोट पर भी मेरी रोया तू करती थी

जन्नत से कम नहीं थी मेरी वो जिन्दगी मां
साथ हर कदम पर जब तू होती थी
तेरे ना होने का दुख मां बस मैं ही समझती हूं
खोया मैंने सबकुछ है मां मैं बस तेरे लिए तड़पती हूं

लव यू मां बहुत याद आती हो- तुम्हारी बेटी आस्था

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प्रेम कविता – दिल की दीवारों पर तेरी तस्वीर बनी है

Love poem by rajeev

ऐसा लगता है जैसे तुम मेरे पास बैठी हो
दिल की दीवारों पर तेरी तस्वीर बनी है

मैं जब सोता हूं तो वही तस्वीर
मेरे ठीक बगल में सो जाती है
मैं जब सुबह जागता हूं तो
मेरे साथ वो भी जाग जाती है
जब निकलता हूं घर से कहीं
तो मेरे साथ वो तस्वीर भी चलती है

भूख लगती है तो पहले पूछता हूं
उस तस्वीर से, तुमने खाया कि नहीं

मैं और तुम्हारी तस्वीर का ये मंजर
कितना अजीब है देखो जानेमन
तुम मेरे बहुत करीब वजूद में हो मगर
फिर भी अधूरा सा महसूस करता हूं
एक दर्द का अहसास हमेशा करता हूं

तेरी तस्वीर दिल में और तुम सामने होगी
तभी ये इश्क और जिंदगी मुकम्मल होगी।

Written by @RajeevSingh