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दिल्ली से स्वाति की लव स्टोरी – love story of swati from delhi

Hi, मेरा नाम स्वाति है। मैं दिल्ली से हूं। चार साल पहले शुरू हुई थी मेरी मोहब्बत। उस दिन ये नहीं पता था कि एक दिन मुझे अकेले ही रहना पड़ेगा। दुनिया एक तरफ और मैं एक तरफ। सब उसकी बुराई करते रहे पर मैंने किसी की एक नहीं सुनी।

धीरे धीरे उसकी बातों में, उसके प्यार में इतनी अंधी और बहरी हो गई कि मुझे दिखाई नहीं दिया। मेरी सुबह, मेरी शाम,मेरी फैमिली, मेरा दोस्त, सबकुछ वही हो गया था।swati love story
चार सालों में एक दिन भी उसने मुझसे दिल से प्यार नहीं किया। हमेशा दिमाग से चलता रहा। मैं दिल की गहराइयों में डूबती रही। पूरी लाइफ उसके साथ गुजारने की ख्वाहिश ने मुझे इतना अंधा किया कि घर बाहर सबसे बगावत करने लगी। उसे तो मेरा साथ कभी चाहिए ही नहीं था इसलिए उसने मेरा साथ एक पल के लिए भी नहीं दिया।
वह मेरी कमजोरी जानता था इसलिए वो मुझे इमोशनली तोड़ता रहा। झूठी कसमें, झूठे वादे कर कर के मुझे अंधा बना दिया। झूठे सिंदूर और मंगलसूत्र का भी मजाक बना दिया। और मैं धीरे धीरे अपनी ही दुनिया से दूर होती गई। लगा कि यही मेरा सबकुछ है।

कभी एक पल भी किसी दोस्त या अपनों की जरूरत महसूस नहीं हुई।
आज न मेरा दोस्त है और ना ही कोई अपना। देखते ही देखते आज उसने किसी और का हाथ थाम लिया और मुझे तड़पता मरने के लिए छोड़ गया। एक बार तो कोशिश करता मुझे अपनाने की।

अगर वह मांगता तो मैं उसके लिए जान भी हाजिर कर देती। क्या कोई ऐसे प्यार को छोड़ कर जाता है? क्या ऐसे लोगों को भगवान माफ करते हैं? क्या वो खुश रह सकते हैं किसी और के साथ जो पहले ही किसी की जिंदगी तबाह कर चुके हों?
क्या कसूर था मेरा कि मैंने सच्चा प्यार किया? क्या कमी पूरी नहीं की मैंने, जो कोई और कर देगी? क्यों कोई किसी के दिल से खेलता है? फर्ज उस वक्त क्यों याद नहीं आता जब किसी से कोई प्यार करने की बात करता है? क्या किसी लड़की के अपने नहीं होते, उसके फर्ज नहीं होते? क्यों वो प्यार के लिए सबसे लड़ जाती है, उसका खुद का सेल्फ रिस्पेक्ट नहीं है क्या?
मेरा ये मैसेज सारे लड़कियों को है, जो किसी को दिल से चाहती है। एक बार परख लो ताकि बाद में अपनी जिंदगी गंवाना न पड़े। किसी की प्यार भरी बातों में जल्दी न आना। जो तुम्हें अपनाने से कतराए, उनसे उसी पल दूर हो जाओ।

जिंदगी फालतू नहीं है और दिल कोई खिलौना नहीं है जिससे जब तलक मन करे, कोई खेले और जब मन भर जाए तो फिर किसी और को तलाशने लगे। मैं इसके खिलाफ हूं और मेरी बद्दुआ है उन लोगों को जो अपने स्वार्थ के लिए किसी के दिल से खेलते हैं। वो लोग कभी खुश नहीं रहेंगे और ना ही उन्हें कभी प्यार नसीब होगी।

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