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समाज के लोग कह रहे, प्रेम विवाह किया तो हुक्का पानी बंद करेंगे, कैलाश की स्टोरी

मैं गुजरात से कैलाश हूं। मेरा गांव है जिसमें मैं एक लड़की से प्यार करता हूं। वो मेरे पड़ोस में रहती है। बचपन से ही हम साथ पढ़े। पहली क्लास से ग्रेजुएशन तक हम दोनों सच्चे दोस्त की तरह साथ चले और हमारी दोस्ती बढ़ती ही गई। वो मुझे बहुत प्यार करती थी पर मुझे इसका अहसास नहीं था। लगता था कि वो मेरी अच्छी और सच्ची दोस्त है। मैं ये भी सोचता था दोस्ती में प्यार नहीं हो सकता। मुझे इस बात का भी डर था कि हम दोनों पड़ोसी हैं तो हमारा रिश्ता कोई स्वीकार नहीं करेगा।

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जब हम 11वीं में गए तब उसने मुझे प्रपोज किया था। मैंने उस वक्त उसका जवाब नहीं दिया और मैं हंसने भी लगा। हम दोनों एक ही बस से कॉलेज जाते थे। वो मुझे प्रपोज करने के बाद जवाब के लिए रोज पूछती थी तो मैंने एक दिन उसको बस के अंदर ही थप्पड़ मार दिया। मैंने उससे बात करना ही छोड़ दिया। हम दोनों दोस्त थे इसलिए ये सब मुझे अच्छा नहीं लग रहा था। फिर एक ही बस स्टैंड पर हम दोनों रोज खड़े होते थे लेकिन बात नहीं करते थे। वो मुझे सॉरी बोलना चाहती थी या मैं भी उसको सॉरी बोलना चाहता था लेकिन हम एक-दूसरे से कह नहीं पाए।

इसके बाद मुझे उसकी याद आने लगी क्योंकि ग्रेजुएशन में वो दूसरे कॉलेज में जाने लगी थी। मैं अकेला पड़ गया था। उसे लग गया था कि मैं उससे अब कभी बात नहीं करूंगा। मुझसे खाना नहीं खाया जाता था, वो मेरा कॉल भी रिसीव नहीं करती थी। उसने मैसेज किया था कि मुझे अकेला छोड़ दो। फिर एक दिन मेरे कॉलेज में एनुअल फंक्शन था जिसमें मैंने ड्रामा में एक्टिंग की थी। वो देखने आई थी तो मुझे लगा था कि वो मेरी एक्टिंग के बारे में कुछ कहेगी। हुआ भी वैसा ही। ड्रामा के बाद उसने मिलने के लिए बुलाया।

उसका मैसेज आया तो मैं उससे कॉलेज गेट पर मिला। मैंने उसको गले लगा लिया और वो भी बहुत खुश हुई। मुझे पता चला कि उसके पापा शादी के लिए लड़का खोज रहे थे। मैंने उससे कहा कि तुम शादी से मना कर देना चाहे कोई भी लड़का देखने आए। हम दोनों ने अपने मम्मी पापा से हमारी शादी के बारे में बात की। थोड़े दिनों में दोनों के मम्मी पापा तो मान गए लेकिन हमारे गांव समाज के लोगों ने विरोध कर दिया। कहा कि अगर यह शादी हुई तो हुक्का पानी बंद कर देंगे और गांव से निकलना पड़ेगा।

हम दोनों कोर्ट मैरिज कर सकते हैं लेकिन हम एरेंज मैरिज करना चाहते हैं जिसके लिए हमारी बिरादरी तैयार नहीं है क्योंकि हम एक ही गांव के हैं। रोज लोगों के ताने सुन-सुनकर मैं परेशान हूं। हम दोनों कहीं साथ नहीं जा सकते क्योंकि रास्ते में लोग टीका-टिप्पणी करते हैं। हमें क्या करना चाहिए?

पेड एडमिन राजीव की सलाह

गुजरात के कैलाश जी, आपने बताया कि बिरादरी के लोग आपको गांव से निकालने की धमकी दे रहे हैं। व्यावहारिक तौर पर देखा जाय तो इस शादी को बाद वाकई वो लोग आपका जीना मुश्किल कर सकते हैं। साथ ही आपके परिवार को लोग भी बिरादरी के गुस्से को देखकर कदम पीछे खींच सकते हैं।

यह मामला समाज से लड़ाई का है। प्यार एक तरफ है और जालिम समाज एक तरफ। खुद पर यकीन कीजिए और गांव बिरादरी के लोगों से लड़ने के लिए मानसिक रूप से तैयार होकर शादी कीजिए। वैसे हो यह भी सकता है कि शादी को बाद लोग आप दोनों को स्वीकार कर लें ये सोचकर कि चलो कर लिया तो अब क्या…वैसे गुजराती समाज बहुत कठोर है, यह मुझे तब मालूम हुआ जब वहां के लड़के-लड़कियों से जज्बात पेज के जरिए बात करने का मौका मिला।

हरियाणा की खाप पंचायतें अपने ऐसे ही तुगलकी फैसलों के लिए मशहूर है। हमारे समाज में शुरू से एक मान्यता है कि गांव के सभी लड़के-लड़कियां भाई-बहन हैं। हलांकि यह मान्यता ही है, मैं खुद इस मान्यता को नहीं मानता। जब भी दो अपोजिट जेंडर एक जगह होंगे तो प्यार के रिश्तों का पनपना स्वाभाविक है। हर किसी का भाई-बहन का रिश्ता ऐसे थोपने से नहीं बन जाता।

अब समाज जो मानता है, उसे अधिकांश लोग मानते हैं इसलिए उनकी ताकत ज्यादा हो जाती है। हम जो मानते हैं, उसमें हम अकेले पड़ जाते हैं और ऐसी लड़ाई हमें अकेले ही लड़नी पड़ती है। आज के भारत में कम से कम गुजराती तो भूखा नहीं मर सकता…अगर प्यार किया है तो प्यार के लिये लड़ने का जज्बा भी रखिए।

गांव के लोग परेशानी खड़ी करेंगे। आप दोनों परिवार के बड़े लोगों को समाज में जीने में परेशानी हो सकती है। उनको साथ लीजिए…उनके साथ बैठकर बात कीजिए। इस मामले में अगर घरवाले आपके साथ होंगे तो और भी अच्छा रहेगा।

पेज रीडर्स की सलाह

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उसने प्यार का नाटक किया और मेंटल टॉर्चर कर मुझे पागल कर दिया, प्रेरणा की स्टोरी

मैं प्रेरणा मध्य प्रदेश से। मैं अपनी स्टोरी पोस्ट इसलिए कर रही हूं क्योंकि मुझे अपनी एक बात पर हमेशा गिल्ट फील होता रहता है और जिस वजह से मैं डिप्रेशन में हूं। इतनी डिप्रेश्ड हूं कि शायद अगली सुबह देख नहीं पाऊंगी। मैं स्टडी में बहुत अच्छी थी और एलएलबी करके कुछ करना चाहती थी। पर किस्मत ने इतना दर्द लिख दिया कि अब सारे सपने अधूरे लगते हैं। बहुत कोशिश करती हूं कि खुश रहूं लेकिन हंसना जैसे एक सपना बन गया है।

मेरे घरवाले शादी के लिए एक लड़का देख रहे थे पर उनके यहां पैसों की डिमांड बहुत ज्यादा थी इसलिए मेरे पापा रेडी नहीं हुए। फिर एक दिन उस लड़के का मेरे पास मैसेज आया कि उसे कुछ बात करनी है। मुझे पहले पता नहीं था कि वो लड़का कौन है। मैंने रिप्लाई दिया तो फिर उसने अपना परिचय दिया। मैंने उसे क्लियर कर दिया कि मेरे पापा शादी के लिए तैयार नहीं हैं तो उसने कहा कि वो अपने घर बात करेगा।

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इसके बाद वो रोज मुझे फेसबुक पर मैसेज करने लगा। मैं कभी-कभी रिप्लाई दे देती थी। मैंने उसे कई बार बोला कि प्लीज मैसेज मत करो पर उसने कहा कि फ्रेंड बन जाओ तो मैं मान गई। इसी बीच उसने मुझसे मेरा नंबर मांगा और मैंने उसे नहीं दिया। इसके बाद वो अपने मम्मी पापा की कसम खाकर बोला कि वो कभी कॉल नहीं करेगा, बस इमरजेंसी पड़ी या शादी की बात होगी, तभी कॉल करेगा। मैंने नंबर दे दिया तो इसके बाद वो मुझे बार-बार कॉल करके परेशान करने लगा।

वो मुझे कॉल पर बात करने के लिए रिक्वेस्ट करने लगा। मैं उसकी बातों में आ गई और एक फ्रेंड की तरह बात करने लगी। फिर उसने मुझे एक दिन प्रपोज किया और न जाने क्यों मैंने एक्सेप्ट कर लिया। उसने मुझसे वादा किया कि वो मेरे घर आकर शादी की बात करेगा और शादी करेगा इसलिए मैंने प्रपोजल एक्सेप्ट किया था। मैंने बाद में कई बार उससे रिश्ता तोड़ना चाहा और कहा कि परिवार की मर्जी से कहीं शादी कर लो लेकिन वो मुझे सुसाइड करने की धमकी देकर बात करने पर मजबूर करता रहा। वो मुझे फैन से लटकने की फोटो भेजता था तो मैं अटैच्ड होती चली गई।

वो मेरी कमजोरी का फायदा उठाता गया। बार-बार सुसाइड करने की धमकी देता था और बहुत प्यार करता है, ऐसा अहसास कराता रहता था। फिर एक दिन उसने बताया कि उसकी शादी फिक्स हो गई है। मैंने उसे बहुत रो रोकर समझाया, रिक्वेस्ट की, भीख मांगी पर वो अपनी फैमिली को शादी से मना करने के लिए तैयार नहीं हुआ। उसने मुझे इग्नोर करना शुरू कर दिया। यहां तक कि मुझसे पीछा छुड़ाने के लिए फिर सुसाइड का ड्रामा किया। मुझे उसने इतना मेंटल टॉर्चर किया कि मैं पागल होने लगी।

मुझसे ये बर्दाश्त नहीं हुआ और मेरी एक फ्रेंड ने बोला कि तू उसे गालियां दे। मैंने कॉल लगाकर उसे बहुत बद्दुआएं दीं पर मैं उससे प्यार करती थी। वो मेरे साथ कुछ भी करे, मैं उसका बुरा नहीं कर सकती थी इसलिए मुझे गिल्ट फील हुआ और उससे सॉरी बोला। फिर उसने मुझे बहुत बुरा भला कहा और मुझे मरता हुआ छोड़ गया। वो अपनी मंगेतर से बात करने लगा। एक दिन उसने मुझे कॉल कर कहा कि तुमने मुझे बद्दुआ देकर अच्छा नहीं किया। मुझे बहुत गिल्ट फील कराया।

उसकी शादी हो गई। अब मुझे अंदर से बहुत गिल्ट फील होता है जैसे मैंने किसी का मर्डर कर दिया हो। मैं बाहर नहीं जा पा रही हूं। बहुत डरी सहमी रहती हूं। हल्की आवाज से भी डर जाती हूं। माइंड जीरो हो जाता है। ऐसा लगता है जैसे मर जाऊंगी मैं। प्लीज आप बताइए कि क्या मैंने कुछ गलत कर दिया। उसने मुझे शादी के सपने दिखाए और बाद में मुझे बोल दिया कि गलती तेरी थी, तूने क्यों नंबर दिया, क्या हर किसी लड़के को तू नंबर दे देगी। उसकी इस बात ने मुझे अंदर तक हर्ट कर दिया। मैंने जवाब दिया कि ठीक है , जैसे आज तू मेरे साथ कर रहा है, तेरे साथ भी कल वैसा होगा। क्या ये बैड विश है जो मैंने उससे कहा, प्लीज बताइए।

पेड एडमिन राजीव की सलाह

आप अपनी जिंदगी की कहानी में कहीं कसूरवार नहीं तो खुद को क्यों दोषी मान रही हैं। धोखा उसने दिया और दोषी आप खुद को मान रही हैं। आपने उसको बद्दुआ देकर बहुत अच्छा किया, उसको जूते से मारना चाहिए था या उसको जेल भिजवाना चाहिए था। ऐसा इंसान धरती पर न रहे, उसी में भलाई है क्योंकि वह आगे भी आप जैसी कितनी मासूम लड़कियों के साथ ऐसे ही सुसाइड का ड्रामा कर फंसाएगा और उसका यूज करेगा।

आपकी बातों से लगा कि आपकी मानसिक हालत ठीक नहीं है। आप घर में किसी करीबी से अपने मन की बातें कहिए। मन में बातें रहेंगी तो आपको काटती रहेंगी। आप किसी भी तरह से दोषी नहीं हैं। आप गिल्ट फील मत करिए। गिल्ट तो उस क्रूर इंसान को फील करना चाहिए जिसने इतना कुछ आपके साथ किया और उस पर आप कह रही हैं कि वो कितना भी बुरा कर ले, आप उसके कुछ भी बुरा नहीं कर सकती।

प्रेरणा अपनी जिंदगी और सोच को मजाक मत बनाइए। डिप्रेशन और ऐसे मानसिक हालात होने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। आपने कहा कि आप डरी सहमी रहती हैं, आवाज से भी डर जाती हैं। यह क्रिटिकल कंडीशन है। आपके घरवालों को ये सब मालूम है कि नहीं…कैसा समाज है ये..घर में ही कोई इतना घुटता रहता है और किसी को कुछ पता नहीं होता…

पेज रीडर्स की सलाह

वो मेरी बात नहीं मानती, कहती है मेरे ऊपर दिमाग न लगाओ, विराट की स्टोरी

मेरा नाम विराट है। गरिमा से दोस्ती है। मैं उससे बहुत प्यार करता हूं लेकिन वो मुझे अपना दोस्त ही मानती है। हम लोग चार साल से एक दूसरे के साथ हैं, चाहे कितनी भी लड़ाई हो जाए पर हम लोग एक दूसरे से बात किए बिना नहीं रह सकते हैं।

अब वो बदली-बदली सी लग रही है। पहले मैं जिस बात को करने से मना करता था, वो नहीं करती थी लेकिन अब वो मेरी बात नहीं मानती है। कहती है कि ये मेरी लाइफ है, मैं चाहे जैसे जीऊं, तुम्हें क्या इससे मतलब। उसने मुझसे बात करना भी कम कर दिया है।

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पहले जो भी बात हुआ करती थी वो हमें बताया करती थी पर अब कुछ भी नहीं बताती है। जब मैं कुछ पूछता हूं तो वो कहती है कि तुम अपने काम से काम रखो, फालतू का मेरे ऊपर दिमाग न लगाओ और बात करने से मना कर देती है।

अब बताओ दोस्तों, हम क्या करें…जो हम फिर से उसे पा सकें, वो पहले की तरह हमसे बात करे, हमारे साथ रहे, हमसे लड़ाई नहीं करे, हमारे साथ खुश रहे..

पेड एडमिन राजीव की बात

गरिमा अपनी जगह सही है। आप पजेसिव मत बनिए। रिश्ते की सीमा को समझिए। गरिमा अपनी जिंदगी के फैसले लेना चाहती है, इसमें आपको दखल देने की जरूरत नहीं। वो सही कह रही है कि आप उसकी जिंदगी के लिए ज्यादा दिमाग मत लगाइए। ऊपरवाले ने हर किसी को अपनी जिंदगी पर लगाने के लिए पर्याप्त दिमाग दिया है। आप भी अपना दिमाग अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने में और फैसले लेने में लगाएं। आप जो जिद किए बैठे हैं, उसका एक ही समाधान है कि आप जिद छोड़ दें।

पेज रीडर्स की सलाह

मैंने गर्लफ्रेंड को रोका-टोका तो उसने मुझे सायको समझ लिया और दूर हो गई

मैं अभिषेक। मैं उसे सोना कहा करता था। बचपन से ही उसे बहुत प्यार करता था लेकिन मैं उससे कह नहीं पाता था। साल बीतते गए लेकिन मुझमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि मैं सोना को बोल पाता। जब मेरा जेईई मेंस में सेलेक्शन हो गया तो मैंने कॉलेज में ही उसे प्रपोज किया तो वो मान गई थी।

हम दोनों के बीच तीन साल तक सबकुछ ठीक चलता रहा। मुझे इतना प्यार हो गया था कि थोड़ी भी वो कहीं बिजी रहती तो मैं उससे पूछने लगता था कि कहां बिजी रहती हो, छोटे कपड़े क्यों पहनती हो…मैं उसे खोना नहीं चाहता था। वो मेरा पहला प्यार थी।

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सोना ने मुझे सायको समझ लिया और मुझे छोड़ दिया। आज भी जब मैं कॉल करता हूं तो वो बोलती है कि कॉल मत करना, नहीं तो मैं पुलिस को नंबर दे दूंगी। आज भी मुझे उसकी याद आती है तो बहुत रोता हूं। मैं उसे भूल नहीं पाता। उसकी फोटो देख हर दिन रोता हूं।

वो मेरी फीलिंग नहीं समझती। मुझे वो फोन नहीं करने के लिए बोलती है जबकि मैं कॉल पर ही रो देता हूं। आज भी मैं उससे बेपनाह मोहब्बत करता हूं। मुकद्दर में जिनसे मिलना नहीं, उनसे मोहब्बत भी कसम से कमाल की होती है…

पेज एडमिन राजीव की बात

प्रेम जिसके मन में फूटता है वहां उसके साथ आजादी की भावना भी होती है। अगर कोई लड़की किसी लड़के को भी ज्यादा रोक-टोक करती है तो रिश्ता नहीं चलता। पजेशन की भावना से भी प्यार का रिश्ता खराब होता है। आपने प्यार तो किया लेकिन सोना से जीने की आजादी छीन ली, इसलिए उन्होंने आपको सायको समझ लिया। अब उसको समझाना मुश्किल होगा इसलिए आप आगे से ध्यान रखिए और किसी पर भी अपनी बात मत थोपिएगा।

पेज रीडर्स की राय

मैं किसी से प्यार करती हूं लेकिन पापा मेरे लिए लड़का खोज रहे हैं, माही की स्टोरी

मैं बिहार से माही हूं। तीन साल पहले मेरी फ्रेंडशिप फेसबुक पर एक लड़के से हुई। वो यूपी का है और जॉब करता है। हमदोनों रोज बातें करने लगे। वो मुझसे हर बात शेयर करने लगा। धीरे-धीरे हमारी फ्रेंडशिप प्यार में बदल गई। मैं उसे तीन साल से जानती हूं लेकिन हमारी कभी मुलाकात नहीं हुई है।

वो मुझसे मिलना चाहता है। मेरी नजर में बहुत अच्छा लड़का है। मैं उससे बहुत प्यार करती हूं। वो भी मुझे बहुत प्यार करता है। मेरे बिना वो एक पल नहीं रह सकता। वो मुझसे शादी करना चाहता है। मैं भी उसे बहुत चाहती हूं लेकिन मैं बहुत डरती हूं कि कहीं हमलोग अलग न हो जाएं।

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मैं एक मिड्ल क्लास फैमिली से हूं। मेरे पापा बहुत स्ट्रिक्ट हैं। मैं जानती हूं कि मेरे पापा हमारी शादी के लिए कभी रेडी नहीं होंगे क्योंकि वो बहुत दूर रहता है और फेसबुक का प्यार है। मैं पापा की एक ही बेटी हूं तो उन्होंने कभी खुद से मुझको दूर नहीं किया। अब वो कहीं दूर मेरी शादी भी नहीं करेंगे। मैंने इस बारे में मां से बात की तो उन्होंने भी कहा कि पापा नहीं मानेंगे।

मैं उसके बिना नहीं रह सकती। एक दिन भी बात नहीं होती तो मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लगता। मैं उससे बात करने के लिए पागल होने लगती हूं। मैं खुद को उससे एक पल भी अलग नहीं कर सकती। मेरे प्यार के बारे में मेरी मम्मी को पता है लेकिन वो भी बार-बार कहती है कि यह शादी नहीं हो सकती।

पापा अब मेरे लिए रिश्ता खोज रहे हैं। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं? मैं उसके बिना जीने की कल्पना भी नहीं कर सकती हूंं। वो कहता है कि चलो, कोर्ट मैरिज कर लेते हैं लेकिन मैं फैमिली के खिलाफ शादी नहीं कर सकती। मेरी फैमिली मुझसे बहुत प्यार करती है।

मैं क्या करूं, कुछ समझ में नहीं आ रहा। मैं उसके बिना नहीं जी सकती। मैंने इस पेज की कुछ स्टोरी पढ़ी तो वहां सबको हेल्प मिली हैं। मुझे भी आप सबकी हेल्प की जरूरत है, मैं बहुत परेशान हूं, प्लीज मेरी हेल्प कीजिए…

पेज एडमिन राजीव की बात

माही, और भी गम हैं जमाने में मोहब्बत के सिवा…शायद लड़कियों को भी ये समझने की जरूरत है। खैर, आपकी सिचुएशन में दो ही विकल्प बचते हैं- या तो फैमिली को अपनाइए या फिर प्यार को अपनाइए। प्यार को अपनाएंगी तो फैमिली को छोड़ना होगा या फैमिली को चुनेंगी तो प्यार को छोड़ना होगा।

तीसरा विकल्प होता है घरवालों को मनाने का। अगर इस कोशिश में असफल हों तो फिर वही पहले वाले दो विकल्प बचते हैं। दिमाग के जाले साफ कीजिए। विकल्पों पर विचार कीजिए। उलझन नहीं रहेगी। किसी भी परिस्थिति में इंसान ऑप्शन देखता है।

अगर दो ऑप्शन हैं और दोनों ही ऑप्शन में से किसी एक को चुनना हो तो स्पष्ट फैसला जीवन को उलझनों से बचाता है वरना वक्त के सिवा दुनिया की कोई ताकत ऐसी उलझनों को नहीं सुलझा सकती।

पेज रीडर्स की बात

अपने मन से पूछिए, कई समस्याओं का समाधान मिल जाएगा

कल रात इस पेज के एक रेगुलर रीडर का मैसेज आया। अक्सर उनके कमेंट आते हैं। उन्होंने जब अपनी प्रॉब्लम बताई तो मैं थोड़ा चौंक गया। उन्होंने बताया कि चार महीने पहले उनकी प्रेमिका की शादी किसी और से हो गई और वो उनसे अब कॉल पर बात करती है। चूंकि वे खुद काफी संवेदनशील और समझदार इंसान हैं इसलिए उनको लगा कि इसमें कुछ गलत है लेकिन वो खुद को बात करने से रोक नहीं पा रहे इसलिए उलझे हुए थे।

मैंने उनसे कहा कि ऐसी परिस्थिति में आप जो दूसरों को सलाह देते वही समाधान है। हलांकि उन्होंने जाते-जाते लिखा कि उनको समाधान मिल गया और मेरा धन्यवाद भी किया।

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जब आपके मन में इस तरह की कोई उलझन या समस्या हो तो उसके समाधान के लिए विचार तलाशने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप यह सोचें कि आपकी सिचुएशन में अगर कोई और होता तो उसे आप क्या सलाह देते। आप जो दूसरों को सलाह देते, वही समाधान है और उसी पर एक्शन लेना चाहिए।

जैसे कोई आपसे कहे कि शादी के बाद भी किसी और की बीवी बन चुकी प्रेमिका मुझसे बात करती है तो आप तुरंत कहेंगे कि नहीं ये ठीक नहीं है, उसका घर उजड़ सकता है वगैरह वगैरह। बस जो दूसरों के मामले में लागू होता है उसे भी आप अपनी जिंदगी में भी लागू कीजिए। अमूमन लोग दूसरों की जिंदगी की उलझनों पर तो सलाह दे लेते हैं लेकिन अपनी जिंदगी उलझती है तो कुछ सोच नहीं पाते।

सोचने के लिए खुद के अंदर झांकना जरूरी है। जैसे आप दूसरों को देखते हैं, वैसे ही खुद को आईने में देखिए। देखिए कि आईने में ये कौन है और फिर उसे बताइए कि तुमको क्या करना चाहिए। कभी-कभी खुद को ही दूर खड़े रहकर देखने से जीवन की बहुत सारी बातें समझ में आती हैं कि आखिर हम कर क्या रहे हैं। आशा है आप यह नहीं कहेंगे कि फिलॉसफी झाड़ रहा हूं और यह बात आपके सर पर से भी नहीं गुजरी होगी। एक शायर ने लिखा-

दूसरों से मिलना तो बहुत आसान है साकी
अपनी हस्ती से मुलाकात बड़ी मुश्किल है

जिस दिन आप खुद से बात करने लगेंगे। खुद से संवाद स्थापित कर पाएंगे, बहुत सारी समस्याओं का समाधान मिल जाएगा। अकेलापन भी दूर होगा जब आपके अंदर ही आपको कोई मिल जाएगा, उसे तलाशिए। बाहर से ज्यादा हमारे अंदर बहुत कुछ है।